हंटिंगटन डिजीज: गुस्सा, फिजूलखर्ची और गेमिंग की लत, 36 वर्षीय पिता के इन बदलावों के पीछे छिपी थी गंभीर बीमारी
36 वर्षीय डेमियन लुजान में अचानक फिजूलखर्ची, गेमिंग की लत, गुस्सा, हाथ में कंपकंपी और चलने में परेशानी जैसे बदलाव दिखने लगे। हंटिंगटन की तीन निगेटिव जांचों के बाद उन्हें दुर्लभ एचडीएल2 बीमारी का पता चला। यह बीमारी व्यवहार, सोचने की शक्ति और शरीर की गतिविधियों को प्रभावित करती है और आनुवंशिक रूप से बच्चों तक पहुंच सकती है।
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मस्तिष्क से संबंधित समस्याएं वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए बड़ा बोझ बनती जा रही हैं। ब्रेन चूंकि हमारे पूरे शरीर का मास्टरमाइंट कहा जाता है, हमें क्या करना है, कैसे करना है, कब हाथ की गतिविधियां जरूरी हैं और कब किसी स्थान से तुंरत हट जाना चाहिए, ये सारे कमांड ब्रेन से ही आते हैं। ऐसे में सोचिए अगर मस्तिष्क में ही कोई समस्या आ जाए तो पूरे शरीर पर इसका किस तरह से असर हो सकता है?
जब भी बात ब्रेन या मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की आती है, तो सबसे पहले इसके लक्षणों में व्यक्तित्व में बदलाव देखने को मिलता है। संकेतों की जितनी जल्दी पहचान हो जाए, बीमारी का पता लगाना और इसे ठीक करना उतना आसान हो जाता है।
कई बार अगर व्यक्ति अचानक से कुछ ऐसा करने लगे जो वो पहले बिल्कुल पसंद नहीं करता था या फिर उन कामों से भागने लगे जो उसे पहले बहुत पसंद थीं, इस तरह के लक्षण भी इशारा करते हैं कि ब्रेन में सबकुछ ठीक नहीं है। 36 साल के डेमियन लुजान की कहानी भी ऐसी ही है।
सोचिए, घर का वह इंसान जिसे लोग बहुत कंजूस मानते हों, पैसों के मामले में हमेशा बेहद सावधान रहता हो, अचानक एक दिन अपने लिए हजारों रुपये के कपड़े खरीदने लगे। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने लगे और परिवार को उसके व्यवहार से डर लगने लगे, तो ये स्थिति कितनी अजीब होगी?
पहले जान लीजिए पूरी मामला
एक स्थानीय मीडिया में छपी रिपोर्ट के अनुसार ये मामला कैलिफोर्निया का है, जहां डेमियन लुजान के परिवार ने कभी सोचा भी नहीं था कि उनके व्यवहार में बदलाव के पीछे ऐसी बीमारी छिपी हो सकती है, जिसे मेडिकल साइंस में काफी दुर्लभ माना जाता था।
- कंजूस माने जाने वाले डेमियन को मोबाइल गेम ‘कैंडी क्रश’ का ऐसा जुनून सवार हो गया था कि एक महीने में उन्होंने गेम पर ही 1,000 डॉलर यानी करीब 84 हजार रुपये से ज्यादा खर्च कर दिए।
- 2024 में जब वह अपने बच्चों के लिए सर्दियों के कपड़े खरीदने निकले और अचानक अपने लिए करीब 900 डॉलर यानी लगभग 75 हजार रुपये के कपड़े खरीद डाले।
- अचानक ये सब बदलाव देखकर उनकी पत्नी योलांडा को कुछ अजीब सा लगा। डेमियन का ऐसा व्यवहार उनके स्वभाव से बिल्कुल अलग था।
डेमियन को अब गुस्सा भी ज्यादा आने लगा था, इसके अलावा अक्सर चिड़चिड़ापन और आक्रमक व्यवहार ने परिवार की चिंता बढ़ा दी। फिर कुछ ऐसे संकेत सामने आए, जिन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल था। उनके हाथ में हल्की कंपकंपी शुरू हुई और चलते समय दायां पैर घिसटने लगा। यहीं से परिवार को लगा कि समस्या सिर्फ मानसिक तनाव या व्यक्तित्व में बदलाव तक की नहीं हो सकती।
डॉक्टर के पास पहुंचने और कई जांच के बाद जो सच सामने आया, उसने परिवार को अंदर तक हिला दिया। डेमियन में बेहद दुर्लभ बीमारी हंटिंगटन डिजीज-लाइक 2 यानी एचडीएल-2 का निदान किया गया।
हंटिंगटन रोग क्या है?
