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Pet Care Tips: घर में है पालतु जानवर तो बारिश के मौसम में रखें उसका खास ध्यान, ये बातें आएंगी आपके काम
Sun, 10 Aug 2025 03:53 PM IST
श्रुति गौड़
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्रुति गौड़
Updated Sun, 10 Aug 2025 03:53 PM IST
सार
Pet Care Tips: क्या मानसून के इस सुहावने मौसम में आपका पेट शांत-शांत रहने लगा है और आप उसकी परेशानी की वजह नहीं समझ पा रही हैं? हो सकता है, उसे टिक्स इंफेक्शन हो।
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जानवरों की भाषा समझ सकेंगे इंसान
- फोटो : AI
विस्तार
अरे श्वेता, क्या हुआ? इतनी उदास क्यों हो?”
क्या बताऊं दीदी, मेरा जिप्सी (पैट) चार-पांच दिनों से बहुत उदास रहने लगा है।”
डॉक्टर को दिखा ले, कोई इंफेक्शन न हो।”
जांच के बाद श्वेता ने दीदी को फोन किया और बोली, “आपने सही कहा था दीदी, उसको इंफेक्शन ही हुआ है। डॉक्टर ने बताया कि पार्क में खेलने के दौरान जिप्सी को टिक्स इंफेक्शन हो गया है। तभी वह इतना परेशान है।”
क्या है टिक्स
मानसून का मौसम जहां हरियाली और ठंडक लेकर आता है, वहीं यह हमारे पालतू जानवरों के लिए कुछ अतिरिक्त समस्याएं भी लेकर आता है। इनमें सबसे प्रमुख और खतरनाक है- टिक्स का संक्रमण। असल में, टिक्स बहुत छोटे परजीवी होते हैं, जो मुख्य रूप से कुत्ते, बिल्लियों और अन्य जानवरों के बालों में पाए जाते हैं। ये घास, मिट्टी या झाड़ियों में छिपे रहते हैं और जैसे ही कोई जानवर उनके संपर्क में आता है, ये उसकी त्वचा में चिपक जाते हैं। एक बार चिपकने के बाद ये जानवर के शरीर से घंटों तक खून चूसते रहते हैं।
मानसून में अधिक खतरा
बारिश के कारण वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जो टिक्स के अंडों के फूटने और बढ़ने के लिए अनुकूल होती है। इस मौसम में घास भी जल्दी उगती है और गीली रहती है, जो टिक्स के छिपने के लिए अनुकूल होती है। वहीं बारिश के कारण धूप कम निकलती है, जिससे टिक्स मरते नहीं और लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं।
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लक्षणों की पहचान
टिक्स लगने पर जानवरों में कई स्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं, जो संक्रमण की ओर संकेत करते हैं। बार-बार खुद को खुजलाना, त्वचा पर लालिमा या सूजन, बाल झड़ना, बुखार, सुस्ती और भूख में कमी टिक्स होने के सबसे आम लक्षणों में से एक हैं।
अन्य गंभीर बीमारियां
टिक्स ही नहीं, इससे जुड़े कई रोग जानवरों के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। लाइम डिजीज एक बैक्टीरिया से फैलने वाली बीमारी है, जिसमें जानवर को बुखार, थकान और जोड़ों में दर्द होता है, तो बेबेसियोसिस रोग लाल रक्त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। वहीं अधिक मात्रा में टिक्स लगने से खून की कमी यानी एनीमिया हो सकता है, जिससे जानवर कमजोर हो जाता है। इसके अलावा टिक्स के काटने से त्वचा पर एलर्जी, घाव या संक्रमण भी हो सकता है।
बचाव के उपाय
टिक्स से बचाव के लिए आपको अपने पेट्स को सप्ताह में कम से कम दो बार एंटी-टिक शैंपू से नहलाना चाहिए। आप रोजाना कान, गर्दन, पैरों के बीच और पूंछ के आस-पास टिक की नियमित जांच करें। टिक रिपेलेंट स्प्रे, कॉलर या स्पॉट-ऑन दवाओं का उपयोग करें। उनके बिस्तर, चादरें और खेलने की जगह को साफ और सूखा रखें। यदि कोई लक्षण, जैसे कि खुजली, सुस्ती या बुखार दिखे तो तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लें, ताकि समय पर इलाज संभव हो सके।
सबसे जरूरी नियमित जांच
गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी, लुधियाना के असिस्टेंट प्रोफेसर, कॉलेज ऑफ एनिमल बायोटेक्नोलॉजी डॉ. रतन चौधरी का कहना है कि सबसे पहले अपने पेट को नियमित रूप से अच्छे एंटी-टिक शैंपू से नहलाएं। रोजाना ब्रश करें, ताकि उसकी त्वचा साफ रहे और कोई कीड़ा जल्दी नजर आ जाए। डॉक्टर से सलाह लेकर एंटी-टिक पाउडर, स्प्रे या स्पॉट-ऑन ट्रीटमेंट का इस्तेमाल करें। पेट के सोने की जगह और घर के कोनों को नियमित रूप से साफ करें और कीटाणुनाशक का छिड़काव करें। घास या बगीचे में खेलने के बाद पेट की पूरी बॉडी अच्छी तरह चेक करें। अगर टिक्स मिलें तो उन्हें सावधानी से हटाएं या तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। नियमित चेकअप और साफ-सफाई से टिक्स से बचाव किया जा सकता है।
