पुरूषों के मुकाबले महिलाओं को ज्यादा आता है हार्ट अटैक, शोध में खुलासा
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बदलती जीवनशैली के चलते आजकल 30 से 35 साल की उम्र में भी हार्ट अटैक के मरीज सामने आ रहे हैं। आपने कभी परिवार में या आसपास सुना है कि बहन, मामी, मौसी, दादी, बुआ, चाची... को कभी हार्ट अटैक आया हो। शायद नहीं। क्योंकि अक्सर लोग महिलाओं की मौत का कारण अचानक दम घुटना, ब्रेन हेमरेज या कुछ और बताते हैं। कारण यह कि लोग समझते हैं कि हार्ट अटैक सिर्फ पुरुषों को पड़ता है। लेकिन यह बिल्कुल गलत है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, हर साल 4,25,000 महिलाओं को हार्ट स्ट्रोक पड़ता है, जो पुरुषों की तुलना में 55 हजार अधिक है। यही नहीं, वैश्विक स्तर पर चार महिलाओं में से एक महिला की दिल थमने के कारण मौत हो जाती है। कारण चाहे महिलाओं को समय पर इलाज नहीं मिलना, जानकारी का अभाव या दकियानूसी सोच हो, लेकिन सच यही है कि ऐसे मामले दिनोंदिन बढ़ते जा रहे हैं। इसलिए महिलाओं को सजग होना जरूरी है, क्योंकि कभी भी उन्हें दिल की बीमारियां अपनी गिरफ्त में ले सकती हैं।
असल में ऑफिस और घर संभालने के चक्कर में आजकल ज्यादातर महिलाएं तनाव और डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं, जो हार्ट अटैक का कारण है। कई अध्ययनों के अनुसार कैंसर, एचआईवी एड्स और मलेरिया से जितनी महिलाओं की मौत होती है, उससे अधिक महिलाओं की मौत हृदय वाहिका रोगों (सीवीडी) से होती है। दरअसल, हृदय रोग महिलाओं के लिए सबसे बड़ा हत्यारा है और यह हर मिनट एक महिला को मौत की गिरफ्त में ले जाता है। पूरी नींद नहीं लेने से भी महिलाओं में हार्ट अटैक के खतरे बढ़ रहे हैं। कई बार पूरी नींद नहीं लेने से आर्टरी ब्लॉक हो जाती हैं, जिससे दिल के रोगों का खतरा बढ़ जाता है। बढ़ता हुआ वजन आजकल महिलाओं की सबसे बड़ी समस्या है, लेकिन क्या आप जानती हैं कि इससे भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
क्यों सामने न आ पातीं दिल की बीमारियां
महिलाओं की तुलना में पुरुषों में हृदय संबंधी बीमारियों के लक्षण प्रत्यक्ष होतेे हैं। यानी पुरुषों को जब दिल का दौरा पड़ता है, तब उन्हें तेजी से सीने में दर्द और पसीने छूटते हैं। वहीं महिलाओं में दिल का दौरा अधिक बार और छोटा हो सकता है। बहुत-सी महिलाओं को पता नहीं होता कि अतीत में उन्हें 1-2 बार दिल का दौरा पड़ चुका है। इसका कारण है महिलाओं के शरीर का भौतिक विज्ञान, जिस वजह से उनमें लक्षण मध्यम होते हैं। कुछ लक्षण हैं जैसे- जबड़े के दर्द से थकान और पसीना आना, सीने में जलन या गर्दन व पीठ में दर्द। यदि गलत निरीक्षण किया गया हो, तो समस्या अधिक गंभीर हो जाती है। यही नहीं, अचानक (सडन) कार्डियक अटैक पड़ने वाली 50 फीसदी महिलाओं में हृदय रोगों का कोई बहीखाता नहीं होता।
महिलाओं में 40-50 की उम्र में हृदय रोगों की संभावना अधिक होती है। कारण मीनोपॉज का दौर, हार्मोन स्वास्थ्य की रक्षा करने में विफल, घर-ऑफिस में काम का दबाव और अकेलापन। अधिकांश महिलाएं दूसरों की जिंदगी व्यवस्थित करने के फेर में अपनी सेहत को नजरअंदाज करती रहती हैं। इसका प्रमुख कारण है समाज, जिसने महिलाओं से अधिक उम्मीदें बांधी है कि वे घर-बाहर की जिम्मेदारी निभाएं। यही नहीं, समाज ने महिलाओं की सोच में यह कूट-कूट कर भरा कि वे स्वयं की देखभाल नहीं करें। लेकिन आज स्थितियां बदल रही हैं। इसमें काफी परिवर्तन आया है। कारण युवा पीढ़ी की सोच बदल रही है। वे इसे अपने स्तर पर प्रचारित, प्रसारित व अमल में लाने में डटे हैं। और परिणामस्वरूप महिलाएं अपने प्रति नजरअंदाज वाला रवैया त्यागकर अपना देखभाल कर रही हैं।
क्या है कार्डियक अटैक
अचानक जब हृदय की गति थम जाती है और शरीर के मुख्य अंगों में रक्त प्रवाह में अवरोध आता है, तो उसे सडन कार्डियक अटैक कहते हैं। यदि समय पर त्वरित डॉक्टरी परामर्श नहीं मिले, तो व्यक्ति की जान भी जा सकती है। सडन कार्डियक अटैक अचानक पड़ता है, जिससे मदद के लिए समय कम मिलता है।
कार्डियक अटैक और हार्ट अटैक
अधिकांश लोग सोचते हैं कि कार्डियक अटैक और हार्ट अटैक एक से हैं। उनमें कोई अंतर नहीं। लेकिन यह धारणा सरासर गलत है। कार्डियक अटैक और हार्ट अटैक में रक्त प्रवाह का अंतर है। हार्ट अटैक में रक्त का प्रवाह हृदय के एक हिस्से में कम होकर उसे नुकसान पहुंचाता है। वहीं दूसरी ओर कार्डियक अटैक में हृदय पूर्ण रूप से काम नहीं करता। या यूं कहें कि हृदय के काम करने में ठहराव आ जाता है, जो व्यक्ति को बेहोश नहीं करता, बल्कि नाड़ियों में शून्यता लाता है। साइलेंट या सडन कार्डियक अटैक हार्ट अटैक की तुलना में अधिक जानलेवा होता है।
महिलाओं में हृदय संबंधी बीमारियां
जिन महिलाओं को पहले से ही हृदय संबंधी बीमारियां होती हैं, उन्हें अचानक (सडन) कार्डियक अटैक पड़ने की संभावना अधिक होती है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक कार्डियक अटैक की चपेट में आती हैं। हाल ही में एक्ट्रेस श्रीदेवी की मौत का कारण भी कार्डियक अटैक बताया गया था।
संकरी होती कोरोनरी धमनियां
जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ, हार्ट इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. पुरुषोत्तम लाल बताते हैं कि दिल की बीमारियां भारत जैसे विकसित देशों में महिलाओं की मौत का प्रमुख कारण बन गई हैं। हर साल कोरोनरी धमनी रोग (सीएडी) से पुरुषों की तुलना में महिलाओं की मौत अधिक होती है।
डॉ. लाल कहते हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को एकमात्र लाभ एस्ट्रोजन हार्मोन के रूप में मिलता है, जो महिलाओं के शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को ऊपर उठाता है तथा खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है। लेकिन रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन का स्तर घट जाता है और इसलिए इससे मिलने वाली सुरक्षा भी कम हो जाती है। रजोनिवृत्ति के दस साल बाद महिलाओं को पुरुषों के बराबर ही हृदय रोगों का खतरा होता है।
