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नई जीवनशैली गला रहीं युवाओं की हड्डियां

Sun, 20 Oct 2013 06:38 PM IST
रवि बुले, मुंबई
रवि बुले, मुंबई Updated Sun, 20 Oct 2013 06:38 PM IST
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New lifestyle made life difficult

बढ़ती उम्र के साथ हड्डियां तो कमजोर होती ही हैं, लेकिन भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच पनपी नई जीवन शैली शरीर के लिए ज्यादा घातक साबित हो रही है।

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देश के युवाओं और रजोनिवृत्ति के पश्चात महिलाओं पर इसका सबसे बुरा असर सामने आ रहा है। एक अनुमान के मुताबिक करीब तीन करोड़ 60 लाख भारतीय आज हड्डियों को कमजोर कर देने वाली बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस के शिकार हैं।
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जबकि एक दशक पहले 2003 में यह आंकड़ा करीब ढाई करोड़ था। यानी एक दशक में ऑस्टियोपोरोसिस  के शिकार लोगों की संख्या एक करोड़ से भी ज्यादा बढ़ी है।

ऑस्टियोपोरोसिस के कारण हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और फ्रेक्चर की आशंका बढ़ जाती है। सच्चाई है कि पश्चिमी देशों के मुकाबले भारत में आज ऑस्टियोप्रोटिक फ्रेक्चर के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं।
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डॉक्टरों के मुताबिक युवाओं में बढ़ती धूम्रपान और शराब की लत इस बीमारी के पैर पसारने की बड़ी वजह हैं। इसके अलावा फास्ट फूड का बढ़ता चलन, भोजन में पोषक तत्वों की कमी, शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की न्यूनता भी हड्डियों को कमजोर बनाती है।

मेडिकल जगत के अध्ययनों के मुताबिक पूरे भारत में युवाओं और महिलाओं में विटामिन डी की कमी की समस्या है। काम के घंटों में देर तक एक ही जगह पर बैठे रहना भी हड्डियों की मजबूती के लिए घातक है।

नई दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के ऑर्थोपेडिक विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. राजीव के शर्मा के अनुसार बुरी खबर यह है कि ऑस्टियोपोरोसिस शरीर में बिना कोई संकेत दिए वर्षों तक मौजूद रह सकता है और अचानक कभी फ्रेक्चर होने पर सामने आता है।

इसके बाद हड्डियों का जुड़ना कठिन हो जाता है। वे कमजोर होती चली जाती हैं। यही नहीं ऑस्टियोपोरोसिस के कारण होने वाले फ्रेक्चरों का कई बार वर्षों तक पता ही नहीं चलता।

ऐसे में रोगी को मालूम ही नहीं होता कि वह बीमारी का शिकार है। इस बीमारी का जोखिम पुरुषों और महिलाओं में समान रूप से है, लेकिन महिलाओं में विशेष तौर पर रजोनिवृत्ति के पश्चात खतरा बढ़ जाता है।


इंटरनेशन ओस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन इस वर्ष रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में हड्डियों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का अभियान चला रहा है।

रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है और इससे हड्डियों की सघनता में तेजी से गिरावट होती है। ऐसे में शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी मुश्किलें बढ़ा देती है।

डॉक्टरों के अनुसार रजोनिवृत्ति के पहले पांच से दस वर्ष में महिलाओं की हड्डियों का घनत्व प्रति वर्ष दो से चार प्रतिशत तक कम होता जाता है। ऐसे में इन वर्षों उनकी हड्डियां 25 से 30 फीसदी तक कमजोर हो जाती हैं।

कैसे करें बचाव

-कैश्लियम से भरपूर डायट लें
-विटामिन डी के लिए धूप में पर्याप्त समय गुजारें
-35 वर्ष की आयु के बाद हड्डियों की समय समय पर जांच कराएं
-नियम रूप से कसरत करें
-धूम्रपान और शराब का सेवन न करें

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