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Hindi News ›   Lifestyle ›   Indian Air Force Day 2026: The Fascinating History Behind IAF’s Formation in 1932

भारतीय वायु सेना दिवस 2026: पहली उड़ान से तेजस तक, जानिए भारतीय वायु सेना का पूरा सफर

Fri, 02 Oct 2026 04:16 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Fri, 02 Oct 2026 04:16 PM IST
सार

Indian Air Force History in Hindi: भारतीय वायु सेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी। शुरुआती दौर में यह ब्रिटिश भारत में रॉयल एयर फोर्स की सहायक इकाई के तौर पर बनाई गई थी। 

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Indian Air Force Day 2026: The Fascinating History Behind IAF’s Formation in 1932
भारतीय वायु सेना दिवस 2026 - फोटो : AI

विस्तार

Indian Air Force Day 2026: आसमान में भारत की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली भारतीय वायु सेना का इतिहास करीब एक सदी पुराना है। हर साल 8 अक्टूबर को भारतीय वायु सेना दिवस मनाया जाता है। भारतीय वायु सेना का आधिकारिक गठन 8 अक्टूबर 1932 को ही हुआ था। उस समय इसे ब्रिटिश भारतीय शासन के दौरान रॉयल एयर फोर्स की एक सहायक इकाई के रूप में स्थापित किया गया था।

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गठन के कुछ महीनों बाद 1 अप्रैल 1933 को वायु सेना की पहली ऑपरेशनल फ्लाइट ने कराची के ड्रिग रोड से उड़ान भरी। इसमें छह RAF-प्रशिक्षित अधिकारी, 19 वायु सैनिक और चार वेस्टलैंड वापिटी IIA विमान शामिल थे। आगे चलकर यही शुरुआती ढांचा एक संगठित वायु शक्ति में विकसित हुआ। 
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द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय वायु सेना का विस्तार हुआ और 1945 में इसे रॉयल इंडियन एयरफोर्स का दर्जा मिला। स्वतंत्रता के बाद इसका पुनर्गठन हुआ और 1950 में भारत के गणराज्य बनने पर इस के नाम से ‘राॅयल’ हटा दिया गया। तब से यह भारतीय वायु सेना के नाम से जानी जाती है।

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आज IAF लड़ाकू विमानों के साथ परिवहन, हेलीकॉप्टर, मानवीय सहायता, आपदा राहत और आधुनिक तकनीकी क्षमताओं में भी भूमिका निभाती है।


भारतीय वायु सेना का गठन कैसे हुआ?

भारतीय वायु सेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी। शुरुआती दौर में यह ब्रिटिश भारत में रॉयल एयर फोर्स की सहायक इकाई के तौर पर बनाई गई थी। हालांकि आधिकारिक गठन 1932 में हुआ, लेकिन इस की पहली ऑपरेशनल फ्लाइट 1 अप्रैल 1933 को हुई।


पहली उड़ान के लिए छह RAF-प्रशिक्षित अधिकारियों और 19 वायु सैनिकों का दल था। चार वेस्टलैंड वापिटी IIA बाय प्लेन इसके शुरुआती विमानों में शामिल थे। इसी शुरुआती इकाई ने आगे चलकर No. 1 स्क्वाड्रन के विकास की नींव रखी। 


द्वितीय विश्व युद्ध में हुआ बड़ा विस्तार

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय वायु सेना की जिम्मेदारियां बढ़ीं और इस की ऑपरेशनल और ट्रेनिंग क्षमता में विस्तार हुआ। 1944 के अंत तक नौ स्क्वाड्रन सक्रिय थीं और अलग-अलग इकाइयों में हरिकेन तथा स्पिटफायर जैसे विमान शामिल थे। युद्ध के दौरान IAF के कर्मियों को विशिष्ट फ्लाइंग क्रॉस सहित कई सम्मान भी मिले। 

मार्च 1945 में भारतीय वायु सेना को ‘राॅयल’ उपसर्ग प्रदान किया गया और इसे रॉयल इंडियन एयरफोर्स कहा जाने लगा। 
 

आजादी के बाद बदली पहचान

15 अगस्त 1947 को भारत की आजादी के बाद वायु सेना के संगठन और संसाधनों का पुनर्गठन हुआ। विभाजन के दौरान कुछ इकाइयों और उपकरणों का बंटवारा भी हुआ। स्वतंत्र भारत की सुरक्षा जरूरतों के अनुसार IAF ने अपनी संरचना और आॅपरेशनल क्षमता को आगे बढ़ाया। 

इसके बाद 26 जनवरी 1950 को भारत गणराज्य बना और भारतीय वायु सेना के नाम से ‘राॅयल’ शब्द हटा दिया गया। इसी दौर में वायु सेना में नए लड़ाकू विमानों, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और ट्रेनिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को शामिल करने की प्रक्रिया तेज हुई।
 

भारतीय वायु सेना की प्रमुख उपलब्धियां

1. युद्ध और हवाई अभियानों में भूमिका

स्वतंत्रता के बाद भारतीय वायु सेना ने विभिन्न सैन्य अभियानों और युद्धों में भूमिका निभाई। सरकारी स्रोतों के अनुसार IAF ने देश द्वारा लड़े गए युद्धों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
 

2. 1960 के दशक में तेज आधुनिकीकरण

1950 और 1960 के दशक में IAF के बेड़े में कई नए एयरक्राफ्ट शामिल हुए। 1957 के बाद दसॉ मिस्टेयर IVA, हॉकर हंटर और इंग्लिश इलेक्ट्रिक कैनबरा जैसे विमान शामिल किए गए। 1962 में सोवियत संघ के साथ हुए समझौतों के बाद MiG-21 भी भारतीय वायु सेना के आधुनिकीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।

3. 1971 के दौर में महत्वपूर्ण भूमिका

1971 के युद्ध के दौरान भारतीय वायु सेना ने पूर्वी और पश्चिमी मोर्चों पर हवाई अभियानों में भाग लिया। इस दौर ने भारतीय वायु शक्ति के आपरेशनल अनुभव और क्षमताओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

4. कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सफेद सागर

1999 के कारगिल संघर्ष में IAF ने ऑपरेशन सफेद सागर के तहत ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में हवाई अभियानों को अंजाम दिया। इस दौरान मिग और मिराज विमानों तथा Mi-17 हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया गया। 

5. मानवीय सहायता और आपदा राहत

भारतीय वायु सेना की भूमिका केवल युद्ध तक सीमित नहीं है। सरकारी स्रोतों के अनुसार IAF ने विभिन्न मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियानों में भी योगदान दिया है। संघर्ष क्षेत्रों से लोगों को निकालने और आपदा प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने में भी इसकी भूमिका रही है।

6. स्वदेशी तकनीक की ओर बढ़ते कदम

आधुनिक दौर में भारतीय वायु सेना ने स्वदेशी रक्षा तकनीक और प्लेटफॉर्म को भी महत्व दिया है। तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म इस दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।



भारतीय वायु सेना का आधुनिक स्वरूप

आज IAF आधुनिक लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, सर्विलांस और अन्य तकनीकी प्रणालियों के साथ अपनी क्षमताओं को लगातार विकसित कर रही है। सरकारी जानकारी में राफेल और अपाचे जैसे प्लेटफॉर्म तथा तेजस और प्रचंड जैसे स्वदेशी कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों, तकनीकी सहयोग और मानवीय राहत अभियानों के जरिए भी IAF की भूमिका का विस्तार हुआ है। 

 

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