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क्या बताऊं दीदी, मेरा जिप्सी (पैट) चार-पांच दिनों से बहुत उदास रहने लगा है।”
डॉक्टर को दिखा ले, कोई इंफेक्शन न हो।”
जांच के बाद श्वेता ने दीदी को फोन किया और बोली, “आपने सही कहा था दीदी, उसको इंफेक्शन ही हुआ है। डॉक्टर ने बताया कि पार्क में खेलने के दौरान जिप्सी को टिक्स इंफेक्शन हो गया है। तभी वह इतना परेशान है।”
क्या है टिक्स
मानसून का मौसम जहां हरियाली और ठंडक लेकर आता है, वहीं यह हमारे पालतू जानवरों के लिए कुछ अतिरिक्त समस्याएं भी लेकर आता है। इनमें सबसे प्रमुख और खतरनाक है- टिक्स का संक्रमण। असल में, टिक्स बहुत छोटे परजीवी होते हैं, जो मुख्य रूप से कुत्ते, बिल्लियों और अन्य जानवरों के बालों में पाए जाते हैं। ये घास, मिट्टी या झाड़ियों में छिपे रहते हैं और जैसे ही कोई जानवर उनके संपर्क में आता है, ये उसकी त्वचा में चिपक जाते हैं। एक बार चिपकने के बाद ये जानवर के शरीर से घंटों तक खून चूसते रहते हैं।
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मानसून में अधिक खतरा
बारिश के कारण वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जो टिक्स के अंडों के फूटने और बढ़ने के लिए अनुकूल होती है। इस मौसम में घास भी जल्दी उगती है और गीली रहती है, जो टिक्स के छिपने के लिए अनुकूल होती है। वहीं बारिश के कारण धूप कम निकलती है, जिससे टिक्स मरते नहीं और लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं।
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लक्षणों की पहचान
टिक्स लगने पर जानवरों में कई स्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं, जो संक्रमण की ओर संकेत करते हैं। बार-बार खुद को खुजलाना, त्वचा पर लालिमा या सूजन, बाल झड़ना, बुखार, सुस्ती और भूख में कमी टिक्स होने के सबसे आम लक्षणों में से एक हैं।
अन्य गंभीर बीमारियां
टिक्स ही नहीं, इससे जुड़े कई रोग जानवरों के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। लाइम डिजीज एक बैक्टीरिया से फैलने वाली बीमारी है, जिसमें जानवर को बुखार, थकान और जोड़ों में दर्द होता है, तो बेबेसियोसिस रोग लाल रक्त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। वहीं अधिक मात्रा में टिक्स लगने से खून की कमी यानी एनीमिया हो सकता है, जिससे जानवर कमजोर हो जाता है। इसके अलावा टिक्स के काटने से त्वचा पर एलर्जी, घाव या संक्रमण भी हो सकता है।
बचाव के उपाय
टिक्स से बचाव के लिए आपको अपने पेट्स को सप्ताह में कम से कम दो बार एंटी-टिक शैंपू से नहलाना चाहिए। आप रोजाना कान, गर्दन, पैरों के बीच और पूंछ के आस-पास टिक की नियमित जांच करें। टिक रिपेलेंट स्प्रे, कॉलर या स्पॉट-ऑन दवाओं का उपयोग करें। उनके बिस्तर, चादरें और खेलने की जगह को साफ और सूखा रखें। यदि कोई लक्षण, जैसे कि खुजली, सुस्ती या बुखार दिखे तो तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लें, ताकि समय पर इलाज संभव हो सके।
सबसे जरूरी नियमित जांच
गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी, लुधियाना के असिस्टेंट प्रोफेसर, कॉलेज ऑफ एनिमल बायोटेक्नोलॉजी डॉ. रतन चौधरी का कहना है कि सबसे पहले अपने पेट को नियमित रूप से अच्छे एंटी-टिक शैंपू से नहलाएं। रोजाना ब्रश करें, ताकि उसकी त्वचा साफ रहे और कोई कीड़ा जल्दी नजर आ जाए। डॉक्टर से सलाह लेकर एंटी-टिक पाउडर, स्प्रे या स्पॉट-ऑन ट्रीटमेंट का इस्तेमाल करें। पेट के सोने की जगह और घर के कोनों को नियमित रूप से साफ करें और कीटाणुनाशक का छिड़काव करें। घास या बगीचे में खेलने के बाद पेट की पूरी बॉडी अच्छी तरह चेक करें। अगर टिक्स मिलें तो उन्हें सावधानी से हटाएं या तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। नियमित चेकअप और साफ-सफाई से टिक्स से बचाव किया जा सकता है।