क्या आपको भी लगता है सोमवार से डर? तो ऐसे रखें खुद को सुरक्षित
सोमवार यानी हफ्ते की शुरुआत। हममें से अधिकांश के लिए यह एक सामान्य रूटीन लाइफ का हिस्सा हो सकता है। हम कभी यह सोच ही नहीं सकते कि कुछ लोगों के लिए इस सोमवार का मतलब एंग्जायटी, तनाव, घबराहट और परेशानी भी हो सकता है। खास बात यह है कि यह समस्या कोरोना के कारण वर्क फ्रॉम होम की स्थिति में भी सिर उठा रही है।
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विस्तार
24 वर्षीय दीक्षा एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करती हैं। हफ्ते में उन्हें पांच दिन काम करना होता है और शनिवार-रविवार की छुट्टी मिलती है। वह कहती हैं-'मुझे नहीं मालूम ऐसा क्यों है, लेकिन शनिवार का दिन अच्छा बीतने के बाद रविवार की दोपहर से ही मुझे अगले दिन को लेकर टेंशन होने लगती है। कई बार तो मन इतना खराब हो जाता है कि बाकी का बचा संडे भी खराब होता है और मंडे की शुरुआत भी खराब मूड से ही होती है। हालांकि पिछले महीने मैंने आखिरकार एक साइकोलॉजिकल काउंसलर की मदद ली और मुझे अब थोड़ा आराम है। लेकिन अब भी थोड़ी एंग्जायटी होती है। ये धीरे धीरे ही खत्म होगी लगता है। हो सकता है मुझे जॉब भी बदलना पड़े।'
क्या है मंडे ब्लूज़?:
मंडे ब्लूज़ यानी सोमवार का भय। यह एक मानसिक स्थिति है, जो खासकर उन लोगों को शिकंजे में लेती है जो अपने काम से खुश नहीं हैं। जिन लोगों को इस स्थिति से नहीं गुजरना पड़ता, उनके लिए ये महज कल्पना भी हो सकती है। लेकिन जो लोग इस स्थिति से गुजरते हैं, उनके लिए इसका सामना करना बहुत मुश्किल हो जाता है और यदि समय पर उन्हें मदद न मिले तो लक्षण और परिणाम दोनों गंभीर हो सकते हैं। रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार को काम पर जाने को लेकर मन मे नकारात्मक भावों का आना ही मंडे ब्लूज़ है। इसके लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं-
* बेचैनी
* घबराहट
* एंग्जायटी
* तनाव
* डिप्रेशन
* रोने की इच्छा होना
* चिड़चिड़ाहट
* बेवजह का गुस्सा, आदि
दूसरों की भी परेशानी
मंडे ब्लूज़ का असर केवल आपके काम और आपकी परफॉर्मेंस तक ही सीमित नहीं रहता। इसका असर आपके आस पास काम कर रहे बाकी लोगों पर भी होता है। जब आप ऑफिस में नेगेटिव एनर्जी और एटीट्यूड के साथ रहेंगे तो बाकी लोगों पर भी इसका असर पड़ेगा। और तो और आपके परिवार और मित्र भी इससे प्रभावित होंगे।
कोरोना के दौरान स्थिति
कोरोना के दौर में जब अधिकांश जगह पर लॉकडाउन के कारण वर्क फ्रॉम होम की सुविधा कर्मचारियों को दी गई थी, तब भी लोग मंडे ब्लूज़ के शिकार हो रहे थे। भारतीयों के लिए करवाए गए एक सर्वे के अनुसार 50 प्रतिशत से अधिक लोग घर से काम करते हुए भी सोमवार के आने से घबरा रहे थे। विशेषज्ञ मानते हैं कि इसके पीछे कोरोना के चलते छुपी जॉब की अनिश्चितता, टारगेट्स के पूरे न हो पाने का डर और सबसे बढ़कर बीमारी का डर भी एक कारण था कि लोग घर पर सुरक्षित और आरमदायक वातावरण में रहते हुए भी इस समस्या के शिकार हो रहे थे। इतना ही नहीं कुछ लोगों में तो यह समस्या रेगुलर ऑफिस न जाने के कारण भी उभरी।
इन उपायों को आजमाइए:-
* सबसे पहले अपनी परेशानी का कारण जानने की कोशिश करें। क्या आपका कोई कलीग या सुपीरियर या फिर पक्षपाती व्यवस्था आपको इस स्थिति में डाल रही है? इसका पता लगाइए।
* अपने पुराने रेग्युलर ऑफिस रूटीन को न छोड़ें। पहले जितनी बजे आप उठते थे, तैयार होते थे, खाना खाते थे, उसे वैसे ही अपनाए रहिए।
* सोमवार को होने वाली मीटिंग या प्रेजेंटेशन या ऑफिस के अन्य रूटीन के लिए खुद को शुक्रवार से ही तैयार कीजिए। इससे शनिवार या रविवार को अचानक आपको सोमवार का डर नहीं सताएगा, बल्कि हो सकता है शुक्रवार को ही आपको इसके लिए उपाय भी सूझ जाएं।
* खासकर उन कामों को जिनको आप बोर या बोझ मानकर चल रहे हैं, शुक्रवार को ही खत्म करने का प्रयास करें। इससे जब आप मंडे को ