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चीन से 3 हजार किलोमीटर दूर भारत कैसे आया आपका मोमोज, रोचक है यह कहानी

Sat, 22 Jun 2019 06:51 AM IST
ललित फुलारा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: ललित फुलारा Updated Sat, 22 Jun 2019 06:51 AM IST
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Momos history how it came india from china
मोमोज - फोटो : अमर उजाला

मोमोज, भारत में बेहद लोकप्रिय डिश है। वेज हो या फिर नॉन-वेज, मोमोज को लेकर हर उम्र के लोगों का क्रेज देखने लायक है। यह एक ऐसी डिश है जो रेहड़ी-पटरी ही नहीं बल्कि व्यस्त बाजारों, ऑफिसों और मॉल, हर जगह आपको मिल जाएगी। स्ट्रीट फूड्स के तौर पर तो मोमोज को लेकर बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों का प्यार ही कुछ और है।

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स्कूल हों या फिर कॉलेज, ऑफिस हो या मॉल, आपको इन जगहों के आस-पास मोमोज का ठेला जरूर दिख जाएगा। गर्मियां हों या फिर सर्दियां, मोमोज खाने को लेकर लोगों का उत्साह हर मौसम में एक जैसा ही रहता है। क्या आप जानते हैं कि मोमोज ने भारत तक पहुंचने में कितना लंबा सफर तय किया है। आपके लजीज, जायकेदार और चटपटे मोमोज को आपके स्वाद में शामिल होने के लिए 3 हजार किलोमीटर से भी ज्यादा का सफर तय करना पड़ा है।
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कहां की डिश है मोमोज और कैसे पहुंची भारत?
मोमोज तिब्बत की डिश है। यह चीन के मालपुए से प्रभावित है। नेपाल के रास्ते मोमोज ने भारत का सफर तय किया। उत्तर पूर्वी राज्यों से होते हुए शहरों में मोमोज ने अपनी धाक जमाई और सबसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड की कतार में शामिल हो गई। पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड और हिमाचल में भी मोमोज की बेहद लोकप्रियता है। हालांकि यह भी कहा जाता है कि तिब्बत से भी पहले मोमोज चीन में बनते थे। लेकिन वहां इसका स्वरूप अलग था। मोमोज का अर्थ ही होता है- भांप में पकाई गई रोटी। 
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यह भी कहा जाता है कि मोमोज की डिश सबसे पहले तिब्बत के लहासा में बनी। इसके बाद इस डिश की सामग्री बदलती रही। तिब्बत से मोमोज नेपाल गए तो बनाने की विधि और सामग्री थोड़ा अलग हो गई। ऑक्सफॉर्ड डिक्शनरी में मोमोज का अर्थ- भांप में बनी तिब्बती डिश बताया गया है जो कि मांस और सब्जियों को मिलाकर तैयार की जाती है। नेपाल में मोमोज व्यंजन सबसे पहले काठमांडु में मिलने शुरू हुए।

Momos history how it came india from china
मोमो

माना जाता है कि तिब्बत के व्यापारी वहां से मोमोज को काठमांडु में लाए। हालांकि, मोमोज डिश की उत्पत्ति को लेकर सटीक जानकारी मिलना थोड़ा मुश्किल है। दरअसल, तिब्बत की संस्कृति और खान-पान पर चीन और मंगोल प्रभाव रहा है, ऐसे में यह कहा जाता है कि मोमोज भी चीन से ही तिब्बत आए। इस डिश को भांप में बनाया जाता है।

तिब्बज में मोमोज सबसे ज्यादा खाए जाते हैं। शिलांग में मोमोज मांस में तैयार किए जाते हैं और यहां के मोमोज काफी प्रसिद्ध भी हैं। शिलांग के अलावा अरुणाचल में भी मोमोज काफी लोकप्रिय हैं। यहां इस डिश को चाव से खाया जाता है। यहां इसमें सरसों की पत्तियां व दूसरे सब्जियों के साथ बनाया जाता है ताकि यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सके।  चीन में मोमोज को डिमसिम कहा जाता है। यहां इसे मांस में दूसरी सब्जियां मिलाकर बनाया जाता है। यानी की मोमोज के अंदर ये चीजें भरी जाती हैं। इसके अलावा इनदिनों भांप के अलावा तेल में तले हुए मोमोज खाने का चलन भी बढ़ रहा है। दिल्ली और दूसरे शहरों में फ्राई मोमोज का चलन बढ़ा है।  

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