कर्नाटक: हासन में हार्ट अटैक से हुई मौतों ने मचाई थी तबाही, अब आ गई इसकी रिपोर्ट; जानिए क्या पता चला
- कर्नाटक के हासन जिले में पिछले करीब सवा महीने (40 दिनों) में हार्ट अटैक से 24 मौतें हुईं। इनमें से कई लोगों की उम्र 45 साल से कम थी।
- कर्नाटक सरकार ने मौतों की जांच का आदेश दिया था, गुरुवार को इसकी रिपोर्ट में कई बातें स्पष्ट हुई हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हार्ट अटैक और इसके कारण होने वाली मौतें लंबे समय से काफी चर्चा में रही हैं। कर्नाटक के हासन जिले में पिछले करीब सवा महीने (40 दिनों) में हार्ट अटैक से 24 मौतें हुईं। इनमें से कई लोगों की उम्र 45 साल से कम थी। इन बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बेंगलुरु के जयदेव अस्पताल में हार्ट अटैक के मरीजों की संख्या में 8% का इजाफा हुआ। डॉक्टरों ने बताया कि बढ़ते मामलों के बीच हासन और आसपास के जिलों से कई लोग एहतियाती जांच के लिए आ रहे हैं। मैसुरु के भी अस्पताल में हार्ट से जुड़ी जांच के लिए रोजाना हजारों लोग पहुंचने लगे।
कर्नाटक सरकार ने मौतों की जांच का आदेश दिया था, गुरुवार को इसकी रिपोर्ट में कई बातें स्पष्ट हुई हैं। इन मामलों की जांच कर रही टीम ने कहा है कि जांच में कोई असामान्य वृद्धि नहीं पाई गई है।
क्या कहते हैं अस्पताल के निदेशक
पिछले छह महीनों में श्री जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज और मैसूरु-कलबुर्गी में इसके केंद्रों में हृदय संबंधी मामलों के डेटा विश्लेषण से भी हृदय संबंधी मौतों में कोई बढ़ती प्रवृत्ति सामने नहीं आई।
जयदेव इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. के.एस. रवींद्रनाथ ने ''हासन जिले में युवाओं की अचानक मौतों में हालिया वृद्धि पर जांच रिपोर्ट" शीर्षक से कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव को रिपोर्ट सौंपी, जिन्होंने गुरुवार को मीडिया के साथ इसके निष्कर्ष साझा किए।
रिपोर्ट ेमें क्या पता चला?
संवाददाताओं को संबोधित करते हुए, राव ने कहा कि जांच में हाल के महीनों में दिल के दौरे की संख्या में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं देखा गया है। 75 प्रतिशत मामलों में मृत्यु के कारणों का पता लगाया जा चुका है, शेष 25 प्रतिशत मामलों में कारण अब भी अज्ञात हैं।
उन्होंने कहा कि सभी मामलों के पोस्टमॉर्टम न होने से संपूर्ण आंकड़े उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। मृतकों में 19 से 43 वर्ष की आयु के सात व्यक्तियों की अचानक मृत्यु हुई। 19, 21, 23 और 32 वर्ष की आयु के व्यक्तियों की अचानक मृत्यु हुई, जो चिंताजनक है। 20 अचानक मौतों में से सात की आयु 45 वर्ष से कम थी। इस पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
मौत के लिए कई कारणों को पाया गया जिम्मेदार
45 वर्ष से कम आयु वाले सातों मामलों में से चार में शव के परीक्षण रिपोर्ट में मृतकों में हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया का आनुवांशिक संकेत मिला था। हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया हाई कोलेस्ट्रॉल की आनुवंशिक स्थिति है। कुछ मामलों में धूम्रपान और शराब पीने जैसी आदतें भी पाई गईं।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया कि शवों के परीक्षण, नैदानिक आंकड़ों की कमी और परिवारों के सीमित मेडिकल हिस्ट्री रिपोर्ट्स के कारण, सभी मामलों में निश्चित निष्कर्ष निकालना मुश्किल है।
-------------
नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।