फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Lifestyle ›   Healthy Food ›   antibiotic resistance by eating chicken_pp

चिकन खाते हैं तो जान लें इससे जुड़ा नया खतरा

Thu, 31 Jul 2014 11:21 AM IST
Updated Thu, 31 Jul 2014 11:21 AM IST
विज्ञापन
antibiotic resistance by eating chicken_pp

चिकन खाने का आपका शौक बीमारियों से लड़ने की आपकी क्षमता को मार रहा है। इतना ही नहीं, यह एंटीबायोटिक दवाओं का असर भी कम कर रहा है।

विज्ञापन


मुर्गीपालन (पॉल्ट्री) उद्योग में एंटीबायोटिक दवाओं का व्यापक तौर पर होने वाला इस्तेमाल इसकी वजह है।

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने दिल्ली-एनसीआर में किए गए अपने सर्वे में चिकन में बड़ी मात्रा में एटीबायोटिक तत्व पाए हैं।

साथ ही पढ़ें, चिकन सही से नहीं धोते तो सेहत को हो सकता है ऐसा नुकसान

क्या है नुकसान

antibiotic resistance by eating chicken_pp

सीएसई की रिपोर्ट में कहा गया है कि चिकन के जरिए आम लोगों के शरीर में एंटीबायोटिक्स पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि बहुत से भारतीयों में एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम होता जा रहा है।

बुधवार को इंडिया हैबीटेट सेंटर में सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने यह रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट बताती है कि शोध में शामिल चिकन के 40 फीसदी नमूनों में एंटीबायोटिक के अंश मौजूद थे। इनमें पांच ऐसे हैं, जिनका बीमारियों के दौरान दवाओं के रूप में इस्तेमाल होता है।

चिकन खाने वालों के शरीर में ये एंटीबायोटिक लगातार पहुंचते हैं, इसके चलते रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया इन एंटीबायोटिक से लड़ने की क्षमता विकसित कर लेते हैं, फिर उन पर दवा का असर ही नहीं होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

शाकाहार‌ियों के ल‌िए भी है र‌िस्क

antibiotic resistance by eating chicken_pp

सीएसई के उप-महानिदेशक चंद्रभूषण की मानें तो एंटीबायोटिक प्रूफ बैक्टीरिया वातावरण के जरिए शाकाहारी इंसानों तक भी पहुंच रहे हैं।

इतना ही नहीं, बूचड़खाने, होटल जैसी जगहों पर इस तरह के चिकन के सीधे संपर्क में आने से भी लोगों के प्रभावित होने की आशंका है।

नारायण के मुताबिक, चिकन का वजन बढ़ाने के लिए दिल्ली-एनसीआर में धड़ल्ले से एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल हो रहा है। पॉल्ट्री फार्म के नजदीक एंटीबायोटिक किलो के भाव में बिकता है। इस पर रोक लगाने के लिए सरकार ने अभी तक कोई दिशा-निर्देश भी तैयार नहीं किया है। रिपोर्ट बेशक दिल्ली-एनसीआर के लिए है, लेकिन पूरे देश में हालात कुछ ऐसे ही हैं।

सीएसई ने चिकन के 70 नमूनों पर शोध किया। इसमें से 36 नमूने दिल्ली, 12 नोएडा, 8 गुड़गांव और सात-सात फरीदाबाद-गाजियाबाद के थे।

पढ़ें, इस जानकारी के बाद दूध पीने से पहले सौ बार सोचेंगे आप

विज्ञापन

पांच एंटीबायोटिक मिले

antibiotic resistance by eating chicken_pp

सीएसई की कोशिश ऑक्सीटेट्रा- साइक्लिन, क्लोरटेट्रा-साइक्लिन, डॉक्सी-साइक्लिन, एनफ्लोक्सासिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन और नियोमाइसिन की मौजूदगी जानने की थी।

इनमें से नियोमाइसिन को छोड़कर बाकी पांचों एंटीबायोटिक की 40 फीसदी नमूनों में मौजूदगी मिली। इसकी मात्रा एक किलो पर 3.37 से लेकर 131.75 माइक्रोग्राम तक थी। इनमें से 22.9 फीसदी नमूनों में न्यूनतम एक एंटीबायोटिक मिला। जबकि 17.1 फीसदी नमूनों में एक से अधिक एंटीबायोटिक थे।

पढ़ें - दवाओं का असर हो रहा है कम, जानें क्या है वजह

बचाव के ल‌िए सिफारिश

antibiotic resistance by eating chicken_pp

- इंसान को दिए जाने वाले गंभीर एंटीबायोटिक पॉल्ट्री उद्योग के लिए प्रतिबंधित हों।
- चिकन का वजन बढ़ाने के लिए एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर लगे कड़ी पाबंदी
-बिना लाइसेंस व बिना लेबल वाले एंटीबायोटिक्स की बिक्री रुके।
-बेहतर फार्म प्रबंधन पर जोर, सरकार विकल्पों को दे बढ़ावा।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed