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पीठ दर्द से झट से राहत देगा ये खास उपाय, आप भी आजमाकर देखिए

Wed, 30 May 2018 10:10 AM IST
-डॉ. संजीव कुमार, न्यूरो सर्जन, दिल्ली 
-डॉ. संजीव कुमार, न्यूरो सर्जन, दिल्ली  Updated Wed, 30 May 2018 10:10 AM IST
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Spinal Cord 'Pacemaker' Reduces Chronic Back Pain
अगर आप रीढ़ की हड्डी के दर्द से परेशान हैं। दवाएं या फिजियोथेरेपी बेअसर साबित हो रही है, तो स्पाइनल कॉर्ड पेसमेकर के जरिए दर्द से छुटकारा पा सकते हैं। रीढ़ की हड्डी के दर्द से जिन्हें दर्द से निजात नहीं मिलता, उनके लिए स्पाइनल कॉर्ड पेसमेकर काफी कारगर सबित हो रहा है। यह उपकरण दर्द के संदेश को मस्तिष्क तक जाने से रोक देता है, जिससे रोगी को राहत मिलती है। स्पाइनल कॉर्ड पेस मेकर नसों के मार्ग को दुरुस्त कर रीढ़ की हडि्डयों में होने वाले दर्द में कमी लाता है।
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 पेसमेकर इंप्लांट कर स्पाइन दर्द से मुक्ति मिल सकती है। जैसे सामान्य पेसमेकर हमारे हृदय की मांसपेशियों के संकुचन को नियंत्रित करता है और हृदय को सामान्य गति प्रदान करता है, ठीक उसी प्रकार स्पाइनल कॉर्ड पेसमेकर स्पाइन के दर्द को नियंत्रित करता है। इस इलेक्ट्रॉनिक उपकरण यानी पेसमेकर को रोगी के त्वचा के नीचे लगाया जाता है। पेसमेकर लगाने के बाद, स्पाइनल कॉर्ड स्पेस में इलेक्ट्रोड, जिसे ‘एपिड्यूरल स्पेस’ कहते हैं, रखा जाता है। इस कारण इस स्पेस में कुछ मिली एंपीयर के करंट के साथ हाई फ्रीक्वेंसी का इलेक्ट्रिकल इंपल्स उत्पन्न होता है। यह इंपल्स स्पाइनल कॉर्ड से होकर ब्रेन तक पहुंचने वाले दर्द के संकेतों को बीच में ही रोक देता है और उसे निष्प्रभावी कर देता है। इससे रोगी का दर्द कम हो जाता है।

यह पूरी कार्यप्रणाली जिस सिद्धांत के तहत कार्य करती है उसे ‘गेट कंट्रोल थ्योरी ऑफ पेन’ कहते हैं। जब मरीज पर दवाइयों का प्रभाव बिल्कुल खत्म हो जाए और सिर्फ सर्जरी ही एक मात्र विकल्प बचे, तब इस प्रक्रिया के जरिए स्पाइन के दर्द से निजात पाई जा सकती है और सर्जरी से बचा जा सकता है। यह प्रक्रिया सर्जरी के मुकाबले सुविधाजनक और दर्द मुक्त है। लेकिन, अगर आप इस तरह के दर्द से परेशान हैं, तो बिना डॉक्टर की सलाह लिए, कुछ न करें।  
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ट्रायल इंप्लांट
टेंपररी यानी ट्रायल इंप्लांटेशन के दौरान उपकरण को एक्सटर्नल स्टीमुलेटर से जोड़ दिया जाता है और उसे इस तरह से प्रोग्राम किया जाता है कि वह दर्द वाले स्थान को कवर कर ले। इस इंप्लांट को करने के कई कारण होते हैं। इस इंप्लांट से यह जानने में मदद मिलती है कि यह थेरेपी दर्द के किस स्तर, प्रकार, स्थान और गंभीरता में प्रभावी है। ट्रायल इंप्लांटेशन के बाद अगर मरीज को दर्द से 70 से 80 फीसदी तक आराम मिलता है, तभी पर्मानेंट इंप्लांट किया जाता है। 
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पर्मानेंट इंप्लांट
दर्द की गंभीरता को देखते हुए ही इस इंप्लांट को किया जाता है। इसमें एक छोटी सी चीरे की सहायता से दर्द के सटीक स्थान पर एक या दो लीड डाला जाता है। इस लीड को कहीं भी इंप्लांट किया जा सकता है, लेकिन पेट के एक तरफ निचले हिस्से को वरीयता दी जाती है।  

विशेषज्ञ कहते हैं... 

स्पाइनल कॉर्ड इंजरी और न्यूरोपैथिक पेन से दुनिया में काफी सारे लोग पीड़ित हैं। जब दवाएं और फिजियोथेरेपी बेअसर हो जाती है, तो न्यूरो मोडिलेशन यानी पेसमेकर इंप्लांट करने से आराम मिलता है। इसके द्वारा स्पाइनल कॉर्ड से जो संवेदना ब्रेन के थेलसमस (जहां हम दर्द को महसूस करते हैं) तक जाती है, उन्हें रोका जाता है। इससे ब्रेन दर्द महसूस नहीं करता है। अगर दर्द महसूस भी करता है, तो उसकी तीव्रता काफी कम होती है। रोज-रोज की दर्द निरोधक गोलियों व फिजियोथेरेपी से बचने के लिए इसका सहारा लिया जा सकता है। यह तकनीक उनके लिए भी कारगर है, जिन्हें स्पाइनल चोट लगी हो।
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