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डर और घबराहट से नहीं, समय पर जांच और इलाज से ठीक होगा कोरोना, जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर?
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कोरोना के लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी डॉक्टर को जरूर दिखाएं, डरे नहीं : डॉक्टर विशाल सिंह बघेल
- फोटो : अमर उजाला
भारत में कोरोना महामारी से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या भले ही दुनिया की तुलना में ज्यादा हो, लेकिन यह महामारी आज भी पहले से ही गंभीर बीमारियों से जूझ रहे रोगियों और बुजुर्गों के लिए जानलेवा बनी हुई है। डायबिटीज, हार्ट पेशेंट, लिवर, किडनी, ब्लड प्रेशर, थॉयराइड जैसी बीमारी के रोगियों के लिए कोविड-19 का संक्रमण भीषण है।
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आंकड़े बताते हैं कि कोरोना उम्र दराज और पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए प्राणघातक सिद्ध हुआ है। डायबिटीज और हार्ट पेशेंट के लिए मुश्किलेंं खड़ा करता है।
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जहां तक डायबिटीज की बात है, चीन में दुनिया के सबसे ज्यादा शुगर पेशेंट हैं जबकि इस मामले में दूसरे नंबर पर भारत है और आने वाले समय में भारत शुगर मरीजों की संख्या में पहले स्थान पर होगा। चिंता की बात यह है कि कोरोना, शुगर के मरीजों के लिए ही ज्यादा जानलेवा बना हुआ है।
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कोरोना को लेकर जारी सतर्कता व जागरूकता अभियानों के बीच डायबिटिक और हार्ट पेशेंट को किस तरह अपना ध्यान रखना चाहिए और कैसे कोरोना से बचना चाहिए, इसे लेकर अमर उजाला ने डायबिटोलॉजिस्ट और हार्ट से जुड़ी बीमारियों के विशेषज्ञ डॉक्टर विशाल सिंह बघेल से विस्तार से बातचीत की।
महाराष्ट्र के अकोला से एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने वाले डॉक्टर विशाल दिल्ली के गंगाराम हॉस्पिटल में रजिस्ट्रार रह चुके हैं और कई शहरों में प्रैक्टिस कर चुके हैं। डायबिटीज को लेकर वे लगातार रिसर्च में संलग्न हैं और उनके कई इंटरनेशनल मैगजींस में तकरीबन 22 रिसर्च पेपर्स पब्लिश हैं। ग्रामीण परिवेश में उन्होंने मधुमेह जैसी बीमारियों को लेकर जागरूकता अभियान, निशुल्क शिविर भी आयोजित किए हैं।
डॉक्टर विशाल इस समय मध्य प्रदेश केे हरदा जिले के ग्रामीण इलाकों में डायबिटीज को लेकर जागरूकता अभियान चला रहे हैं। समाज सेवा में लगातार संलग्न रहने के चलते 2018 में उन्हें उत्कृष्ट सेवा पुरस्कार भी मिला है। आइए जानते हैं कोरोना महामारी और डायबिटीज, हार्ट पेशेंट को लेकर डॉक्टर विशाल से कुछ खास सवालों के जवाब।
सवाल: कोरोना को लेकर हम कितना भयभीत हों? खासकर तब जबकि रिकवरी रेट के बड़े-बड़े दावे हैं और दूसरी ओर मौत के आंकड़े भी हैं। हम इस महामारी से किस मानसिक स्थिति से लड़ें?
