Joe Biden: हर 8 में से एक पुरुष को प्रोस्टेट कैंसर का खतरा, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन भी हो गए हैं शिकार
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन कैंसर से पीड़ित हैं। उन्हें पिछले कुछ समय से मूत्र संबंधी दिक्कतें हो रही थीं जिसके बाद पिछले सप्ताह डॉक्टरों ने जांच के दौरान प्रोस्टेट कैंसर का निदान किया। पुरुषों में ये कैंसर काफी ज्यादा देखा जाता रहा है।
विस्तार
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन कैंसर से पीड़ित हैं। रविवार (18 मई) को पूर्व राष्ट्रपति के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उनमें 'आक्रमक स्तर' के कैंसर का निदान किया गया है, उपचार के लिए डॉक्टरों की टीम के साथ चर्चा की जा रही है। उन्हें पिछले कुछ समय से मूत्र संबंधी दिक्कतें हो रही थीं जिसके बाद पिछले सप्ताह डॉक्टरों ने जांच के दौरान प्रोस्टेट से संबंधित समस्या का निदान किया। शुक्रवार को उनमें प्रोस्टेट कैंसर का पता चला, कैंसर कोशिकाएं हड्डियों तक फैल गई हैं।
फिलहाल की स्थिति को देखते हुए डॉक्टर्स ने बताया कि ये बीमारी का अधिक आक्रामक रूप है, लेकिन कैंसर हार्मोन-संवेदनशील प्रतीत होता है, जिसका मतलब है कि इसका प्रभावी रूप से इलाज किया जा सकता है। इस खबर के सामने आने के बाद से दुनियाभर के बड़े नेताओं ने पूर्व राष्ट्रपति के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।
गौरतलब है कि जो बाइडन के परिवार में पहले भी कैंसर के मामले देखे जाते रहे हैं। उनके बेटे ब्यू बाइडन (46 वर्ष) को भी कैंसर था, साल 2015 में उनकी मौत हो गई।
पुरुषों में बढ़े हैं प्रोस्टेट कैंसर के मामले
पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन को जिस प्रकार के कैंसर का पता चला है, उसके मामले पिछले एक दशक में काफी तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं।
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि प्रोस्टेट कैंसर का समय पर पता चलने पर इसकी गंभीरता से बचा जा सकता है, लेकिन यह पुरुषों में कैंसर से होने वाली मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण भी है। जिसका मतलब है कि ज्यादातर लोगों में इसका समय पर निदान नहीं हो पाता है, जिसके कारण कैंसर के गंभीर रूप लेने और जान जाने का जोखिम काफी बढ़ जाता है।
अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, हर आठ में से एक पुरुष को जीवनकाल में प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा रहता है।
प्रोस्टेट कैंसर होता क्या है?
प्रोस्टेट पुरुषों में प्रजनन प्रणाली का हिस्सा है। यह वीर्य के लिए तरल पदार्थ बनाता है। प्रोस्टेट ग्रंथि में विकसित होने वाला ये कैंसर आमतौर पर वृद्ध लोगों को प्रभावित करता है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में कम उम्र के लोगों में भी इसका खतरा बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी पुरुषों को इस गंभीर कैंसर के मामलों को लेकर अलर्ट रहना चाहिए।
मेयो क्लिनिक का एक रिपोर्ट् के अनुसार, प्रारंभिक अवस्था में प्रोस्टेट कैंसर में अक्सर कोई लक्षण नहीं होते।
- कैंसर बढ़ने की स्थिति में पेशाब करने में कठिनाई, बार-बार पेशाब आने, मूत्र या वीर्य में रक्त आना और स्तंभन दोष जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
- कैंसर की गंभीर स्थिति में इसके कारण हड्डियों में दर्द, वजन कम होने और अन्य हिस्सों में कैंसर फैलने लगता है जिसका उपचार कठिन हो सकता है।
कितनी खतरनाक है ये बीमारी?
जो बाइडन के कार्यालय की तरफ से साझा की गई जानकारियों के मुताबिक उनका कैंसर हड्डियों तक फैल गया है, जो इसे प्रारंभिक चरण के प्रोस्टेट कैंसर से अधिक गंभीर बनाता है।
मैसाचुसेट्स जनरल ब्रिघम कैंसर सेंटर के डॉ. मैथ्यू स्मिथ ने कहा कि हाल के दशकों में प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में काफी सुधार हुआ है। इलाज के माध्यम से मरीज चार-पांच साल या उससे अधिक समय तक जीवित रह सकते हैं। स्मिथ ने कहा- इसका इलाज तो किया जा सकता है पर इसे ठीक नहीं किया जा सकता।
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए उन दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है जो शरीर में हार्मोन के स्तर को नियंत्रित करती हैं और कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को धीमा करती हैं। ज्यादातर पुरुषों का इलाज दवाओं से किया जा सकता है हालांकि कुछ स्थितियों में रेडिएशन, सर्जरी और अन्य प्रकार के उपाचार का इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रोस्टेट कैंसर कैसे लगाएं? क्या तरीका है
हालिया अध्ययनों की रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि भारत में 50 साल से कम उम्र के पुरुषों में भी प्रोस्टेट कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी पुरुषों को इस गंभीर कैंसर के मामलों को लेकर अलर्ट रहना चाहिए। कुछ टेस्ट हैं जिसकी मदद से आप आसानी से पता कर सकते हैं कि कहीं आपको भी तो ये बीमारी नहीं है?
विशेषज्ञों की टीम ने इसके लिए एक नई खोज की है। मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक जल्द ही किट के माध्यम से घर पर ही स्लाइवा (लार) का परीक्षण करके प्रोस्टेट कैंसर का परीक्षण किया जा सकता है। कैंसर रिसर्च यूके में विशेषज्ञ नासर तुराबी कहते हैं, फिलहाल एग्रेसिव प्रकार के प्रोस्टेट कैंसर का पता लगाने के लिए कोई सटीक और पुख्ता तरीका नहीं है। यह अध्ययन हमें उन लोगों में बीमारी का जल्द पता लगाने में मदद कर सकता है जिनमें इसका खतरा अधिक होता है। यहां पढ़िए पूरी रिपोर्ट
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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