जानिए क्यों होती है बार-बार रटने वालों की याद्दाश्त तेज?
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हैरानी की बात यह है कि हम इस बारे में बहुत कम सोचते हैं। शोधकर्ता जेफ्री कार्पिक और हेनरी रॉडिगर बताते हैं कि खुद को बार-बार टेस्ट करना, तथ्यों को याद रखने के साथ हमारी स्मरण शक्ति को मजबूत कर सकता है।
उन्होंने अपने प्रयोग में कॉलेज के छात्रों से स्वाहिली भाषा और उसके अंग्रेजी के मतलब को सीखने को कहा। स्वाहिली का शब्द देने का मतलब ये था कि इसे सीखने वाले अपनी पुरानी जानकारी से मदद न ले पाएँ।
याद करने के दो अलग तरीके
सभी शब्दों को सीखने के एक हफ्ते बाद परीक्षा ली गई। आम तौर पर आप और हम क्या करते? पहले शब्दों की सूची बनाते, फिर उन्हें दोहराते और जो शब्द याद न होते उन्हें फिर दोहराते।
इससे होता यह है कि हमें जो शब्द याद हो जाते हैं उन्हें हम सूची से बाहर निकाल देते हैं और अपना ध्यान उन्हीं शब्दों पर केंद्रित करते हैं जो अभी तक सीखे नहीं जा सके हैं। यह तरीका याद करने के लिए सबसे अच्छा लगता है, और यही सही तरीका माना जाता रहा है।
लेकिन अगर चीजों को सही तरीके से याद रखना है तो यह बेहद गलत तरीका है। कार्पिक और रॉडिगर ने छात्रों से परीक्षा की तैयारी अलग-अलग तरीके से करने को कहा। उदाहरण के लिए, छात्रों का एक ग्रुप सभी शब्दों को लगातार दोहराता और जांचता रहा, जबकि दूसरा ग्रुप सही शब्दों को छोड़, बाकी शब्दों पर ध्यान केंद्रित करता रहा।
चौंकाने वाले नतीजे
इन ग्रुपों की अंतिम परीक्षा के परिणाम चौंकाने वाले थे। परीक्षण के दौरान जो लोग सिर्फ छूटे हुए या याद न रहे वाले शब्द याद कर रहे थे, उन्हें सिर्फ 35 प्रतिशत शब्द याद थे। जबकि पूरी सूची के शब्दों को बार-बार दोहरा कर याद करने वाले लोगों को 80 प्रतिशत तक शब्द याद थे।
इससे साफ है कि सीखने का सबसे अच्छा तरीका सभी तथ्यों को बार-बार याद करना या दोहराना है। ज्यादातर स्टडी गाइड में बताया जाता है कि उन तथ्यों को दोहराने से बचना चाहिए जो आपके स्मरण में हैं। यह सलाह एकदम गलत है। आपको अंतिम परीक्षा के समय तक यदि तथ्यों को याद रखना है तो आपको सभी सीखे तथ्यों को दोहराते रहना चाहिए।