Amar Ujala Samwad 2025: देश की चार प्रमुख स्वास्थ्य समस्याएं क्या हैं, विशेषज्ञ से जानिए इलाज
Amar Ujala Samwad 2025: आरोग्य स्वराज को समझने के लिए सबसे पहले ये समझना होगा कि भारत के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की मुख्य स्वास्थ्य समस्याएं क्या हैं और उनतक मेडिकल सेवा पहुंचने का स्तर क्या है? अमर उजाला संवाद उत्तराखंड 2025 के मंच से डाॅ. अभय बंग ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया।
विस्तार
Amar Ujala Samwad 2025: देहरादून में आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में डाॅ. अभय बंग शामिल हुए। अमर उजाला के मंच से उन्होंने भारतीय स्वास्थ्य समस्याओं, खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र में स्वास्थ्य समस्याओं पर चर्चा की। अमेरिका से लौटे डाॅक्टर बंग ने बताया कि कैसे अपने करियर के 30 साल उन्होंने भारतीय स्वास्थ्य पद्धति को दुरुस्त करने में दिए। अमेरिकन मेडिकल एक्यूरेट मॉडल से अलग, उन्होंने भारत की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यहां के हिसाब से मेडिकल माॅडल की तलाश की। इस माॅडल में स्वास्थ्य सेवा जन-जन को उपलब्ध कराने के लिए उनको अस्पताल तक लाना नहीं, बल्कि घर-घर तक स्वास्थ्य जानकार पहुंचाना है। इस माॅडल को उन्होंने आरोग्य स्वराज नाम दिया। आइए जानते हैं कि आरोग्य स्वराज क्या है और यह कैसे काम करता है।
आरोग्य स्वराज को समझने के लिए सबसे पहले ये समझना होगा कि भारत के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की मुख्य स्वास्थ्य समस्याएं क्या हैं और उनतक मेडिकल सेवा पहुंचने का स्तर क्या है?
क्या है प्रमुख स्वास्थ्य समस्याएं?
जब डाॅ. बंग अमेरिका से लौटे तो महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्र गढ़चिरौली में पहुंचें। यहां उन्होंने सबसे पहले ये जानने की कोशिश की कि वह लोगों को कौन सी समस्याएं अधिक हैं। उन्होंने जिले के 50 गांवों के लोगों को तीन दिन का वक्त दिया और तीन-तीन समस्याएं लिख कर लाने के लिए कहा। 35 साल पहले ग्रामीणों की जो मुख्य स्वास्थ्य समस्याएं पता चलीं, वह ये चार थीं।
पहला, शिशु की मृत्यु
दूसरा, पुरुष शराब पीके पड़े रहते हैं
तीसरा, महिलाओं को बहुत कमजोरी है
चौथी, दिनभर काम करने के बाद पीठ, कमर और जोड़ों में दर्द रहता है।
आरोग्य स्वराज की जरूरत क्यों हैं?
डाॅ. बंग गांधी जी से बहुत प्रेरित थे और बापू के पोते ने एक बात कही थी, जिसे डॉक्टर बंग ने अपने मेडिकल करियर में प्रेरणा की तरह गांठ बांध ली, वह सेहत की भारतीय व्याख्या है। जो स्व में निर्भर है, वह स्वस्थ है। भारत में सेहत की व्याख्या है जो अन्य किसी पर निर्भर नहीं है, वह स्वस्थ है।
उन्होंने समझ लिया कि भले ही जंगल में अस्पताल खोल लो और मेडिकल फैसिलिटी प्रदान कर दो लेकिन समय पर मेडिकल केयर न मिल पाने के कारण स्वास्थ्य समस्याएं बनी रहेंगी। ऐसे में जिन लोगों तक मेडिकल सेवा नहीं पहुंच पाती, उन तक मेडिकल सेवा पहुंचाने के लिए आरोग्य स्वराज मिशन की शुरुआत हुई।
क्या है आरोग्य स्वराज?
