Heart Health: हृदय को स्वस्थ और फिट रखने के लिए जरूरी है कि कम उम्र से ही आहार और दिनचर्या में सुधार करना जरूरी है। जिस तरह से ये बीमारी कम उम्र के लोगों को भी अपना शिकार बनाती जा रही है, इसने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
World Heart Day 2025: हार्ट रेट बढ़ना या कम होना दोनों खतरनाक, घर बैठे ऐसे चेक करें हार्ट रेट
- अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की रिपोर्ट कहती है, सभी लोगों को निरंतर अपने ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और हृदय की गति यानी हार्ट रेट पर ध्यान देते रहना चाहिए।
- लगातार असामान्य हार्ट रेट, हार्ट अटैक-स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों का खतरा बढ़ा सकता है। अच्छी बात यह है कि आप इसे घर पर ही आसानी से चेक कर सकते हैं।
हार्ट रेट होता क्या है?
हार्ट रेट का मतलब है कि आपका दिल एक मिनट में कितनी बार धड़कता है। दिल का काम है पूरे शरीर में खून पहुंचाना है ताकि ऑक्सीजन और पोषण हर अंग तक जा सके। अगर हार्ट रेट सही सीमा में है तो यह संकेत है कि आपका दिल और ब्लड सर्कुलेशन सामान्य रूप से काम कर रहा है। लेकिन जब यह बहुत ज्यादा या बहुत कम हो जाता है तो शरीर पर कई तरह का असर दिखने लगता है।
शोध बताते हैं कि लगातार असामान्य हार्ट रेट हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए इसकी निगरानी करना बहुत जरूरी है। अच्छी बात यह है कि आप इसे घर पर ही आसानी से चेक कर सकते हैं।
घर पर हार्ट रेट कैसे चेक करें?
कुछ बातों का ध्यान रखकर आप हार्ट रेट आसानी से चेक कर सकते हैं। हार्ट रेट मापने के लिए सबसे आसान तरीका है पल्स चेक करना।
- अपनी तर्जनी और बीच की उंगली को कलाई या गले के पास श्वास नली पर रखें और हल्का दबाव डालें जिससे धड़कन महसूस हो सके। इसके बाद स्टॉपवॉच या मोबाइल के टाइमर से 60 सेकेंड तक गिनें। जितनी बार धड़कन महसूस हुई वही आपका हार्ट रेट है। अगर आप जल्दी जानना चाहते हैं तो 30 सेकंड तक गिनकर उसे 2 से गुणा कर लें।
आजकल स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड और डिजिटल पल्स ऑक्सीमीटर भी हार्ट रेट मापने में मदद करते हैं। हालांकि डॉक्टरों का मानना है कि उंगलियों से गिनी गई धड़कनें सबसे सटीक रहती हैं।
सामान्य हार्ट रेट कितना होना चाहिए?
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, एक स्वस्थ वयस्क का रेस्टिंग हार्ट रेट (आराम की स्थिति में) 60 से 100 बीट प्रति मिनट के बीच होना चाहिए। 60-80 को आदर्श माना जाता है। वहीं खिलाड़ियों या योग-व्यायाम करने वालों में यह 50 तक भी हो सकता है।
हार्ट रेट कम या ज्यादा होना
जब हार्ट रेट लगातार ज्यादा रहता है तो दिल को जरूरत से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसके कारण दिल की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है और ऑक्सीजन सप्लाई गड़बड़ा जाती है। हार्ट रेट ज्यादा होने टैकीकार्डिया कहा जाता है। इसके कारण आपको चक्कर आने, सांस फूलने, बेचैनी, सीने में दर्द, और बेहोशी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। जिन लोगों का रेस्टिंग हार्ट रेट 100 BPM से ऊपर होता है, उनमें हार्ट डिजीज से मौत का खतरा दोगुना तक बढ़ जाता है।
इसी तरह से हार्ट रेट कम होना भी ठीक नहीं है। लो हार्ट रेट का मतलब है शरीर और दिमाग तक ऑक्सीजन कम पहुंच रही है। इसके कारण थकान, कमजोरी, सिर घूमने और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं होती हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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