फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Coronavirus vaccine: कैसे बन रही है कोरोना की वैक्सीन, क्या-क्या करते हैं वैज्ञानिक? जानिए सबकुछ

Wed, 15 Jul 2020 05:14 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Wed, 15 Jul 2020 05:14 PM IST
विज्ञापन
Coronavirus vaccine Process of making vaccines Development Testing and approval
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala

कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता ही जा रहा है। यह अब तक दुनिया के 188 देशों में फैल चुका है। इस जानलेवा बीमारी की चपेट में अब तक एक करोड़ से भी ज्यादा लोग आ चुके हैं जबकि पांच लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसके रोकथाम के लिए वैक्सीन बनाने का काम लगातार जारी है, लेकिन अब तक इसमें पूरी तरह से सफलता नहीं मिल पाई है। कई देशों के वैक्सीन तीसरे चरण में हैं तो कई अभी बनाने ही शुरुआत ही कर रहे हैं। ऐसे में एक सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर कोरोना की वैक्सीन बन कैसे रही है कि इसमें इतना समय लग रहा है? आखिर वैक्सीन बनाने के लिए वैज्ञानिक क्या-क्या करते हैं? आइए इन सभी सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं... 

Coronavirus vaccine Process of making vaccines Development Testing and approval
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media

किसी भी बीमारी के लिए वैक्सीन बनाने की शुरुआत वैज्ञानिक जानवरों से करते हैं। वैज्ञानिक चूहों या बंदरों जैसे जानवरों को पहले वैक्सीन देते हैं, यह देखने के लिए कि क्या यह प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा करता है। इसमें सफल होने के बाद आगे का काम शुरू होता है, जिसे 'फेज-1 सेफ्टी ट्रायल्स' कहते हैं यानी वैक्सीन बनाने के पहले चरण की शुरुआत।  

Coronavirus vaccine Process of making vaccines Development Testing and approval
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay

वैक्सीन बनाने के पहले चरण में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ लोगों के समूह को कम मात्रा में वैक्सीन की खुराक दी जाती है और उसके बाद उसके प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की जांच की जाती है। इसमें कई दिन या महीना लग सकता है। इसमें सबसे ध्यान देने वाली बात ये है कि परीक्षण के लिए अक्सर 18 से 55 साल तक के व्यक्तियों को ही चुना जाता है और साथ ही यह भी देखा जाता है कि वो किसी बीमारी से पीड़ित न हों।  

विज्ञापन
विज्ञापन
Coronavirus vaccine Process of making vaccines Development Testing and approval
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media

फिर दूसरे चरण में वैज्ञानिक 100 लोगों के समूह को वैक्सीन की खुराक देते हैं, जिसमें बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हो सकते हैं। ऐसा यह देखने के लिए किया जाता है कि कहीं वैक्सीन का असर उनमें अलग-अलग तो नहीं हो रहा। साथ ही वैक्सीन देने के बाद नियमित तौर पर उनकी जांच की जाती है कि क्या यह प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा करता है या नहीं। 

विज्ञापन
Coronavirus vaccine Process of making vaccines Development Testing and approval
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

तीसरे और आखिरी चरण में वैज्ञानिक हजारों लोगों को वैक्सीन देते हैं और इंतजार करते हैं कि यह देखने के लिए कि उनमें से कोई संक्रमित होता है या नहीं। फिर उनकी तुलना उन स्वयंसेवकों से की जाती है, जिन्हें प्लेसेबो मिला था। यही परीक्षण निर्धारित करते हैं कि टीका वायरस से बचाता है या नहीं। सबसे अंत में होने वाले इस परीक्षण 'ह्यूमन ट्रायल' भी कहते हैं यानी मानव परीक्षण। अगर सबकुछ ठीक रहा तो यह एलान कर दिया जाता है कि वैक्सीन का सफलतापूर्वक परीक्षण हो चुका है। 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed