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संक्रमण ठीक होने के बाद बढे़ दिल के रोग, 100 मरीजों पर किए अध्ययन में खुलासा

Sat, 01 Aug 2020 10:57 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली।
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sat, 01 Aug 2020 10:57 AM IST
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Heart disease increases after infection is cured, scientists reveal in a study done on 100 patients
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
  • केस एक: भारतीय मूल के 44 वर्षीय नागरिक की 8 जून को हृदय संबंधी तकलीफ के बाद सिंगापुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसी दिन उसकी मौत हो गई। 10 जून को उसमें कोरोना वायरस की पुष्टि हुई।
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    • केस एक: भारतीय मूल के 44 वर्षीय नागरिक की 8 जून को हृदय संबंधी तकलीफ के बाद सिंगापुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसी दिन उसकी मौत हो गई। 10 जून को उसमें कोरोना वायरस की पुष्टि हुई।
    • केस दो : कर्नाटक के विजयपुरा में 42 वर्षीय एक ड्राइवर की हार्ट अटैक से मौत हो गई। उसके संपर्क में रहने वाले दो लोग संक्रमित हुए थे। दो दिन बाद उसकी रिपोर्ट आई तो उसमें भी कोरोना की पुष्टि हुई थी।

    कोरोना वायरस फेफड़ों का ही नहीं दिल का भी दुश्मन है। संक्रमण से ठीक हुए लोगों को फेफडों के रोगों से तो निजात मिल जा रही है लेकिन उसके बाद वे दिल की बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। कोरोना संक्रमित मरीजों या ठीक हो चुके लोगों की अचानक हार्ट अटैक से मौत हो रही है। जर्मनी के वैज्ञानिकों ने दो अध्ययनों के आधार पर हैरान करने वाला खुलासा किया है।

    एमआरआई जांच में 78 मरीजों का हृदय क्षतिग्रस्त दिखा
    जर्मनी के यूनिवर्सिटी ऑफ फ्रैंकफर्ट के शोधकर्ताओं के अध्ययन में 50 मरीज ऐसे थे जिन्हें संक्रमण से पहले कोई स्वास्थ्य संबंधी तकलीफ नहीं थी। बाकी 50 मरीजों को हृदय संबंधी कोई न कोई तकलीफ थी। मरीजों के हृदय की एमआरआई जांच हुई तो 78 मरीजों का हृदय क्षतिग्रस्त मिला और 60 के हृदय में सूजन दिखी। 76 फीसदी से अधिक मरीजों में ट्रोपोनिन प्रोटीन की मात्रा अधिक थी। ऐसा उन मरीजों में देखने को मिलता है, जिन्हें हार्ट अटैक आता है।

    मरीज की मौत तक हृदय में संख्या बढ़ाता रहा वायरस

    जर्मनी के हैमबर्ग स्थित यूनिवर्सिटी हार्ट एंड वैस्कुलर सेंटर के शोधकर्ताओं ने कोरोना से मरे 39 मरीजों के हृदय के ऊतकों का अध्ययन किया। 39 में से 35 लोगों की मौत की वजह निमोनिया था। वैज्ञानिकों ने पाया कि हृदय अधिक संक्रमित नहीं था और न ही क्षतिग्रस्त था। फिर भी 24 मरीजों के हृदय के ऊतकों में वायरस मिला। 16 मृतकों के हृदय में वायरस की अधिक संख्या मिली।

    युवाओं में भी हृदय संबंधी तकलीफ
    दोनों शोधों के परिणाम पर वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन युवाओं को बीपी की समस्या नहीं है, उनमें भी संक्रमण के बाद हृदय संबंधी तकलीफ दिख रही है। कोरोना सीधे दिल पर हमला बोल रहा है, पर अभी ये कहा जा सकता है कि पहले की तुलना में वायरस हृदय को अधिक प्रभावित या क्षतिग्रस्त कर रहा है।

    महामारी के बाद का समय भी घातक होगा
    कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. ग्रेग फोनारो के मुताबिक, ये स्पष्ट हो गया है कि वायरस हृदय को शिकार बना रहा है। हृदय और उससे जुड़ी कोशिकाओं और ऊतकों को नुकसान से साफ है कि महामारी के बाद का समय और घातक होगा। ठीक हो चुके मरीजों को सावधान रहना होगा।
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