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Jallianwala Bagh: आज है जलियांवाला बाग नरसंहार की बरसी, जानें इस हत्याकांड का इतिहास
Sat, 13 Apr 2024 04:32 PM IST
शिवानी अवस्थी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Sat, 13 Apr 2024 04:32 PM IST
सार
हर कोई अंग्रेजी हुकूमत के हिटलरशाही रवैए का पीड़ित था। उस दौर में एक ऐसा नरसंहार हुआ, जिसकी याद आज तक भारतीयों के जहन में है। गुलाम भारत का एक दर्दनाक नरसंहार आज ही के दिन हुआ था।
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Jallianwala Bagh
- फोटो : istock
विस्तार
Jallianwala Bagh Massacre: भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी दिलाने के लिए आंदोलनकारियों और क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों की आहूति दे दी। इस जद्दोजहद में कई निर्दोष भारतीयों की भी जान चली गई, जिसमें निहत्थे लोग, महिलाएं, वृद्ध और बच्चे भी शामिल थे। हर कोई अंग्रेजी हुकूमत के हिटलरशाही रवैए का पीड़ित था। उस दौर में एक ऐसा नरसंहार हुआ, जिसकी याद आज तक भारतीयों के जहन में है। आज ही के दिन जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ था।
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गुलाम भारत का एक दर्दनाक नरसंहार आज ही के दिन यानी 13 अप्रैल को हुआ था, जिसे इतिहास में शहादत के दिन के रूप में याद किया जाता है। जलियांवाला बाग हत्याकांड में बेकसूर भारतीयों के खून की नदियां बहीं थीं। भारतीयों की लाशें और बच्चों से लेकर बूढ़ों तक पर गोलियों की बरसात कर दी गई थी। जलियांवाला बाग नरसंहार की बरसी के मौके पर जानिए इस दिन का इतिहास।
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कब और कहां हुआ था जलियांवाला नरसंहार
पंजाब के अमृतसर में जलियांवाला बाग नाम की जगह पर 3 अप्रैल 1919 को अंग्रेजों ने कई भारतीयों पर गोलियां बरसाई थीं। इस कांड में कई परिवार एकसाथ खत्म हो गए। अंग्रेजो ने बच्चे, महिला, बूढ़े किसी को नहीं छोड़ा। उन्हें बंद करके गोलियों से छलनी कर दिया।
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नरसंहार की वजह
जलियांवाला बाग में अंग्रेजों की दमनकारी नीति, रोलेट एक्ट और सत्यपाल व सैफुद्दीन की गिरफ्तारी के खिलाफ उस दिन एक सभा का आयोजन हुआ था। हालांकि इस दौरान शहर में कर्फ्यू लगा हुआ था। कर्फ्यू के बीच हजारों लोग सभा में शामिल होने पहुंचे थे। वहीं इस दौरान बैसाखी का मेला भी वहां लगा था, जिसमें शामिल होने के लिए कई लोग अपने परिवार को लेकर वहां पहुंचे थे।
कौन थे जनरल डायर?
ब्रिटिश हुकूमत जलियांवाला बाग पर इतने लोगों की भीड़ देखकर बौखला गई। 1857 की क्रांति को दोबारा दोहराने का डर लिए ब्रिटिश हुकूमत ने भारतीयों की आवाज कुचलने की मंशा बना ली। क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए इस नरसंहार को अंजाम दिया। जब सभा में शामिल नेता भाषण दे रहे थे तो ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर ने वहां पहुंचकर 90 ब्रिटिश सैनिकों को गोली चलाने के आदेश दिए। कहा जाता है कि इस दौरान वहां 5000 लोग मौजूद थे। बिना चेतावनी उन्हें घेर कर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं गईं।
हजारों भारतीयों की मौत
अंग्रेजों की गोलियों से बचने के लिए लोग वहां स्थित कुए में कुद गए। कुछ देर में कुआं भी लाशों से भर गया। वैसे तो जलियांवाला बाग में हुए नरसंहार में शहीद लोगों का सही आंकड़ा आज तक पता नहीं चल सकता है लेकिन डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में 484 शहीदों की सूची है, वहीं जलियांवाला बाग में 388 शहीदों की लिस्ट है।
ब्रिटिश सरकार के दस्तावेजों में 379 लोगों की मौत और 200 लोगों के घायल होने का दावा किया गया। वहीं अनाधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, ब्रिटिश सरकार और जनरल डायर के इस नरसंहार में 1000 से ज्यादा लोग शहीद हुए थे और लगभग 2000 से अधिक भारतीय घायल हुए थे।