फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Lifestyle ›   Fitness ›   late night shift is a slow poison

नाइट शिफ्ट में काम करने वाले पढ़ लें ये खबर

Sat, 01 Aug 2015 12:55 PM IST
Updated Sat, 01 Aug 2015 12:55 PM IST
विज्ञापन
late night shift is a slow poison

जो लोग रात में काम करते हैं उनके लिए यह चिंता की बात है। अससायरा मांटेग्यू बता रही हैं कि रात में काम करने का शरीर पर क्या असर होता है। मैं सालों से काम पर जाने के लिए आधी रात को उठती रही हूँ। और यह सब आज का कार्यक्रम प्रजेंट करने के लिए करना पड़ता है और मैं खुशी खुशी यह क़ीमत चुकाती हूँ।

विज्ञापन


लेकिन मैं हमेशा ये सोचती हूँ कि क्या इसका लंबे समय में नुकसान होगा। उस समय उठना जब शरीर बिल्कुल इनकार कर रहा हो, क्या कोई गंभीर और स्थाई नुकसान वाली बात है?
विज्ञापन


मैं उन 35 लाख ब्रितानी नागरिकों में से एक हूँ जो नाइट शिफ़्ट में काम करते हैं। इनमें से कुछ और ज़्यादा घंटे और कुछ तो पूरी रात काम करते हैं।

कहानी जो डरा दे

late night shift is a slow poison

50 साल पहले आम तौर पर लोग आठ घंटे की नींद लेते थे। लेकिन अब यह घटकर औसतन 6.5 घंटे हो गई है।बहुत सारे लोग नींद को आलस मानते हैं. लेकिन यह उतना ही ज़रूरी है जितना सांस लेना और खाना।

ये वो समय है जब हमारा दिमाग दिन भर के कामों और यादों को व्यवस्थित करता है। और इस दौरान शरीर कुछ अंदरूनी मरम्मत का काम भी करता है।

हमने पाया है कि भरपूर नींद लेने के बाद भी रात में काम करने का समय ग़लत है।

हमेशा से यह माना जाता था कि शरीर की जैविक घड़ी रात में काम के हिसाब से खुद को अभ्यस्त कर लेती है।

लेकिन ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय से जुड़े स्लीप एक्सपर्ट प्रोफ़ेसर रसेल फ़ोस्टर कहते हैं, “कई सारे अध्ययन बताते हैं कि ऐसा नहीं है।”

जो लोग रात में लंबे समय तक काम करते हैं, उनको टाइप 2 डायबिटीज़, हृदय रोग और कैंसर का गंभीर ख़तरा होता है।

कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि मेरी तरह ही काम पर सुबह चार बजे पहुंचने वाले लोगों का दिमाग उतना ही सुस्त होता है जितना दो चार व्हिस्की या बियर पिये हुए इंसान का दिमाग होता है।

जैविक घड़ी

late night shift is a slow poison

जब मैं सुबह छह बजे के प्रोग्राम के शुरुआती शब्द बोलती हूँ तो अक्सर मैं उन लोगों के बारे में सोचती हूँ, जिनकी नींद में हम खलल डाल रहे हैं।

सुबह के चार बजे की बजाय छह बजे का अलार्म लगाना क्यों बहुत आसान होता है? असल में हमारे मस्तिष्क में कुछ हज़ार ऐसी कोशिकाएं होती हैं, जहां हमारे शरीर की मुख्य जैविक घड़ी होती है।

कब सोना है, कब जगना है या भोजन पचाने के लिए लीवर को कब एंजाइम पैदा करना है, जैविक घड़ी इन सबको नियंत्रित करती है।

यह घड़ी हमारे दिल की धड़कन को भी नियंत्रित करती है, यह सुबह धड़कन को तेज़ और शाम को सुस्त करती है।

जैविक घड़ी पर 20 सालों तक काम कर चुके कैंब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर माइकल हैस्टिंग्स कहते हैं, “हमारे सभी अंग खास समय पर खास काम करने के लिए पहले से तय अनुवांशिक निर्देशों के अधीन होते हैं।”

