नजरअंदाज न करें गले का दर्द, हो सकता है यह खतरा
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गले में खराश या दर्द को इस मौसम में हम ठंड का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह दर्द केवल मौसमी न होकर किसी बड़ी बीमारी के लक्ष्ाण्ा भी हो सकते हैं। इस मौसम में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं।
बैक्टीरियल इन्फेक्शन के असर से खिच-खिच, खराश, आवाज का बैठना, खाना निगलने में परेशानी आदि समस्या होती है। गले के दर्द का एक कारण टॉन्सिल का बढ़ना भी होता है।
गले के नीचे झिल्लीयुक्त ऊत्तक होते हैं, जिन्हें टॉन्सिल कहते हैं। इन्फेक्शन के कारण टॉन्सिल बढ़ जाते हैं और दर्द होता है। इसका कारण दांतों की नियमित सफाई न करना, भोजन में पोषक तत्वों की कमी, गंदगी आदि होते हैं।
इन्फेक्शन से गले के अंदर दाने उभर आते हैं या घाव भी बन जाते हैं। अगर दवा से आराम नहीं मिल रहा है, दर्द लंबे समय तक बना हुआ है और घाव भी है, तो यह गले के कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।
इसे नजरअंदाज बिल्कुल न करें। तुंरत चिकित्सक से सम्पर्क करें। गले के दर्द का एक प्रमुख कारण गले के भीतर की हड्डी का बढ़ना भी होता है। हड्डी बढ़ने से गले की नसों पर दबाव पड़ता है और दर्द होता है।
गंभीर रोगों का है इशारा
टीबी की बीमारी, रीढ़ की हड्डी में इन्फेक्शन भी गले में दर्द पैदा कर सकता है। गले और पीठ के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों में खिंचाव और सर्वाइकल वर्टिब्रा से निकलने वाली तंत्रिकाओं में ऐंठन की वजह से भी दर्द बनता है।
गले का कान और नाक से सीखा संबंध होता है। इसलिए कान, नाक और मुंह की कोई भी बीमारी गले का कष्ट बन जाती है। समस्या होने पर डॉक्टर के निर्देशानुसार पूरा इलाज कराएं, न कि खुद ही डॉक्टर बनें।
इस मौसम में परेशानी से बचने के लिए ठंड से बचाव जरूरी है। दूषित खानपान से दूर रहें। गर्म पानी से गरारे करें। नियमित जांच कराते रहें।