यह आम धारणा है कि महिलाओं को एस्ट्रोजन हार्मोन उन्हें हृदय रोगों से बचाता है, लेकिन इसके बावजूद तथ्य यह है कि दुनिया भर में हृदय रोगों के जितने मामले होते हैं, उनमें से 15 फीसदी मामले भारतीय महिलाओं के होते हैं। भारतीय महिलाओं को पुरुषों के बराबर ही हृदय रोगों का खतरा होता है, क्योंकि महिलाओं के मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे रोगों की चपेट में आने के खतरे ज्यादा होते हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं की कोरोनरी धमनियां संकरी होती है, जिसके कारण उनमें अवरोध आने की समस्या अधिक होती है।
गर्भवती महिला रखें खास ध्यान
गर्भावस्था के दौरान, बच्चे को जन्म देने या फिर प्रसव के दो महीने के बाद उनमें दिल का दौरा पड़ने की आशंका ज्यादा रहता है। अमेरिका में हुए एक अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। जर्नल मायो क्लिनिक प्रोसीडिंग में प्रकाशित निष्कर्ष बताते हैं कि कई महिलाओं के बीच अधिक उम्र में बच्चों को जन्म देने की प्रवृत्ति का बढ़ना इसका एक संभावित कारण हो सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, “महिलाओं में मोटापे या मधुमेह से पीड़ित होने की संख्या में वृद्धि हुई है, जो कि दिल के दौरे के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है।” शोधकर्ताओं ने अध्ययन के लिए अस्पतालों में दर्ज 4,98, 29, 753 डिलिवरी का विश्लेषण किया और पाया कि प्रसव के दौरान एक हजार 61 महिलाओं को दिल का दौरा पड़ा। बच्चे के जन्म से पहले 922 महिलाओं को मायोकॉर्डियल इंफेक्शन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया और जन्म के बाद स्वास्थ्य में सुधार की अवधि के दौरान 2 हजार 390 महिलाओं को दिल का दौरा पड़ा।
तनाव का असर भी
तलाक के बाद के तनाव का पुरुषों के दिल पर जितना असर पड़ता है, उससे दोगुना ज्यादा महिलाओं के दिल पर पड़ता है। इस वजह से उनमें दिल का दौरा पड़ने की आशंका भी दोगुना बढ़ जाती है। अमेरिका में उत्तरी कैरोलीना की ‘ड्यूक यूनीवर्सिटी’ में हाल ही में हुए एक शोध के मुताबिक खुशहाल शादीशुदा महिलाओं की तुलना में तलाकशुदा महिलाओं में दिल का दौरा पड़ने का खतरा दोगुना रहता है।
पिछले दशक में छोटी उम्र के समूह में कोरोनरी धमनी रोग (सीएडी) दिखाई देने के साथ चीजें बहुत बदल गई हैं। जीवनशैली में बदलाव ने भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। एक तरफ आसन्न जीवनशैली एक प्रमुख कारक है, जिसे इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और दूसरी तरफ, तनाव और अस्वस्थ आहार के सेवन की लत, मौखिक गर्भ निरोधकों के सेवन और धूम्रपान के सेवन ने उम्र के शुरुआती पड़ाव पर दिल की बीमारियों में वृद्धि में योगदान दिया है। पुरुष और महिलाओं को यह समझना महत्वपूर्ण है कि कार्डियक स्वास्थ्य के मूलभूत सिद्धांत दोनों के लिए समान हैं। मोटापा, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल के स्तर और मधुमेह जैसे विकासशील कारकों को रोकना, जितना संभव हो सके तम्बाकू और शराब के सेवन से परहेज करना बहुत जरूरी है। वहीं, सबसे महत्वपूर्ण है शारीरिक गतिविधियों वाले चीजों में अधिक शामिल होना। इनका ध्यान रखने से हृदय रोग से बचाव हो सकता है, चाहे वह पुरुष हो या महिला।
- डॉ. वनीता अरोड़ा
कार्डिएक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली