Diabetes: भारत में डायबिटीज को लेकर अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा, हर पांच में से दो लोग अपनी बीमारी से अनजान
- द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन की रिपोर्ट बताती है कि साल 2019 में 45 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग पांचवें हिस्से के लोग डायबिटीज का शिकार थे।
- इतना ही नहीं हर पांच में से दो लोगों को संभवतः अपनी स्थिति के बारे में पता भी नहीं होता है जो इस रोग के संबंध में और भी गंभीर और चिंताजनक स्थिति है।
विस्तार
Diabetes In India: डायबिटीज दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर बीमारी है जिसका जोखिम साल-दर-साल बढ़ता ही जा रहा है। कुछ दशकों पहले तक इसे उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी के तौर पर देखा जा रहा था हालांकि अब कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। भारतीय आबादी में भी ये खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर)- इंडियाबी की रिपोर्ट के अनुसार साल 2023 में भारत में डायबिटीज से पीड़ित लोगों की संख्या 10.1 करोड़ थी।
इंटरनेशनल डायबिटीज फाउंडेशन की रिपोर्ट का अनुमान है कि साल 2050 तक ये आंकड़ा बढ़कर 15.6 करोड़ से अधिक हो सकता है। मधुमेह रोगियों की बढ़ती संख्या स्वास्थ्य सेवा संसाधनों पर दबाव डालेगी जिसको देखते हुए इस बीमारी के प्रबंधन और रोकथाम के लिए व्यापक प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
भारत में डायबिटीज के बढ़ते मामलों को लेकर किए गए एक हालिया अध्ययन में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कई चौंकाने वाले डेटा पेश किए हैं। द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन की रिपोर्ट बताती है कि साल 2019 में 45 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग पांचवें हिस्से के लोग डायबिटीज का शिकार थे। इतना ही नहीं हर पांच में से दो लोगों को संभवतः अपनी बीमारी के बारे में पता भी नहीं होता है जो इस रोग के संबंध में और भी गंभीर और चिंताजनक स्थिति है।
भारत में डायबिटीज और इसका बढ़ता खतरा
अध्ययन की ये रिपोर्ट इसलिए जरूरी और चिंताजनक है क्योंकि विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे देश की आबादी बूढ़ी होगी, मध्यम आयु वर्ग और वृद्ध लोगों में मधुमेह के मामले और भी बढ़ेंगे। उम्र बढ़ने के साथ इसके लक्षण और गंभीरता भी अधिक होने की आशंका है, जिसके कारण न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दवाब बढ़ेगा, बल्कि इसके कारण बड़ा संख्या में लोगों को गंभीर समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।
डायबिटीज और इसके कारण होने वाली जटिलताएं
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज मुंबई और अमेरिका के शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को अपनी मधुमेह की स्थिति की जानकारी थी उसमें से 46 प्रतिशत लोगों ने दवाओं और अन्य सहायक उपचार के माध्यम से ब्लड शुगर के स्तर को काफी कंट्रोल कर लिया। इसी तरह लगभग 60 प्रतिशत ने रक्तचाप को नियंत्रित करने में सफलता पाई।
ये देखते हुए आवश्यक है कि समय रहते लोगों को अपनी स्वास्थ्य समस्या की जानकारी हो जाए, जिससे उसका प्रबंधन सही तरीके से किया जा सके। टीम ने बताया कि छह प्रतिशत लोग हृदय रोग के जोखिम को कम करने के लिए लिपिड कम करने वाली दवा ले रहे थे।
शहरी आबादी में खतरा और भी अधिक
ये अध्ययन साल 2017-2019 के दौरान 45 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग 60,000 वयस्कों पर किया गया। इसमें स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि मेटाबॉलिज्म संबंधी इस बीमारी का प्रसार पुरुषों और महिलाओं में समान था (लगभग 20 प्रतिशत)। ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी इलाकों में डायबिटीज के मामले दोगुना देखे गए।
इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने पाया कि आर्थिक रूप से अधिक विकसित राज्यों में मधुमेह का प्रसार भी अधिक था। यहां लगभग एक तिहाई या उससे अधिक लोगों में मधुमेह की समस्या थी।
क्या कहते हैं अध्ययन के लेखक?
लेखकों के निष्कर्ष उस धारणा का समर्थन करते हैं कि भारतीय आबादी में पोषण का स्तर उस चरण में बना हुआ है जहां से मधुमेह का प्रसार अधिक हो सकता है। टीम ने कहा कि वृद्धावस्था वाले आयु समूहों में मधुमेह के अधिक प्रसार को दर्शाने वाले परिणाम महत्वपूर्ण हैं क्योंकि देश की जनसंख्या तेजी से वृद्ध हो रही है। इससे आने वाले वर्षों में देश में डायबिटीज के मामलों में और भी वृद्धि आने की आशंका है।
आने वाले वर्षों में, मधुमेह से पीड़ित मध्यम आयु वर्ग और वृद्ध वयस्कों की कुल संख्या बढ़ सकती है, जिसको लेकर स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। चूंकि डायबिटीज केवल ब्लड शुगर लेवल बढ़े रहने की समस्या नहीं है, इसका असर शरीर के कई अन्य अंगों पर भी पड़ता है इसलिए खतरा और भी अधिक हो सकता है जिसको लेकर अलर्ट रहना जरूरी है।
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स्रोत
Global, regional, and national burden of diabetes from 1990 to 2021, with projections of prevalence to 2050: a systematic analysis for the Global Burden of Disease Study 2021
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