चिकन खाते हैं तो जान लें इससे जुड़ा नया खतरा
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चिकन खाने का आपका शौक बीमारियों से लड़ने की आपकी क्षमता को मार रहा है। इतना ही नहीं, यह एंटीबायोटिक दवाओं का असर भी कम कर रहा है।
मुर्गीपालन (पॉल्ट्री) उद्योग में एंटीबायोटिक दवाओं का व्यापक तौर पर होने वाला इस्तेमाल इसकी वजह है।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने दिल्ली-एनसीआर में किए गए अपने सर्वे में चिकन में बड़ी मात्रा में एटीबायोटिक तत्व पाए हैं।
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क्या है नुकसान
सीएसई की रिपोर्ट में कहा गया है कि चिकन के जरिए आम लोगों के शरीर में एंटीबायोटिक्स पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि बहुत से भारतीयों में एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम होता जा रहा है।
बुधवार को इंडिया हैबीटेट सेंटर में सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने यह रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट बताती है कि शोध में शामिल चिकन के 40 फीसदी नमूनों में एंटीबायोटिक के अंश मौजूद थे। इनमें पांच ऐसे हैं, जिनका बीमारियों के दौरान दवाओं के रूप में इस्तेमाल होता है।
चिकन खाने वालों के शरीर में ये एंटीबायोटिक लगातार पहुंचते हैं, इसके चलते रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया इन एंटीबायोटिक से लड़ने की क्षमता विकसित कर लेते हैं, फिर उन पर दवा का असर ही नहीं होता है।
शाकाहारियों के लिए भी है रिस्क
सीएसई के उप-महानिदेशक चंद्रभूषण की मानें तो एंटीबायोटिक प्रूफ बैक्टीरिया वातावरण के जरिए शाकाहारी इंसानों तक भी पहुंच रहे हैं।
इतना ही नहीं, बूचड़खाने, होटल जैसी जगहों पर इस तरह के चिकन के सीधे संपर्क में आने से भी लोगों के प्रभावित होने की आशंका है।
नारायण के मुताबिक, चिकन का वजन बढ़ाने के लिए दिल्ली-एनसीआर में धड़ल्ले से एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल हो रहा है। पॉल्ट्री फार्म के नजदीक एंटीबायोटिक किलो के भाव में बिकता है। इस पर रोक लगाने के लिए सरकार ने अभी तक कोई दिशा-निर्देश भी तैयार नहीं किया है। रिपोर्ट बेशक दिल्ली-एनसीआर के लिए है, लेकिन पूरे देश में हालात कुछ ऐसे ही हैं।
सीएसई ने चिकन के 70 नमूनों पर शोध किया। इसमें से 36 नमूने दिल्ली, 12 नोएडा, 8 गुड़गांव और सात-सात फरीदाबाद-गाजियाबाद के थे।
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पांच एंटीबायोटिक मिले
सीएसई की कोशिश ऑक्सीटेट्रा- साइक्लिन, क्लोरटेट्रा-साइक्लिन, डॉक्सी-साइक्लिन, एनफ्लोक्सासिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन और नियोमाइसिन की मौजूदगी जानने की थी।
इनमें से नियोमाइसिन को छोड़कर बाकी पांचों एंटीबायोटिक की 40 फीसदी नमूनों में मौजूदगी मिली। इसकी मात्रा एक किलो पर 3.37 से लेकर 131.75 माइक्रोग्राम तक थी। इनमें से 22.9 फीसदी नमूनों में न्यूनतम एक एंटीबायोटिक मिला। जबकि 17.1 फीसदी नमूनों में एक से अधिक एंटीबायोटिक थे।
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बचाव के लिए सिफारिश
- इंसान को दिए जाने वाले गंभीर एंटीबायोटिक पॉल्ट्री उद्योग के लिए प्रतिबंधित हों।
- चिकन का वजन बढ़ाने के लिए एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर लगे कड़ी पाबंदी
-बिना लाइसेंस व बिना लेबल वाले एंटीबायोटिक्स की बिक्री रुके।
-बेहतर फार्म प्रबंधन पर जोर, सरकार विकल्पों को दे बढ़ावा।