दिल्ली में हुए दूसरे सीरो सर्वे की रिपोर्ट जारी कर दी गई है। इसके मुताबिक, दूसरे सीरो सर्वे के दौरान 15 हजार से ज्यादा लोगों का टेस्ट किया गया, जिसमें से 28 फीसदी के करीब लोगों में कोरोना एंटीबॅाडीज पाई गई हैं। इसमें 18 साल से कम उम्र के बच्चों और महिलाओं में कोरोना से लड़ने के लिए एंटीबॅाडी अधिक पाई गई हैं। आइए जानते हैं आखिर सीरो सर्वे का फायदा क्या है...
आखिर देशभर में हो रहे सीरो सर्वे का क्या फायदा है, कोरोना से कैसे जुड़ा है ये?
कोरोना सबसे ज्यादा किस उम्र के लोगों को प्रभावित करता है?
- डॉ. संजय पांडेय कहते हैं, 'अक्सर देखने में आया है कि 65 वर्ष से ऊपर के जो लोग हैं या जिन्हें पहले से कोई बीमारी है और कोई दवा चल रही है या कोई महिला प्रेग्नेंट है, उनमें संक्रमण का खतरा बना रहता है। इसके अलावा एक शोध के अनुसार डायलिसिस वाले मरीजों की इम्यूनिटी कम होने की वजह से उनमें मृत्यु दर ज्यादा देखा गया है। ऐसे सभी लोगों को बचाना जरूरी है।'
क्या देश के किसी क्षेत्र में हर्ड इम्यूनिटी बनी है?
- डॉ. संजय पांडेय बताते हैं, 'विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि अभी कहीं भी हर्ड इम्यूनिटी नहीं बनी है, क्योंकि अभी यह पता नहीं है कि कितने प्रतिशत लोगों के संक्रमित होने पर हर्ड इम्यूनिटी विकसित होगी। जैसे धारावी (मुंबई) में एक सर्वे में 50 फीसदी लोगों में एंटीबॉडीज पाए गए हैं, तो ये नहीं कह सकते हैं कि वहां हर्ड इम्यूनिटी बन गई है। अभी यह भी पक्का नहीं है कि 70 फीसदी लोगों में पाए जाने पर हर्ड इम्यूनिटी मानेंगे या 80 फीसदी पर।'
हम वैक्सीन की मंजिल से कितनी दूर हैं?
डॉ. संजय पांडेय बताते हैं, 'देश में तीन वैक्सीन्स पर ट्रायल चल रहा है। जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि उम्मीद है साल खत्म होते-होते वैक्सीन मिलने लगेगी। जहां तक ट्रायल के चरणों का सवाल है तो फेज 1 और 2 में पता चल चुका होता है कि ये वैक्सीन सुरक्षित हैं और इनके कोई साइड-इफेक्ट नहीं होंगे। फेज 3 ट्रायल ज्यादा लोगों पर किया जाता है और पता किया जाता है कि एंटीबॉडीज कितने दिन तक शरीर में मौजूद रहते हैं। इसलिए देश में जब भी वैक्सीन आएगी, वो सुरक्षित और असरकारी वैक्सीन होगी।'
ट्रेस, टेस्ट एंड ट्रीट से कोरोना पर कितना नियंत्रण कर पा रहे हैं?
- डॉ. संजय पांडेय के मुताबिक, 'यह प्रयास अब तक काफी सफल रहा है। दिल्ली में आप देख सकते हैं कि जून के महीने में केस बहुत ज्यादा आ रहे थे। तब टेस्टिंग को तीन गुना बढ़ाया गया और जुलाई आते-आते मामले काफी कम हो गए। अभी भी मामले कम आ रहे हैं और ठीक होने वाले मरीजों का आंकड़ा भी बढ़ा है, तो एक्टिव केसेज कम हो गए हैं। कोरोना पर नियंत्रण के लिए टेस्टिंग बहुत जरूरी है।'