जवाब: देखिए मुझे कहते हुए दुख हो रहा है, लेकिन बीमारी से ज्यादा उसका डर खतरनाक है। कोरोना की आहट में बिना जानकारी के जागरूकता से ज्यादा डर फैला और यह इतना घातक था कि लोग प्रति पलायन कर गए। डर के चलते शहरों से गांव लौटे और बीच में अकाल मृत्यु का निवाला बन गए।
इधर जानकारी न होने से कोरोना काल में डर का फायदा हेल्थ माफियाओं ने भी उठाया। लाखों के बिल डर के कारण ही बनाए गए, महंगी दवाओं का बिना रिसर्च प्रयोग किया गया और बाद में WHO जैसी संस्थाओं ने इनके उपयोग से ही इंकार कर दिया। महानगरों मेंं तो कई जगह में रोगी की मजबूरी का फायदा भी उठाया गया जो कि अच्छा नहीं था और दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि यह आज भी है।
बहरहाल, कोरोना से डरने की बजाय जरूरी है सावधानी। कोई भी बीमारी जिसके बारे में मेडिकल साइंस को जानकारी नहीं है उसका सीधा सा इलाज है बचाव। बीमारी के संक्रमण के कारणों को जानना, गाइड लाइंस को फॉलो करना और अलर्ट रहना।
मार्च में लॉकडाउन के कारण सावधानी, जागरूकता के बीच भय का प्रचार भी हुआ। सच कहूं तो कोरोना में सबसे बड़ी जरूरत है सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनना, सेनिटाइज करना और भीड़-भाड़ वाली जगहों से खुदको दूर रखना, यही इस बीमारी से बचने का तरीका है।
अब मान लीजिए आपको कोरोना हो जाए तो घबराना नहीं है क्योंकि ऐसा बिल्कुल नहीं है कि आपको कोरोना हुआ तो आपकी मृत्यु हो जाएगी। नहीं, ऐसा नहीं है क्योंकि इस बीमारी से डेथ रेट कम है।
आंकड़े बताते हैं कि यदि 1 हजार लोगों को कोरोना हुआ है तो 40 लोगों को हॉस्पिटल की जरूरत होती है और उसमें से भी मृत्यु केवल 2 लोगों की होती है और इसकी संभावना भी उन लोगों के साथ जिनकी उम्र ज्यादा है या जो पहले से ही कोई गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं या जिनकी इम्यूनिटी कम है। फिर एक बात और, मौत उनकी होती है जो समय पर इलाज नहीं लेते हैं।
फिर आप जो जवान लोगों की मृत्यु के आंकड़े देख रहे हैं वह उन लोगों के हैं जिन्होंने समय पर इलाज नहीं लिया और लापरवाही बरती। जवान लोग समय पर इलाज नहीं लेते या उन्हें ट्रीटमेंट नहीं मिल पाता तो फिर कोविड प्राण घातक सिद्ध होता है।
आप समझिए कि कोरोना से मृत्यु दर उतनी ही है जितनी की मलेरिया डेंगू में। कोरोना से मौत की बड़ी वजह है लोग अपनी जांच ही कराने नहीं जाते, जिससे फेफड़े का संक्रमण बढ़ जाता है और जब तक मरीज अस्पताल पहुंचता है स्थिति नियंत्रण से बाहर होती है।
सवाल: सर्दी का मौसम है, हार्ट, बीपी और डायबिटीज के रोगियों को खतरा क्यों है? इन्हें क्या सावधान बरतनी चाहिए।
जवाब: जो हार्ट, बीपी, और डायबिटीज जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं उनकी इम्यूनिटी कम है, लिहाजा उन्हें कोरोना से खतरा ज्यादा है। अब चूंकि सर्दी आ रही है ऐसे में इस वायरस के फैलने की संभावना ज्यादा होगी ऐसा कई रिसर्च भी बता रही हैं। सवाल फिर वहीं है कि जब तक उपचार नहीं है तब तक बचाव ही रास्ता है।
बुजुर्ग लोग और बीपी, हार्ट व डायबिटीज के रोगी मास्क लगाएं, सोशल डिस्टेंसिंग अपनाएं और बेहतर होगा कि घर से बाहर ही ना निकलें। आप यदि डायबिटिक हैं या बीपी के पेशेंट हैं तो आपको शुगर और ब्लड प्रेशर दोनों ही नियंत्रण में रखना है, ऐसे ही हार्ट की बीमारियां हैं तो दवा लीजिए और फिट रहने की कोशिश कीजिए। दरअसल, जैसे कोरोना के लक्षण महसूस हों आप सीधे जांच कराइए और समय पर इलाज लीजिए।
सवाल: सामान्य सर्दी-खांसी, बुखार और कई बार कफ व एलर्जी के कारण भी सांस लेने में दिक्कतें होती हैं, ऐसे में आपको कोरोना है या नहीं इसका अंतर कैसे करें?
जवाब: देखिए आपको जरा भी सर्दी-खांसी या बुखार हो तो घर पर इलाज ना करें क्योंकि ऐसी कोई भी चीज नहीं आई है जो नॉर्मल सर्दी-खांसी बुखार और कोरोना के लक्षण में अंतर कर सके। तरीका केेेवल एक है वह हैै टेेेेस्ट।
आपको यदि ऐसे कोई भी लक्षण हों तो आप सीधे अपने नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें क्योंकि डॉक्टर ही बताएगा कि आपको कोरोना की जांच की जरूरत है या नहीं।
दरअसल, यह महामारी का समय है और यदि आपको उस महामारी से मिलते-जुलते ही लक्षण होंगे तो फिर रिस्क क्यों लेना? यह तो मूर्खता होगी।
आपको सामान्य बुखार, खांसी, सर्दी और बुखार व सांस लेने में दिक्कत भी होती है तो आप सबसे पहला काम करें कि खुदको आइसोलेट करें और नजदीकी मान्यता प्राप्त डॉक्टर को दिखाएं।
डॉक्टर को यह निर्णय लेने दें कि आपको कोरोना की जांच करवाना है या नहीं, मन से इलाज ना करें।
सर्दी, खांसी और बुखार हो तो घबराएं नहीं। डर और घबराना किसी बीमारी का इलाज नहीं है बल्कि सही डॉक्टर से सही दवा लेना ही एकमात्र समाधान है। इस बात का ध्यान का रखें कि कोरोना के लक्षण बहुत अलग-अलग हैं।
सवाल: कोरोना की दूसरी लहर की बात की जा रही है उससे भारत को कितना खतरा है?
