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क्या आप भी अपने स्टेटस को लेकर रहते हैं चिंतित तो ये खबर जरूर पढ़ें!

Wed, 13 May 2015 03:52 PM IST
Updated Wed, 13 May 2015 03:52 PM IST
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Don't worry about what others think of you

बड़ी गाड़ी और बड़े घर की बजाय जिंदगी में सबसे बड़ी चाहत होती है कि लोग आपका सम्मान करें। किसी ने कुछ कह दिया और बात दिल को लग गई, क्योंकि मामला इज्जत का होता है। आखिर ऐसा क्या है कि इज्जत सभी को प्यारी होती है?

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अपशब्द बर्दाश्त नहीं होते, किसी के आगे झुकना अच्छा नहीं लगता और कुछ मांगने में शर्म आती है, क्योंकि ज्यादातर लोगों को लगता है कि ऐसा करने से उनकी इज्जत घट जाएगी।
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इज्जत की रोटी, मेहनत की कमाई और सिर उठाकर जीना हर इंसान की चाहत होती है। कभी आपने सोचा है कि चाहे कोई भी संस्कृति हो, कोई भी देश हो या फिर किसी भी उम्र अथवा किसी भी जाति के लोग हों, उन्हें इज्जत इतनी प्यारी क्यों होती है?
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क्या कहती है ‌रिसर्च

Don't worry about what others think of you

अब एक ताजा अध्ययन में यह बात साबित हो गई है हेल्दी और खुशमिजाज जिंदगी के लिए पद, प्रतिष्ठा और बेहतर सोशल स्टेटस काफी अहम होता है। 70 वर्षों की रिसर्च के बाद शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि जेंडर और संस्कृतियां भले ही अलग हों, लेकिन हर इंसान की चाहत होती है कि लोग उसकी अहमियत को समझें।

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं की टीम के अनुसार सोसायटी में ऊंचा दर्जा हमारे आत्मविश्वास और एनर्जी लेवल को बढ़ा देता है और हम लंबी जिंदगी जीते हैं। जबकि ऐसा न होने पर कई तरह की मानसिक और शारीरिक बीमारियां हमें घेर लेती हैं।

स्टेटस कम हो तो क्या होगा?

Don't worry about what others think of you

अपनी कम्युनिटी, पीयर ग्रुप या फिर ऑफिस में सहकर्मियों से अगर किसी मायने में आप अपना स्टेटस नीचा महसूस करते हैं, तो यह खतरे की घंटी है। ऐसे हालात तनाव, चिड़चिड़ेपन और हृदय संबंधी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। यही नहीं, सोशल स्टेटस आपके व्यवहार को भी निर्धारित करने और लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करता है।

जर्नल साइक्लॉजिकल बुलेटिन में प्रकाशित रिपोर्ट में प्रोफेसर कैमरन एंडरसन ने बताया है कि जब दूसरे लोग आपको महत्व नहीं देते, तो भावनाएं आहत होती हैं। कई बार सामने वाले के पद और पावर को देखकर लोग न चाहते हुए भी उसकी तारीफ करते हैं।

इसी को ध्यान में रखकर शोधकर्ताओं ने स्टेटस को भी परिभाषित किया है, ताकि पैसे और पावर के कारण मिलने वाली तारीफ को सामान्य तौर अर्जित प्रतिष्ठा से अलग करके देखा जा सके। एंडरसन के मुताबिक ′किसी को शायद इस बात की इतनी परवाह नहीं होगी कि उसके पास बड़ा घर, बड़ा पद, बड़ी गाड़ी और पैसा नहीं है, लेकिन ऊंचे दर्जे का सोशल स्टेटस की चाहत सभी की होती है।′

उनके मुताबिक दूसरे लोग महत्व न दें, तो हीन भावना का शिकार होने में देर नहीं लगती। एंडरसन के मुताबिक सोशल स्टेटस की चाहत से ही इंसान की आक्रामकता, हिंसा, उदारता और परोपकार जैसे गुण भी निर्धारित होते हैं। इस तथ्य को जितना अधिक हम समझ पाते हैं, सही फैसले लेने में उतनी ही आसानी होती है।

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