फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Lifestyle ›   Health & Fitness ›   No matter what your genetic makeup, you can avoid diseases easily says new research

अनुवांशिक बीमारियों से मिलेगा छुटकारा, रिसर्च में हुआ खुलासा

Tue, 27 Nov 2018 06:32 PM IST
इमैन्यूअल कारपेंटर, क्रिस्पर केस-9 की खोजकर्ता
इमैन्यूअल कारपेंटर, क्रिस्पर केस-9 की खोजकर्ता Updated Tue, 27 Nov 2018 06:32 PM IST
विज्ञापन
No matter what your genetic makeup, you can avoid diseases easily says new research
father son - फोटो : social media

कई बीमारियां ऐसी होती हैं जिनका हमारी जीवनशैली से सीधा संबंध नहीं होता है। ये  बीमारियां पूर्वजों से हमें मिली होती हैं। क्रिस्पर कास-9 तकनीक ने आनुवंशिक बीमारियों के खिलाफ उम्मीद की रोशनी दिखाई है...

विज्ञापन


नृ  विज्ञान के नजरिये से देखें तो हम करोड़ों वर्ष में हुए इंसानों के पीढ़ीगत विकास के चलते-फिरते विश्वकोश हैं। हमारे शरीर का एक-एक अंग, हमारी त्वचा का रंग, हमारी आवाज, हमारे नैन-नक्श, हमारे शरीर की बनावट, चाल-ढाल, हमारी क्षमता और अक्षमता, स्वास्थ्य और बीमारियां, मोटे तौर पर हमारे पूर्वजों द्वारा तय किए गए हैं।
विज्ञापन

पूर्वजों से विरासत में मिलीं आनुवंशिक कमियां किसी बुरे सपने की तरह है, जिसे हम नहीं देखना चाहते, फिर भी देखते हैं। हालांकि, वक्त के साथ हो रहीं वैज्ञानिक खोजें और तकनीकी विकास अब आनुवंशिक बीमारियों और कमियों के बुरे सपने से हमें हमेशा के लिए मुक्ति देने का वादा करती नजर आ रही हैं। कई तरह की आनुवंशिक कमियों को अब हम अगली पीढ़ी में जाने से रोक सकते हैं। कई मामलों में तो सिर्फ उचित पोषण, व्यायाम और बेहतर जीवनशैली से ही जींस की सेहत सुधारी जा सकती है और आने वाली पीढ़ी पर इसके दुष्प्रभावों को रोका जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

No matter what your genetic makeup, you can avoid diseases easily says new research
डीएनए यह तय करते हैं कि अगली पीढ़ी में किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां देनी हैं - फोटो : File Photo

हमारी जीवनशैली से हमारे जींस यानी डीएनए यह तय करते हैं कि अगली पीढ़ी में किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां देनी हैं। जब हम खराब जीवनशैली अपनाते हैं तो हमारे डीएनए में स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां भी प्रभावित होती हैं। यह गड़बड़ी म्युटेशन कहलाती है। म्युटेशन की वजह से जींस में आने वाले बदलाव आनुवंशिक रोगों की सबसे बड़ी वजहें बनते हैं।
हालांकि, कई बीमारियां ऐसी होती हैं, जिनका हमारी जीवनशैली से सीधा संबंध नहीं होता है और हमारे पूर्वजों से हमें मिली होती हैं। आने वाले दिनों में करीब 1800 ज्ञात माेनोजेनिक आनुवंशिक बीमारियों का इलाज सहज संभव हो सकेगा। क्रिस्पर कास-9 तकनीक ने आनुवंशिक बीमारियों के खिलाफ उम्मीद की रोशनी दिखाई है। अभी-तक ज्यादातर आनुवंशिक बीमारियों का या तो कोई स्थायी इलाज नहीं है या फिर इलाज बेहद महंगा है और सहज उपलब्ध भी नहीं है। लेकिन क्रिस्पर कास-9 (क्लस्टर्ड रेग्युलरली इंटरस्पेस्ड शॉर्ट पैलिन्ड्रोमिक रिपीट्स) बेहद सटीक, सस्ती और सहज उपलब्ध हो सकने वाली तकनीक है। इस तकनीक के जरिए इंसान में उनके पूर्वजों से आने वाली गंभीर आनुवंशिक बीमारियों को दूर किया जा सकेगा। साथ ही जीन एडिटिंग की मदद से भ्रूण में ही ब्लड सेल को एनीमिया और इम्यून सेल को कैंसर से सुरक्षा देना संभव होगा। इस तकनीक के जरिए न केवल पीड़ित व्यक्ति को इलाज मिल सकता है, बल्कि इससे नवजातों को किसी भी तरह के आनुवांशिक दोषों से बचाया जा सकता है।

