इंटरव्यूः योग के लिए आखिर क्यों कट्टरपंथियों के निशाने पर रहीं राफिया नाज?
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आज 21 जून को पूरे विश्व में योग दिवस मनाया जा रहा है। योग केवल एक शारीरिक व्यायाम ही नहीं है योग लोगों की मानसिक अवस्था को भी नियंत्रित करता है। कल तक भारत की विरासत कहे जाने वाले योग की आज पूरे विश्व में मान्यता है। दुनिया भर में योग को बढ़ावा देने वाले कई लोग और संस्थान हैं जो योग के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं और इस अद्भुत खोज को पृथ्वी के कोने-कोने में फैलाने में जुटे हैं।
योग को जीवन मानने वाली और हजारों बच्चों को फ्री में योग सीखने वाली 'राफिया' भी उन्ही चंद लोगों में से एक हैं, जिन्होंने योग से नकारात्मकता मिटाने की ठान ली है। खास बात यह है कि राफिया एक मुस्लिम महिला हैं। ये वही राफिया नाज हैं जिन्होंने बिना भेदभाव के योग को खुली बाहों से अपनाया है, लेकिन दुर्भाग्य की बात तो ये है कि नेक काम करने के बावजूद वो कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। अमर उजाला से हुई उनकी खास बातचीत में उन्होंने योग से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए और अपना अनुभव भी साझा किया।
आज विश्व योग दिवस के दिन आपने दिन की शुरुआत कैसे की कहने पर राफिया हसंते हुए कहती हैं- 'रात भर तो सोई नहीं। रात 2 बजे मैदान के लिए में योग करने के लिए बस थी। वहां पहुंच तो गई, लेकिन मेरे दोस्त और स्टूडेंट्स तो अंदर चले गए लेकिन मुझे बाहर निकल दिया गया। ऐसे में दिन की शुरुआत तो रो कर हुई। हालांकि मुझे पहले से ही पता था कि अंदर नहीं जाने दिया जाएगा फिर भी तकलीफ तो होती है। वैसे भी मैं तो साल के 365 दिन योग दिवस मानती हूं, मलाल तो उनको होता है जो सिर्फ एक दिन योग करते हैं।
जाति, धर्म और संप्रदाय के तौर पर कितना भी भेदभाव हो, लेकिन राफिया के जीवन में योग के खास मायने हैं। वो कहती हैं कि, 'मैं चार साल की उम्र से योग कर रही हूं। ''एक इंसान के लिए परिवार के समर्थन से बढ़कर कुछ नहीं होता, फिर चाहे दुनिया में कितनी भी उंगलियां आप पर उठ जाएं फर्क नहीं पड़ता। राफिया आगे कहती हैं कि, 'योग मेरी जिंदगी है क्योंकि होश संभालने के बाद से ही मैं योग करती आ रही हूं और इसके लिए मैंने बहुत कुछ सहा है।'' योग जब जिंदगी बन जाए तो उसकी प्रेरणा और नींव काफी मजबूत होगी।
योग में इतना रम जाने की प्रेरणा आपको कहां से मिली पूछने पर राफिया कहती हैं- ' इसमें मेरे पिता का काफी योगदान है। पापा ने हमेशा मेरा समर्थन किया है। उन्होंने जब स्कूल में दाखिला कराया था तो वहां सुशांत सर योग सिखाया करते थे, उनसे मुझे काफी प्रेरणा मिली।' राफिया ने योग में काफी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2004 में ऑल इंडिया ओलंपिक्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित योग स्टेट चैंपियनशिप जीता है। इतना ही नहीं, योग प्रभा का खिताब, अपराजिता सम्मान, जम्मू और कश्मीर में नेशनल पतंजलि योग प्रमोटर सम्मान और 52 से अधिक गोल्ड मैडल भी अपने नाम किए हैं। लेकिन अफसोस कि इतने सम्मान हासिल करने और योग जैसी सकारात्मकता फैलाने के बावजूद उन्हें बदले में नफरत मिली।
वर्ष 2015 में बाबा रामदेव के साथ योग मंच साझा करने के बाद राफिया को कई मुश्किलों का सिर्फ इसलिए सामना करना पड़ा क्योंकि वो मुस्लिम हैं। इस विषय में राफिया कहती हैं- 2015 में मेरे ऊपर हमले किए गए, फतवे की धमकी दी गई, मेरे लिए भद्दे शब्दों का इस्तेमाल किया गया, बम से उड़ाने की धमकी मिली और घर पर पत्थर चलाए गए, लेकिन इन चीजों से डरकर मैंने हार नहीं मानी। भारत में ऐसा पहली बार हुआ जब मैंने इतने बड़े हुसैनी मदरसा में योग करवाया।'
राफिया नाज अनाथ बच्चों को भी योग की शिक्षा दे रही हैं। वो हजार से भी ज्यादा बच्चों को फ्री में योग सिखाती हैं। 2017 में कट्टरपंथियों द्वारा हमला होने के बाद उस समय 20 वर्ष की राफिया ने ठान ली की वो जाति, धर्म और संप्रदाय को योग में रोड़ा नहीं बनने देंगी और यहां से उनके संस्थान 'योग बियॉन्ड रिलिजन' की शुरुआत हुई। राफिया का कहना है की उन्हें विश्वास है एक दिन इंसाफ होगा और करारा जवाब तब मिलेगा जब उनके बच्चे भी योग करेंगे।