हंटिंगटन जैसी बीमारियां सिर्फ शरीर की गतिविधियों को ही प्रभावित नहीं करतीं। दिमाग के सोचने, फैसला लेने, चीजों को याद रखने और भावनाओं को नियंत्रित करने वाले हिस्से भी प्रभावित हो सकते हैं। कई बार रोगी को के चलने में परेशानी शुरू होने के साथ उसका स्वभाव भी बदलने लगता है।
- बीमारी के कारण व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है, बिना सोचे-समझे फैसले लेने लग सकता है या ऐसा कुछ करने लगता है, जो पहले उसके लिए बिल्कुल असामान्य थीं।
- फिलहाल इसका कोई स्थायी इलाज या ऐसी दवा नहीं है जो बीमारी को पूरी तरह खत्म कर सके। लक्षण आमतौर पर समय के साथ बढ़ते जाते हैं।
हंटिंगटन बीमारी एक खराब जीन के कारण होती है, जो माता-पिता से बच्चे में जा जाता है। अगर किसी व्यक्ति के माता या पिता में यह प्रभावित जीन मौजूद है, तो उसके बच्चे में इसका खतरा 50% तक हो सकता है।
मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक हंटिंगटन रोग अनुमानित रूप से हर एक लाख लोगों में से लगभग 4-5 को हो सकता है, दुनियाभर में लगभग 1.35 लाख लोग इससे प्रभावित हैं। पिछले कुछ दशकों में इस बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ी है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी एक बड़ी वजह बेहतर जेनेटिक टेस्टिंग और अब समय रहते बीमारी की पहचान होना हो सकता है।
दिमाग की क्षमता होने लगती है कम
एचडीएल-2 भी हंटिंगटन का एक प्रकार है, पर इसके मामले बेहद दुर्लभ है। इसके लक्षण इतने ज्यादा हंटिंगटन बीमारी जैसे होते हैं।सिर्फ लक्षणों के आधार पर डॉक्टर दोनों में अंतर आसानी से नहीं कर सकते। हालांकि दोनों बीमारियों के पीछे अलग-अलग आनुवंशिक बदलाव या जीन में अलग तरह की गड़बड़ी होती है। एचडीएल-2 अब तक मुख्य रूप से अफ्रीकी लोगों में देखी जाती रही है।
- मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि हंटिंगटन डिजीज या एचडीएल-2 का असर दिमाग के फ्रंटल हिस्सों पर भी पड़ सकता है।
- दिमाग का यह हिस्सा सही फैसला लेने, खुद पर नियंत्रण रखने, व्यवहार को नियंत्रित करने और यह तय करने में मदद करता है कि किसी स्थिति में कैसे प्रतिक्रिया देनी है?
- इसीलिए बीमारी बढ़ने पर व्यक्ति के स्वभाव और व्यवहार में बदलाव भी दिखाई दे सकते हैं।
शायद डेमियन के अचानक जरूरत से ज्यादा पैसे खर्च करने और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने के पीछे भी यही वजह थी।
डॉक्टरों के लिए भी बीमारी का पता लगाना था मुश्किल
पीछे मुड़कर देखने पर डेमियन की पत्नि योलांडा को लगता है कि डेमियन में बीमारी के शुरुआती संकेत शायद कई साल पहले ही दिखाई देने लगे थे। योलांडा कहती हैं, “एक समय ऐसा आया था, जब हम अलग होने के बिल्कुल करीब पहुंच गए थे। हमें लग रहा था कि वह परिवार को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं। उनके लिए नौकरी पर टिके रहना मुश्किल हो गया था। वह बार-बार नौकरी छोड़ देते और हर बार कोई न कोई वजह बताते। मुझे बिल्कुल पता नहीं था कि असल में उनके साथ क्या हो रहा है।
2018 में डेमियन को पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) का भी पता चला था। यह एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या है, जो किसी बेहद डरावनी, दर्दनाक या तनावपूर्ण घटना को देखने या झेलने के बाद विकसित हो सकती है।
एक बीमारी ने बदल दी पूरी जिंदगी
डेमियन के लिए सही बीमारी तक पहुंचना भी आसान नहीं था। डॉक्टरों ने लक्षणों को देखते हुए हंटिंगटन बीमारी की जांच तीन बार कराई और तीनों बार रिपोर्ट निगेटिव आई। आखिरकार डॉक्टरों को पता चला कि उन्हें कहीं ज्यादा दुर्लभ एचडीएल2 बीमारी है।
आज डेमियन अकेले अपने घर से सड़क तक भी नहीं जा सकते। उन्हें डर रहता है कि वह वापस घर का रास्ता भूल न जाएं। योलांडा ही उनकी पूरे समय देखभाल करती हैं। इसके साथ उन्हें अपने चार बच्चों की जिम्मेदारी भी निभानी है। डेमियन हमेशा महफिल की जान हुआ करते थे। लेकिन अब उनकी अपनी जिंदगी पर निर्भर रहने की क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है।
डॉक्टरों ने परिवार को बताया है कि लक्षण शुरू होने के बाद डेमियन अगले 10 से 20 साल तक जीवित रह सकते हैं। लेकिन इस दौरान उनकी बीमारी धीरे-धीरे और बढ़ने की आशंका है।
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स्रोत:
‘My husband spent £1,000 on Candy Crush – it was the first sign of ultra-rare Huntington Disease’
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