No matter what your genetic makeup, you can avoid diseases easily says new research
इस तकनीक के जरिए शोधकर्ताओं ने चूहों में एचआईवी को पूरी तरह से ठीक कर दिया


इस तकनीक के जरिए शोधकर्ताओं ने चूहों में एचआईवी को पूरी तरह से ठीक कर दिया और कैंसर को 50 फीसदी तक खत्म करने में कामयाबी हासिल की है। इसके अलावा चीन में लंग कैंसर के मरीजों का इस तकनीक के जरिए इलाज किया जा रहा है, जिसमें काफी सकारात्मक नतीजे मिले हैं। यह बात अलग है कि इस तकनीक से जगी उम्मीदों के सामने नैतिकता से जुड़े कई सवाल भी हैं, जिनपर हमें फैसला करना होगा। मसलन, इस बात में कोई शक नहीं कि इस तकनीक का इस्तेमाल कर उत्तर कोरिया जैसे देश बेरहम सुपर सोल्जर्स की फौज बना सकते हैं। इसके अलावा हमारे धार्मिक प्रतिष्ठान इसे प्रकृति के काम में दखलंदाजी के तौर पर मान रहे हैं और इसका मानव भ्रूण पर प्रयोग प्रतिबंधित करना चाहते हैं। इस तकनीक का दुनियाभर की लैब्स में परीक्षण किया जा रहा है। कई देशों मे इसका सरकार की निगरानी में प्रयोग भी हो रहा है। याद हाेगा 2018 की शुरुआत में ही ब्रिटेन की सरकार ने मानव भ्रूण में माइट्रोकांड्रियल ट्रांसफर के पक्ष में संसद में प्रस्ताव भी पास किया था। इस तकनीक के जरिए खास क्रिया-कलापों या शरीरिक गठन के घटकों को तय करने वाले जींस को एडिट कर सकेंगे। म्युटेटेड व करप्ट जींस को जिनोम से हटा सकेंगे। यानी वह दिन दूर नहीं, जब हर इंसान 'सुपरह्युमन' बन जाएगा।

No matter what your genetic makeup, you can avoid diseases easily says new research
आने वाली दुनिया में इंसानी स्वास्थ्य हमारी उम्मीदों से बहुत बेहतर होगा

हम पूरे यकीन के साथ कह सकते हैं कि आने वाली दुनिया में इंसानी स्वास्थ्य हमारी उम्मीदों से बहुत बेहतर होगा। हम खुद से और बीती पीढ़ी की तुलना में बहुत बेहतर इंसानों की उम्मीद कर सकते हैं। क्रिस्पर केस-9 तकनीक अभी ठीक वैसी है, जैसी 70 के दशक में कंप्युटर हुआ करते थे। लेकिन यकीनन जल्द ही इस तकनीक के बेहतर संस्करण आएंगे और वह दिन दूर नहीं, जब हम तय कर पाएंगे कि हमारे बच्चे की शक्ल कैसी हो या उसमें किस तरह की खास क्षमताएं होनी चाहिए। शर्तिया तौर पर यह तकनीक कारगर है।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed