{"_id":"5b51653d4f1c1b4a748b5f30","slug":"know-is-milk-vegetarian-or-not","type":"story","status":"publish","title_hn":"व्रत में पीते हैं दूध तो जान लें ये भी है मांस खाने जैसा, शोध का दावा ","category":{"title":"Healthy Food ","title_hn":"हेल्दी फूड","slug":"healthy-food"}}
व्रत में पीते हैं दूध तो जान लें ये भी है मांस खाने जैसा, शोध का दावा
कल्पवृक्ष, अमर उजाला
Updated Fri, 20 Jul 2018 10:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यह गलत साबित हो रहा है कि आहार में दूध शामिल करनेे वाले लोग सात्विक भोजन करते हैं। प्रोटेस्टेंट ईसाइयों की एक छोटी सी शाखा क्वेकर संप्रदाय के अनुयायियों ने तो सत्रहवीं शताब्दी से ही दूध और उससे बने आहार का निषेध शुरू कर दिया था।
उनका कहना था कि दूध पशुओं से प्राप्त होने वाले मांस की तरह है। बच्चा जब तक अपनी मां का दूध पीता है तभी तक ठीक है। उसके दो तीन साल का होने के बाद मां जब स्तनपान नहीं करा पाती, तो समझ लेना चाहिए कि दूध की जरूरत खत्म हो गई।
मुंबई स्थित हैफकिन रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधार्थी डॉ. एस. बुद्धिराजा के मुताबिक, किसी भी पशु का शिशु जन्म के कुछ समय बाद ही दूध पीना छोड़ देता है। सभी पशु अपनी मां का दूध पीते है। एक आदमी ही है, जो दूसरों की माताओं का, यहां तक जानवरों की माताओं का भी दूध पीता है। दूध से जो भी पदार्थ बनते हैं, वे वासना और हिंसा बढ़ाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
उनका कहना था कि दूध पशुओं से प्राप्त होने वाले मांस की तरह है। बच्चा जब तक अपनी मां का दूध पीता है तभी तक ठीक है। उसके दो तीन साल का होने के बाद मां जब स्तनपान नहीं करा पाती, तो समझ लेना चाहिए कि दूध की जरूरत खत्म हो गई।
विज्ञापन
मुंबई स्थित हैफकिन रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधार्थी डॉ. एस. बुद्धिराजा के मुताबिक, किसी भी पशु का शिशु जन्म के कुछ समय बाद ही दूध पीना छोड़ देता है। सभी पशु अपनी मां का दूध पीते है। एक आदमी ही है, जो दूसरों की माताओं का, यहां तक जानवरों की माताओं का भी दूध पीता है। दूध से जो भी पदार्थ बनते हैं, वे वासना और हिंसा बढ़ाते हैं।
विज्ञापन