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Monsoon Diet: मानसून में दही खाना चाहिए या नहीं? जानिए बारिश के मौसम में इसका स्वास्थ्य पर असर
Tue, 02 Jul 2024 09:20 AM IST
शिवानी अवस्थी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Tue, 02 Jul 2024 09:20 AM IST
सार
मानसून के दौरान दही खाना कुछ लोगों के लिए चिंता का विषय हो सकता है, खासकर भारतीय परंपराओं और आयुर्वेदिक मान्यताओं के आधार पर।
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मानसून में दही खाना चाहिए या नहीं?
- फोटो : istock
विस्तार
Eating Curd in Rainy Season : दही एक पोषक तत्व से भरपूर भोजन है जो हमारे स्वास्थ्य को कई फायदे प्रदान करता है। दही कैलोरी, प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, शर्करा, कैल्शियम, फास्फोरस, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी 12 और पोटेशियम से भरपूर है। दही का नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हो सकता है, लेकिन इसका संतुलित मात्रा में और उचित प्रकार से सेवन करना चाहिए। दही खाने के कुछ फायदे हो सकते हैं जैसे,
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दही का सेवन पाचन में सुधार, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना, हड्डियों और दांतों की मजबूती, वजन घटाने में सहायक, हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहतर और त्वचा के लिए फायदेमंद हो सकता है। हालांकि दही का सेवन सही मात्रा में और सही समय पर किया जाना जरूरी है। मानसून के दौरान दही खाना कुछ लोगों के लिए चिंता का विषय हो सकता है, खासकर भारतीय परंपराओं और आयुर्वेदिक मान्यताओं के आधार पर। मानसून में दही का सेवन सुरक्षित हो सकता है यदि इसे उचित तरीके से और संतुलित मात्रा में खाया जाए। हालांकि, अगर आपको किसी भी प्रकार की असुविधा होती है, तो अपने चिकित्सक से सलाह लेना सबसे अच्छा होता है।
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दही खाने का सही समय
आयुर्वेद में दही खाने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि दही का सेवन सुबह या दोपहर के खाने में करना चाहिए। रात में दही नहीं खाना चाहिए। वहीं आयुर्वेद में मानसून में दही के सेवन की मनाही है। इसका आयुर्वेदिक कारण भी है। कहा जाता है कि बारिश में दही खाने के कुछ दुष्प्रभाव हैं।
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मानसून में दही न खाने की वजह और नुकसान
मानसून के बीच सावन का महीना आ जाता है। आयुर्वेद के मुताबिक, इस महीने में शरीर के दोष असंतुलित हो जाते हैं। वात बढ़ जाता है और पित्त जमा हो जाता है। मानसून में पेट संबंधी कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। दही पाचन के लिए भले ही बेहतर है लेकिन सावन में दही का सेवन शरीर के छिद्र बंद कर सकता है और कई तरह की शारीरिक समस्याएं बढ़ सकती हैं।
दही को ठंडा और भारी माना जाता है और इसे मानसून के दौरान खाने से कफ दोष बढ़ सकता है, जो सर्दी, खांसी, और गले में खराश जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। मानसून के दौरान वातावरण में नमी और तापमान की वजह से बैक्टीरिया और अन्य रोगजनक जीवाणुओं की वृद्धि हो सकती है, जिससे दही भी प्रभावित हो सकता है यदि उसे सही तरीके से संग्रहित नहीं किया गया हो।
सावधानियां:
- मानसून के दौरान ताजा और सही तरीके से संग्रहित दही का सेवन करें ताकि संक्रमण का खतरा कम हो।
- अत्यधिक मात्रा में दही खाने से बचें, खासकर रात के समय, क्योंकि यह पाचन में समस्या पैदा कर सकता है।
- अगर आपको दही खाने से किसी प्रकार की असुविधा या एलर्जी होती है, तो इसका सेवन बंद कर दें और अपने चिकित्सक से परामर्श लें।