थोड़ी राहत-थोड़ी चिंता: स्तन कैंसर से मृत्युदर तो घटा पर नए मामलों में बढ़ोतरी, डॉक्टर से जानिए इसका कारण
स्तन कैंसर के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि पिछले एक दशक में स्तन कैंसर से मृत्युदर घटी है जो निश्चित ही राहत देने वाली है, वहीं दूसरी तरफ नए मामलों में बढ़ोतरी विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का कारण बनी हुई है।
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कैंसर के मामले वैश्विक स्तर पर गंभीर चिंता का कारण बने हुए हैं। महिला हों या पुरुष, बच्चे हों या बुजुर्ग सभी लोग इसका शिकार देखे जा रहे हैं। महिलाओं में जिन कैंसर के मामले सबसे चिंताजनक रहे हैं उनमें स्तन और सर्वाइकल कैंसर शीर्ष पर हैं।
मेडिकल क्षेत्र में नवाचार, अत्याधुनिक दवाइयों और उपकरणों के चलते अब कैंसर का उपचार करना काफी आसान हो गया है पर इसके बढ़ते मामलों को रोकना अब भी विशेष चिंता का कारण बना हुआ है।
स्तन कैंसर के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि यहां भी स्थिति ऐसी ही है। पिछले एक दशक में स्तन कैंसर से मृत्युदर घटी है जो निश्चित ही राहत देने वाली है, वहीं दूसरी तरफ नए मामलों में बढ़ोतरी विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का कारण बनी हुई है। अमेरिकन एसोसिएशन फॉर कैंसर रिसर्च (एएसीआर) की वार्षिक बैठक में पेश किए गए आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं।
स्तन कैंसर नए मामलों में लगातार बढ़ोतरी
भारत में स्तन कैंसर के मामले 2019 में 200,218 से बढ़कर 2023 में 221,579 हो गए हैं।
भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे आम कैंसर है, जो महिलाओं में होने वाले सभी कैंसर का 14% है। एएसीआर की सालाना बैठक में विशेषज्ञों ने रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जिसमें कहा गया है कि अब ब्रेस्ट कैंसर के कारण होने वाले मौत के मामले तो कम हो रहे हैं पर नए मरीजों की संख्या अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।
शोध का उद्देश्य यह जानना था कि किन कारणों से मृत्यु दर में गिरावट आई है और भविष्य में संसाधनों को किस प्रकार इस्तेमाल कर स्तन कैंसर के मामलों को और अधिक प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
- इसके लिए 2010 से 2020 के बीच के डेटा का महामारी विज्ञान और अंतिम परिणाम (एसईईआर) कार्यक्रम के आंकड़ों का विशेषज्ञों ने विश्लेषण किया गया।
- इसमें 20 से 49 वर्ष की महिलाओं में स्तन कैंसर से हुई 11,661 मौतों को आधार बनाया गया।
- शोध में पाया गया कि स्तन कैंसर से मृत्यु दर 2010 में प्रति 1 लाख महिलाओं पर 9.70 थी जो 2020 में घटकर 1.47 रह गई।
कैंसर के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
2000 में 20 से 49 वर्ष की महिलाओं में यह दर एक लाख महिलाओं पर लगभग 64 थी। अगले 16 वर्षों में यह धीरे-धीरे 0.24% प्रतिवर्ष की दर से बढ़ी। लेकिन 2016 के बाद अचानक प्रति वर्ष 3.76% की दर से बढ़ कर 2019 तक यह प्रति एक लाख पर 74 मामलों तक पहुंच गई थी।
कैंसर के मामले क्यों बढ़ रहे हैं इसका पता लगाने पर सामने आया कि एस्ट्रोजन-रिसेप्टर पॉजिटिव ट्यूमर (ईआर) में वृद्धि के कारण इसका खतरा काफी बढ़ गया है।
क्या कहती हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में पुणे स्थित एक अस्पताल में कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ नमृता सहाय बताती हैं, ईआर-पॉजिटिव ब्रेस्ट कैंसर तब होता है जब एस्ट्रोजन हार्मोन कैंसर कोशिकाओं के अंदर प्रोटीन से जुड़ता है, जिससे कोशिकाएं बढ़ती हैं।
यह तब भी हो सकता है जब एस्ट्रोजन और एक अन्य हार्मोन, प्रोजेस्टेरोन, कैंसर कोशिकाओं के अंदर प्रोटीन से जुड़ते हैं।
डॉक्टर बताती है, स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों के लिए कई जोखिम कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। धूम्रपान को एक उभरता हुआ कारण माना गया है जो महिलाओं की सेहत को कई प्रकार से नुकसान पहुंचा रहा है।
- धूम्रपान स्तन के ऊतकों को कार्सिनोजेन्स के संपर्क में लाता है और संभावित रूप से हार्मोन के स्तर को बदलता है।
- सिगरेट के धुएं में 40 से अधिक कैंसर पैदा करने वाले रसायन होते हैं जो डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
- धूम्रपान की आदत से दूरी बनाकर लाइफस्टाइल और आहार में सुधार करके कैंसक के खतरे को कम किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।