दुनिया भर में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले एक करोड़ से अधिक हो जाने पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वैश्विक महामारी के एक नए और भयावह चरण की चेतावनी दी है। जब पश्चिम यूरोप और एशिया के कई देशों में कोरोना संक्रमण काफी हद तक नियंत्रित दिखाई दे रहा है तब दुनिया के कुछ हिस्सों में यह महामारी काफी तेजी से फैलती दिख रही है।
अलग-अलग देशों में कोरोना संक्रमण के बढ़ने या घटने की क्या वजहें हैं?
- मामले तेजी से कहां बढ़ रहे हैं?
ग्राफ पर नजर डालें तो फिलहाल अमेरीका, दक्षिण एशिया और अफ्रीका का पैटर्न चिंताजनक है।
अमेरीका- जो कोरोना वायरस संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित है और कोविड-19 से सबसे अधिक मौत भी वहीं हुई है। वहां एक बार फिर मामलों में तेज उछाल देखा गया है। बीते कुछ दिनों में अमेरीका में कोरोना संक्रमण के मामलों में जो तेजी आई है। उसने एक नया रिकॉर्ड भी बनाया है जो एक दिन में 40 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आने का है।
अमेरीका में न्यूयॉर्क के बाद एरीजोना, टेक्सस और फेलोरिडा को महामारी का बड़ा केंद्र माना जा रहा है। विशेषज्ञों की राय है कि यह अमेरीका में महामारी की दूसरी लहर नहीं है, बल्कि महामारी अब उन राज्यों में तेजी से फैल रही है, जहां लॉकडाउन को बहुत मामूली मूल्यांकन के बाद, सही समय से पहले हटा लिया गया है।
ब्राजील जो कोरोना संक्रमण से दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा प्रभावित देश है और अमेरीका के बाद कोविड-19 के दस लाख से ज्यादा मामले दर्ज करने वाला दूसरा देश भी, वहां अब तक संक्रमण बढ़ने की दर काफी तेज है।
ब्राजील के सबसे बड़े शहर- साओ पाउलो और रियो दे जनेरो महामारी से बुरी तरह प्रभावित हैं, जबकि ब्राजील के अन्य राज्यों में कोरोना की टेस्टिंग ही कम की जा रही है, जिनके बारे में विशेषज्ञों की राय है कि वहां मामले अधिक हो सकते हैं।
कुछ ऐसा ही भारत में भी देखने को मिलता है। हाल ही में भारत में कोरोना संक्रमण के मामलों में एक दिन में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई जब एक दिन में 19,900 से ज्यादा मामले सामने आए।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में अब तक पांच लाख 48 हजार से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें 2 लाख 10 हजार से अधिक मरीज अब भी संक्रमित हैं यानी उनमें बीमारी के लक्षण हैं या उनकी रिपोर्ट अब तक निगेटिव नहीं आई है।
भारत सरकार के अनुसार इस महामारी की चपेट में आ चुके लोगों के ठीक होने की संख्या, मौजूदा समय में संक्रमित मरीजों से ज्यादा है। सरकार के अनुसार, तीन लाख 21 हजार से ज्यादा मरीज पूरी तरह ठीक हो चुके हैं।
लेकिन भारत में भी टेस्टिंग कम की जा रही है, खासतौर पर उन राज्यों में जहां आबादी का घनत्व बहुत अधिक है। ऐसे में संक्रमितों की असल संख्या सरकारी डेटा से अनिवार्य रूप से अधिक होगी।
पर ऐसा हो क्यों रहा है? विकासशील देशों में भीड़भाड़ वाले इलाकों में रहने को मजबूर, वंचित समुदायों के लिए इस महामारी को सर्वाधिक खतरनाक समझा गया है। कोविड-19 के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेष प्रतिनिधि डेविड नोबार्रो के अनुसार, कोरोना वायरस संक्रमण ‘गरीबों की बीमारी’ बन गया है।