IND vs PAK: विपरीत परिस्थिति के लिए हम कितने तैयार? ब्लड बैंक की क्षमता बढ़ाने के निर्देश, आप भी करें रक्तदान
देश में हर साल 14.6 मिलियन यूनिट की मांग होती है, लेकिन केवल 10 मिलियन यूनिट ही एकत्रित हो पाती है। यह कमी कम रक्तदान करने तथा भंडारण और वितरण के लिए अपर्याप्त बुनियादी ढांचे जैसे कारकों के कारण और भी बढ़ जाती है।
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पिछले कुछ दिनों से भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है, इसने लोगों के मन में कई सारे सवाल खड़े कर दिए हैं। 10 मई (शनिवार) को अमेरिका की मध्यस्थता के बाद दोनों देश सीजफायर के लिए तैयार तो हो गए थे, हालांकि इस घोषणा के कुछ हुए घंटे बाद पाकिस्तान ने फिर से सीजफायर का उल्लंघन करके गोलीबारी शुरू कर दी। इस तरह के हालात को देखते हुए आप भी ये सोच रहे होंगे कि क्या हम युद्ध की तरफ बढ़ रहे हैं?
फिलहाल ये निर्णय सरकार और सेना पर छोड़ देते हैं। पर अगर इस तरह की स्थिति बनती है तो उसके लिए पहले से तैयारी करने की भी जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से अस्पतालों की तैयारी, चिकित्सा संसाधानों की उपलब्धता और एंबुलेंसो की तैनाती की जानकारी ली। किसी भी आपातकालीन स्थिति को लेकर आईसीयू, जनरल बेड की उपलब्धता के साथ अस्पतालों को तैयार रखने की बात कही गई थी।
इसके अतिरिक्त तैयारी के रूप में अस्पतालों को ब्लड बैंक की क्षमता बढ़ाने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं।
देश में आवश्यक रक्त की कमी
गौरतलब है कि भारत लंबे समय से आपातकालीन स्थिति में आवश्यक रक्त की कमी से जूझ रहा है। देश में हर साल 14.6 मिलियन यूनिट की मांग होती है, लेकिन केवल 10 मिलियन यूनिट ही एकत्रित हो पाती है। यह कमी कम रक्तदान करने तथा भंडारण और वितरण के लिए अपर्याप्त बुनियादी ढांचे जैसे कारकों के कारण और भी बढ़ जाती है।
इसके चलते उपचार में देरी हो सकती है और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है। कुछ अनुमानों के अनुसार रक्त की कमी के चलते प्रतिदिन 12,000 तक रोके जा सकने वाली मौतें हो जाती हैं।
ब्लड बैंक की क्षमता बढ़ाने के निर्देश
इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए भारत पाक के तनाव के बीच अस्पतालों, ब्लड बैंक और स्वास्थ्य केंद्रों को 20 प्रतिशत क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इसको लेकर शनिवार को आईएमए भवन में आपदा प्रबंधन के नोडल प्रभारी के साथ अधिकारियों की मीटिंग हुई। इसमें सभी अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्र आक्सीजन प्लांट को चालू करा लें और ब्लड बैंक में खून की उपलब्ध सुनिश्चित कराएं।
खासतौर पर रेयर ब्लड ग्रुप की उपलब्धता भी सुनिश्चित करें। इसके लिए प्रभारी विभिन्न केंद्रों पर शिविर लगाएं, रेयर ब्लड ग्रुप की लिस्ट तैयार करें, ताकि जरूरत पड़ने पर संपर्क किया जा सके।
कौन कर सकता है रक्तदान?
रक्तदान को महादान कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को आगे आकर रक्तदान करना चाहिए। ये न सिर्फ देश की सेवा में आपकी तरफ से मदद है, बल्कि आपके खुद की सेहत के लिए भी बहुत लाभकारी कदम है।
18 वर्ष या उससे अधिक और 60 वर्ष से कम आयु वाले स्वस्थ व्यक्ति स्वेच्छा से रक्तदान कर सकते हैं।
- रक्तदाता का वजन कम से कम 50 किलोग्राम होना चाहिए
- वह मधुमेह या रक्तचाप जैसी समस्याओं का रोगी नहीं होना चाहिए।
- एक बार रक्तदान करने के 56 दिनों बाद दूसरा रक्तदान किया जा सकता है।
- सबसे खास बात रक्तदान करने से न तो कमजोरी आती है और न ही इससे सेहत को कोई नुकसान होता है।
रक्तदान करने के कई सारे लाभ
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, रक्तदान करने के बाद आपको आत्मसंतुष्टि का एहसास होता है जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। शरीर में रक्त निर्माण की प्रक्रिया सतत चलती रहती है, ऐसे में रक्तदान करने से शरीर में खून की कमी नहीं होती है। रक्तदान को विशेषज्ञ पूरी तरह से स्वस्थ प्रक्रिया मानते हैं।
मेंटल हेल्थ फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार इस एक आदत से तनाव कम हो सकता है। रक्तदान, दूसरों की मदद करने का तरीका है, जो आपकी भावनात्मक सेहत में सुधार करता है। नियमित रक्तदान से नकारात्मक भावनाओं से भी छुटकारा मिलती है।
ब्लड प्रेशर-हृदय के लिए फायदेमंद
वहीं न्यूयॉर्क स्थित वेल कॉर्नेल मेडिकल सेंटर में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के निदेशक डॉ. रॉबर्ट डेसिमोन बताते हैं, रक्तदान करने से पहले आपकी शारीरिक जांच की जाती है, जिससे पता चल जाता है कि आप पहले से किसी समस्या के शिकार हैं या नहीं? यह निश्चित रूप से हृदय संबंधी जोखिम कारकों को कम करने में मदद करता है।
नियमित रक्तदान से रक्तचाप कम होता है। रक्त के गाढ़ापन को कम करने में भी इससे लाभ मिलता है। ये हृदय को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।