आरोग्य स्वराज एक गैर लाभकारी संगठन है जो भारत के गरीब और वंचित लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा को सुलभ बनाने के लिए काम करता है। इसमें आदिवासी स्वास्थ्य पर मुख्य तौर पर ध्यान दिया जाता है।
आरोग्य स्वराज्य के जरिए गांव-गांव तक स्किल पहुंचाई गई। गांव-गांव से कुछ महिलाओं को चुनकर एक महीने की ट्रेनिंग दी गई। उनके हाथ में दवा दी गई। उन्हें प्रशिक्षित किया गया कि नवजात शिशु को कैसे जांचें और क्या इलाज दें। इसको परखने के लिए 39 गांवों में 39 महिलाएं भेजी गईं, जिन्हें आरोग्य दूत माना गया। बाकी 37 गांव में सरकारी कार्यक्रम चले। जिन औरतों को आरोग्य दूत बनाकर भेजा गया, उन गांवों में तीन साल में शिशु दर कम हुई। परिणाम ये हुआ कि पहले जहां 1000 बच्चों में से एक साल में 121 बच्चे मर जाते थे, वो आंकड़ा 30 तक आ गया।
प्रशिक्षित महिलाओं की योग्यता की जांच
इन महिलाओं की योग्यता को जांचने के लिए दिल्ली की ऑल इंडिया मेडिकल इंस्टीट्यूट (एम्स) के चेयरमैन ऑफ पीडियाट्रिक्स ने 30 डॉक्टरों के दल के समक्ष ने इन औरतों की तीन दिन की परीक्षा ली और परिणाम में बताया कि जितना ये महिलाएं जानती हैं, उतना एम्स के डॉक्टर भी नहीं जानते हैं।
आरोग्य स्वराज कैसे कर रहा काम?
शिशु मृत्य दर को काबू में करने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में शराब के सेवन को भी कम किया गया। पिछले 30 साल से शराब के खिलाफ इतना आंदोलन चलाया गया कि अब स्थिति ऐसी है, कि पहले सर्वे में जहां 70 फीसदी पुरुष पीते थे, वहीं अब 24 फीसदी पुरुष ही शराब पीते हैं। हर साल जिले का 100 करोड़ रुपये शराब का बचता है। डॉ. बंग ने कहा कि गढ़चिरौली में 30 वर्ष में शराब पीने वाले की संख्या घटी है।
आदिवासियों और ग्रामीणों के मन से अस्पताल की डर हुआ कम
गढ़चिरौली के आदिवासियों से पूछा गया कि अस्पताल क्यों नहीं जाते हो, तो उन्होंने कहा कि अस्पताल की बड़ी-बड़ी इमारतों में वे खो जाते हैं। दूसरा कारण है कि डॉक्टर और नर्स सफेद कपड़ों में नजर आते हैं। हमारे यहां मुर्दों को सफेद कपड़ों में लपेटा जाता है, वहां जान बचाने वाले ही सफेद कपड़ों में होते हैं। तीसरा कारण है कि वहां मरीज को तो ले लेते हैं, लेकिन उसके परिवार को बाहर निकाल देते हैं। चौथा कारण है कि अस्पतालों में डॉक्टर खुद को भगवान समझते हैं, वहां भगवान नहीं हैं, सिर्फ डॉक्टर हैं जो खुद को भगवान मानते हैं।
इसलिए डाॅ. बंग ने जब आदिवासी क्षेत्र में पहला अस्पताल बनाया,उसे झोपड़ी में बनाया। उनका विश्वास बढ़ाने के लिए अस्पताल के बाहर उनकी इष्ट देवी का मंदिर बना दिया। गांव गांव के आदिवासियों ने आसपास अपने गांव के लिए झोपड़ी बनाई कि जब उनके गांव के मरीज आएंगे तो यहां रह सकेंगे। सबसे बड़ी समस्या होती है कि अस्पताल का बिल बहुत आएगा, इसपर भी काम किया ताकि वह मेडिकल केयर लेने की हिम्मत कर सकें।