दुनिया के कई देश कोरोना महामारी से लड़ने और उससे निजात पाने के लिए वैक्सीन बनाने में जुटे हुए हैं। इनमें भारत से लेकर अमेरिका, रूस, चीन और ब्रिटेन जैसे प्रमुख देश शामिल हैं। इस कड़ी में अब कनाडा भी जुड़ गया है। उसने भी वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल (चिकित्सीय परीक्षण) शुरू कर दिया है। हालांकि उसका वैक्सीन बनाने का तरीका थोड़ा अलग है। वह पौधा आधारित वैक्सीन बना रहा है और इसे बनाने की जिम्मेदारी बायोफार्मास्यूटिकल कंपनी मेडिकैगो की है। आइए जानते हैं यह वैक्सीन कब तक बन जाएगी और बाजार में उपलब्ध होगी?
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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मेडिकैगो के उपाध्यक्ष ने हाल ही में यह जानकारी देते हुए बताया कि 'कोरोना वैक्सीन बनाने का काम पहले चरण में पहुंच गया है। हम अक्तूबर में सुरक्षा और इम्युनोजेनेसिटी परिणामों को जानने के लिए उत्सुक हैं।' उन्होंने कहा कि अब पहले चरण में 180 स्वस्थ स्वयंसेवकों को वैक्सीन की खुराक दी जाएगी और उनपर उसका असर देखा जाएगा। इसमें 18 से 55 साल की महिलाएं और पुरुषों को शामिल किया जाएगा।
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कंपनी ने आगे बताया कि अक्तूबर में इस वैक्सीन के दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण किया जाएगा। अगर सबकुछ ठीक रहा तो 2021 के अंत तक हम वैक्सीन की 10 करोड़ खुराक बनाने का प्रयास करेंगे। आपको बता दें कि कंपनी ने मार्च महीने में ही वैक्सीन विकसित कर लेने का दावा किया था। उसका कहना था कि कंपनी ने यह वैक्सीन महज 20 दिनों के अंदर बना ली थी।
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मेडिकैगो के शोधकर्ताओं के मुताबिक, उन्होंने इस वैक्सीन को विकसित करने के लिए चिकन अंडे के बजाय पौधों का इस्तेमाल किया है। दरअसल, आमतौर पर चिकन अंडे का इस्तेमाल जैविक प्रोटीन के रूप में किया जाता है ताकि वैक्सीन प्रोटीन विकसित किया जा सके। इसमें अंडे को इंजेक्ट किया जाता है और फिर परीक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है। हालांकि इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है और यह महंगा भी होता है, लेकिन पौधा आधारित वैक्सीन काफी सस्ते में हो जाता है और यह प्रभावी भी होता है।
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सांकेतिक तस्वीर
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेडिकैगो, लगभग दो दशकों से पौधा आधारित टीकों का निर्माण और विकास कर रहा है। वर्तमान में कंपनी टीकों को विकसित करने के लिए तंबाकू जैसे पौधों का इस्तेमाल कर रही है।