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WHO Alert: दुनियाभर में 3 करोड़ से ज्यादा बच्चों पर मंडरा रहा है इस घातक रोग का खतरा, जानिए क्या है इसकी वजह

Thu, 17 Jul 2025 05:17 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 17 Jul 2025 05:17 PM IST
सार

  • हालिया रिपोर्ट में चिंता जताते हुए विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान नियमित वैक्सीनेशन की प्रभावित हुई रफ्तार के कारण दुनियाभर में 3 करोड़ से अधिक बच्चों पर खसरा (मीजल्स) रोग का जोखिम फिर से मंडराने लगा है। 
  • 2024 में केवल 89% बच्चों को ही पहला एमएमआर टीका लगाया गया, जबकि जर्मनी में यह संख्या 96%, फ्रांस, इटली और जापान में 95% और अमेरिका और कनाडा में 92% थी।

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30m children worldwide not fully immunised with MMR vaccine risk of severe measles diseases
बच्चों में खसरा रोग का बढ़ता खतरा - फोटो : Amarujala.com

विस्तार

Measles Outbreak: पिछले कुछ वर्षों में पूरी दुनिया एक के बाद एक गंभीर संक्रामक रोगों की चपेट में आई है। साल 2019 के आखिरी के महीनों में फैले कोरोनावायरस संक्रमण ने न सिर्फ करोड़ों लोगों को अपनी चपेट में लिया, बल्कि इसके साथ-साथ उभरे अन्य वायरल संक्रमणों जैसे मंकीपॉक्स, जीका और एच5एन1 रोगों ने भी वैश्विक स्वास्थ्य पर बड़ा असर डाला।

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इन बीमारियों की तेज रफ्तार ने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित किया बल्कि उन लोगों की भी मुश्किलें और बढ़ा दीं जो पहले से ही मधुमेह, हृदय रोग, कैंसर जैसे दीर्घकालिक रोगों से जूझ रहे थे। स्वास्थ्य सेवाओं का फोकस जब इन नए संक्रमणों से लड़ने में लगा रहा, तब पुरानी बीमारियों के इलाज और निगरानी में गिरावट देखने को मिली। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि बचपन में लगने वाले टीकों का नियमित कार्यक्रम, जो कई जानलेवा रोगों को रोकने की एक मजबूत कड़ी था, वह भी इस दौर में बुरी तरह बाधित हुआ। इसकी वजह से अब उन रोगों के मामले फिर से बढ़ रहे है, जिन्हें हमने दशकों की मेहनत से लगभग खत्म कर दिया था।
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एक हालिया रिपोर्ट में चिंता जताते हुए विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि महामारी के दौरान नियमित वैक्सीन की प्रभावित हुई रफ्तार के कारण दुनियाभर में 3 करोड़ से अधिक बच्चों पर खसरा (मीजल्स) रोग का जोखिम फिर से मंडराने लगा है।

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एमएमआर वैक्सीनेशन में कमी का देखा जा रहा है असर - फोटो : Freepik.com

शिशु टीकाकरण दरों में गिरावट के दुष्प्रभाव

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि शिशु टीकाकरण दरों में गिरावट के कारण दुनियाभर में करोड़ों बच्चे गंभीर बीमारी और मृत्यु के बढ़ते खतरे का सामना कर रहे हैं। मीजल्स, मम्प्स और रूबेला (एमएमआर) वैक्सीनेशन में गिरावट के कारण ब्रिटेन सबसे अधिक प्रभावित देश माना जा रहा है, जहां बच्चों में खसरा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि दुनियाभर में 3 करोड़ से ज्यादा बच्चों को पूरी तरह से एमएमआर वैक्सीन नहीं लगाया गया है वहीं 1.43 करोड़ बच्चों को वैक्सीन की  एक भी डोज नहीं लगी है।

आलम ये है कि जिस ब्रिटेन को साल 2017 में, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मीजल्स फ्री घोषित कर दिया था, वहां इस रोग के मामले फिर तेजी से बढ़ने लगे हैं। 

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बच्चों में बढ़ता खसरा रोग का खतरा - फोटो : Freepik.com

टीकाकरण कवरेज में भारी गिरावट के दुष्प्रभाव

यूरोप और मध्य एशिया के 53 देशों में किए गए सर्वे में पाया गया है कि यहां टीकाकरण कवरेज 2019 के स्तर की तुलना में औसतन एक प्रतिशत कम रहा। 2024 में, इनमें से ज्यादातर देश खसरे से प्रतिरक्षा प्राप्त करने के लिए आवश्यक 95% टीकाकरण दर को भी पूरा नहीं कर पाए, लगभग एक तिहाई देशों ने 90% से कम कवरेज की सूचना दी।

वैक्सीनेशन में ब्रिटेन का सबसे खराब प्रदर्शन रहा है। 2024 में केवल 89% बच्चों को ही पहला एमएमआर टीका लगाया गया, जबकि जर्मनी में यह संख्या 96%, फ्रांस, इटली और जापान में 95% और अमेरिका और कनाडा में 92% थी।

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टीकाकरण में कमी का देखा जा रहा है असर - फोटो : Freepik.com

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जताई चिंता

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दुनियाभर में खसरे के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, ये स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ा जोखिम बनकर उभरता हुआ देखा जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम कहती है, खसरा सबसे संक्रामक रोगों में से एक है। वैक्सीन कवरेज में मामूली गिरावट भी विनाशकारी उछाल ला सकती है। हर बच्चे की सुरक्षा के लिए, हमें हर देश में, हर जिले में  वैक्सीनेशन कवरेज बढ़ाने की जरूरत है। 
यूरोप में विश्व स्वास्थ्य संगठन के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. हंस क्लूज कहते हैं- 
 

पिछले साल ही, हमारे क्षेत्र में लगभग 3 लाख से ज्यादा लोगों को काली खांसी हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में तीन गुना से भी ज्यादा है। इस बीच 2024 में 1.25 से ज्यादा खसरा के मामले देखे गए जो 2023 की तुलना में दोगुना है। ये सिर्फ संख्याएं नहीं हैं, बल्कि लाखों परिवार इस पीड़ा में हैं कि उनके बच्चे बीमार हैं जबकि थोड़ी सी सावधानी से इसे रोका जा सकता था।"

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भारत में खसरा रोग के मामले - फोटो : Freepik.com

भारत के लिए भी चिंता

भारत कुछ दशकों पहले तक खतरा से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक रहा था, हालांकि टीकाकरण को बढ़ावा देकर इस रोग के जोखिमों को पिछले वर्षों में काफी कम कर दिया गया था। आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 से 2021 के बीच भारत में खसरे के मामलों में 62% की गिरावट आई, इस दौरान प्रति दस लाख जनसंख्या पर 10.4 से घटकर 4 मामले रह गए थे।

हालांकि महामारी के दौरान राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान पर भी असर देखा गया जिसमें बड़ी संख्या में बच्चे खसरे के टीके से चूक गए। लिहाजा देश के कई हिस्सों से पिछले दिनों बच्चों में खसरा के मामले बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। इसको लेकर विशेषज्ञों की टीम ने अलर्ट किया है।



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स्रोत

Misinformation, access and cuts – the UK’s measles surge explained

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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