जवाब: कोरोना खत्म नहीं हुआ है। दूसरी लहर तो है और यह बढ़ेगी, लेकिन यह हम सब पर निर्भर करता है कि इसे कितना बढ़ने दिया जाए। मास्क पहनना, रेगुलर हाथ धोना और सोशल डिस्टेंसिंग ही इलाज है।
भारत में होगा यह कि अब लोगों में पैनिक बढ़ेगा और लोग ज्यादा से ज्यादा टेस्ट करवाएंगे और ऐसे में पॉजिटिव ज्यादा केसेस दिखेंगे, लेकिन यह उस रूप में खतरनाक नहीं होगा जैसे दूसरे देशों में हुआ है।
सर्दी में संक्रमण बढ़ेगा और ऐसे में यदि आप मानसिक रूप से फ्री होकर घूम रहे हैं कि भई कोरोना अब गया तो यह आपकी मूर्खता है। नहीं ऐसा नहीं है। आप युवा हैं और जवानी के जोश में ऐसा सोच रहे हैं तो थोड़ा समझदार बनें क्योंकि आप तो आप बच जाएंगे, लेकिन घर में बुजुर्गों को खतरे में डाल देंगे।
सवाल: पोस्ट कोविड के बाद कैसी सावधानी बरतें? लंबे समय तक कमजोरी रहती है और भीतरी अंगों को भी नुकसान पहुंचता है ऐसे में कोरोना से ठीक होने के बाद किन चीजों का ध्यान रखें?
जवाब: देखिए स्वस्थ व्यक्तियों को कोरोना होता है तो वह जल्द ही ठीक हो जाता है और बाद मेें भी उनमें कोई दिक्कत नहीं दिखी है, हां लेकिन जो लोग पहले से ही बीमार हैं, उनमें संक्रमण से ठीक होने के बाद भी समस्याएं दिखी हैं।
एक बात कहूंगा सबसे अच्छा उपाय है बचाव, जिस बीमारी के बारे में हम नहीं जानते हैं उसके प्रभावों पर भी हमारा नियंत्रण नहीं है। पोस्ट कोविड को लेकर रोज की खबरें हैं, किसी की कमजोरी दूर नहीं हो रही है, लिवर में दिक्क्त है, किसी को फेफड़ों में, कोई डिप्रेशन का शिकार हो रहा है, ऐसे में कुछ कहा नहीं जा सकता।
फिर लॉन्ग कोविड लक्षण उन्हीं को होते हैं जिनके फेफड़ों को ज्यादा नुकसान पहुंचा है। ऐसे लोगों को लंबे समय तक ऑक्सीजन की जरूरत होती है। लॉन्ग कोविड वालों को रिकवर होने में बहुत समय लगता है।
सवाल: यदि आपको कोरोना हो जाता है तो किन बातों का ध्यान रखें। खासतौर पर जब होम क्वारंटीन हैं।
जवाब: यदि आपको कोरोना के लक्षण हों तो सबसे पहले डॉक्टर से जांच कराएं, खुदको आइसोलेट करें और घबराएं नहीं। डॉक्टर की गाइड लाइन को फॉलो करें। गर्म पानी पिएं, शराब, सिगरेट का सेवन बिल्कुल ना करें। सबसे जरूरी है अपने आहार को संतुलित करें और ज्यादा तेल, मसालेदार खाना ना खाएं।
होम क्वारंटीन हुए हैं तो रोजाना एक्सरसाइज करें, सांस संबंधी एक्सरसाइज यानी की प्राणायाम करें, फल-हरी सब्जियां खाएं और सबसे जरूरी है ठीक से नींद लें व ज्यादा से ज्यादा आराम करें।
एक चीज और, आप पल्स ऑक्सीमीटर खरीद लें और अपने डॉक्टर से सलाह लेकर अपने ऑक्सीजन स्तर पर नजर बनाएं रखें। यदि ऑक्सीजन की मात्रा में कमी है तो हॉस्पिटल जाएं।
एक बात सबसे जरूरी, ज्यादा सोचें नहीं यह जो सोचना है वही घबराहट पैदा करता है और ऑक्सीजन के स्तर को गड़बड़ करता है। सकारात्मक बनें रहें कि मैं जल्दी ही इस बीमारी को मात दे दूंगा।
यकीनन यह बेहद कारगर तरीका भी है।