कोरोना वायरस से संक्रमण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अब तक दुनियाभर में इससे दो करोड़ 64 लाख से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि मरने वाली संख्या भी आठ लाख 71 हजार से ऊपर हो चुकी है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि जब तक इसके लिए वैक्सीन नहीं आ जाती है, तब तक संक्रमण और उससे मौत के मामले बढ़ते ही रहेंगे। हाल ही में एक रिपोर्ट आई थी कि सर्दियों में कोरोना वायरस और भी ज्यादा कहर बरपाएगा। चूंकि संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले अमेरिका में देखने को मिल रहे हैं, ऐसे में एक चौंकाने वाली रिपोर्ट भी वहीं से आ रही है। एक अनुमान में कहा गया है कि आने वाले समय में दिसंबर महीने में अमेरिका में हर रोज तीन हजार से अधिक मौतें हो सकती हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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अमेरिका की वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के स्वास्थ्य संस्थान के एक पूर्वानुमान के मुताबिक, इस देश में कोरोना वायरस के कारण होने वाली मौतों की संख्या साल के अंत तक चार लाख के ऊपर पहुंच सकती है। यह संख्या अमेरिका में मौजूदा मृतकों की संख्या के दोगुने से भी अधिक है और दिसंबर आने में अभी तीन महीने से भी कम का समय बचा है। इस हिसाब से अगर देखें तो इतने दिनों में दो लाख से भी अधिक लोगों की मौतें होंगी और यह आंकड़ा बेहद ही डराने वाला है।
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)
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अमेरिका में फिलहाल औसतन हर रोज 850 लोगों की जान कोरोना वायरस संक्रमण के कारण जा रही है। आपको बता दें कि दुनिया में कोरोना के सबसे अधिक मामले अमेरिका में ही हैं। यहां संक्रमण के मामले 61 लाख 87 हजार से अधिक हैं जबकि अब तक इस वायरस से यहां एक लाख 87 हजार लोगों की मौत हो चुकी है।
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व्हाइट हाउस, अमेरिका
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अमेरिका में कैसे निकाली जाती है मृत्युदर?
मौजूदा समय में अमेरिका में आईएचएमई मॉडल से मृत्युदर निकाली जाती है। इस मॉडल को अमेरिकी राष्ट्रपति के निवास स्थान व्हाइट हाउस के कोरोना वायरस टास्क फोर्स द्वारा तैयार किया गया है। बताया जा रहा है कि अगर कोरोना के प्रति एहतियात नहीं बरता गया तो आने वाले समय में मरने वालों की संख्या फिलहाल प्रतिदिन की संख्या का तीन गुना होगी।
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न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, अमेरिका में मरने वालों की संख्या को तीस फीसदी तक घटाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए लोगों को मास्क पहनने के नियम को गंभीरता से लेना होगा। हालिया समय में ऐसा देखने को मिल रहा है कि अमेरिका में एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो मास्क का लगातार विरोध कर रहा है।