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कमर की कई बीमारियों का इलाज होगा सिर्फ जमीन पर बैठकर
टीम डिजिटल/अमर उजाला
Updated Tue, 12 Apr 2016 04:56 PM IST
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- फोटो : getty images
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जमीन पर बैठने का मतलब है कि पैर मोड़कर बैठेंगे। वैसे योग की कई मुद्राओं में जमीन पर पालथी मारकर बैठते हैं। इस तरह बैठने के भी कई फायदे हैं। जमीन पर पालथी मारकर बैठने से रीढ़ की हड्डी के निचले भाग में एक तरह का दबाव पड़ता है जिससे आराम महसूस होता है। साथ ही रीढ़ को सीधा रखते हैं और कंधे पीछे की तरफ रखे जाते हैं जिससे बैठने की मुद्रा अच्छी होती है।
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कई शोध बताते हैं कि जमीन पर पैर मोड़कर बैठने और खाने से पाचन भी सही होता है। योग में इस तरह की मुद्रा को सुखासन कहते हैं। जमीन पर जब बैठकर खाना खाते हैं तो थाली को ठीक अपने सामने रखते हैं और मुंह में निवाला डालते समय आगे की ओर झुकते हैं। इस तरह से आगे झुकने और पीछे जाकर खाने से पेट की मांसपेशियां की कसरत होती है जिससे खाना पचाने वाले रस निकलते हैं और पाचन दुरुस्त रहता है।
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परिवार के साथ जमीन पर बैठकर खाने की परंपरा तो काफी पुरानी है। ये परंपरा परिवार के साथ समय बिताने का भी मौका देती है जिससे आपसी लगाव बढ़ता है।
वैसे आज के परिपेक्ष में देखे तो काफी लोग जमीन पर बैठकर खाना सामाजिक प्रतिष्ठा के खिलाफ मानते हैं। लेकिन यकीन मानिए ये आपको जमीन से जुड़ने का मौका और गौरव देता है। जापान में कुछ इस तरह की ही परंपरा है। वहां तो चाय भी परिवार के साथ जमीन पर बैठकर पी जाती है। यहां तक की कुरान में पैगम्बर मौहम्मद भी जमीन पर बैठकर खाने की बात करते हैं। वो कहते हैं कि, "मैं गुलाम की तरह खाता हुं और गुलामों की तरह बैठता हूं।" मतलब ये कि जिसतरह गुलाम जमीन पर बैठते हैं वैसे ही मैं भी खाता हूं। तो इतने फायदे जानने के बाद आप भी घर में कुछ फर्नीचर की मदद से जमीन पर बैठकर खाने का प्रबंध कर लें।
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