यह इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन नमूना है जो क्रमिक विकास का नतीजा है। यह नीदरलैंड के गुफ़ा मानवों के लिए बिल्कुल सटीक है लेकिन 21वीं सदी के रात की पाली में काम करने वालों के लिए नहीं.
ख़तरा जैसा कि मैं करती हूँ, आधी रात को चॉकलेट खाने से शुगर और फ़ैट दिन के मुकाबले कहीं देर तक ख़ून में दौड़ता रहता है।

खून में शुगर की अधिक मात्रा से टाइप 2 डायबिटीज़ होता है और फै़ट का स्तर बढ़ने से दिल का रोग होता है। इसीलिए रात की पाली में काम करने वालों में दिल के रोग का ख़तरा डेढ़ गुना ज़्यादा होता है।

विज्ञापन

रात में काम करने वालों मोटापे का भी यही कारण है

late night shift is a slow poison

कैंसर से भी इसका संबंध है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2007 में कहा था कि रात में काम करना कैंसर का कारण हो सकता है।

रोगों की सूची लंबी है. एक हालिया शोध में पता चला है कि दस साल तक रात की पाली में काम करने वाले मज़दूर का दिमाग 6.5 साल बूढ़ा हो जाता है। उन्हें सोचने और याद रखने में दिक्कत आती है।

अमरीका में उन 75,000 नर्सों पर एक अध्ययन हुआ जो पिछले 22 साल से पालियों में काम करती हैं। पता चला कि उन नर्सों में दस में से की मौत जल्दी होगी, जिन्होंने छह साल तक पालियों में काम किया।

मुआवजा

late night shift is a slow poison

मैंने रात में काम करने वाले एक सफाई कर्मचारी से बात की। वो कहते हैं कि ड्यूटी के बाद घर जाकर सोने की बजाय वो दिन में ट्रक चलाते हैं। और वो ऐसा सप्ताह के छह दिन करते हैं, यानी औसत नींद तीन घंटे होती है।

ब्रिटेन में रात में काम करने वालों के लिए कोई विशेष स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के नियम नहीं हैं।

लेकिन कुछ कंपनियों और सरकारों ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेना शुरू किया है।

डेनमार्क की सरकार ने उन महिलाओं को मुआवजा दिया है जिन्हें रात में काम करने के कारण ब्रेस्ट कैंसर हो गया था।

प्रदूषण की वजह से होने वाली बीमारियों के कारण रात में काम करने वाले इलेक्ट्रानिक्स वर्करों को कोरिया ने मुआवजा दिया है।

अमरीका की एक ट्रक कंपनी में कुछ सप्ताहों में तीन दुर्घटनाएं हो गईं। उन्होंने काम करने के समय में बदलाव कर दिया और ड्राइवरों को लगातार दो दिन की छुट्टी दे दी। अब इस कंपनी का अमरीका में सेफ़्टी रिकॉर्ड सबसे बेहतरीन है.

आठ घंटे की नींद

late night shift is a slow poison

रात में काम करने के नुकसान के सबूत बढ़ते जा रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही शरीर की जैविक घड़ी के बारे में हमारी समझदारी भी बढ़ती जा रही है।

वेलमक ट्रस्ट ने ऑक्सफ़ोर्ड के प्रोफ़ेसर रसेल फ़ोस्टर और उनकी टीम को एक नई खोज ‘स्लीप स्विच’ पर रिसर्च के लिए 30 लाख पाउंड (क़रीब 30 करोड़) दिए हैं।

वेल्पो (वेंट्रल लेटरल प्री-ऑप्टिक न्यूक्लीआई) हमारे तंत्रिका तंत्र को ऑन या ऑफ़ करता है. इसलिए एक ऐसी दवा बनने की संभावना बढ़ गई है जो रोशनी या अंधेरे के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया को कुंद कर देगी।

हम अक्सर इस बात के लिए चिंतित रहते हैं कि बिस्तर पर आधी रात तक नींद नहीं आती है- लेकिन ये आपके लिए अच्छा हो सकता है। विज्ञान और इतिहास से लगातार मिल रहे तथ्य बताते हैं कि आठ घंटे की नींद स्वाभाविक नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed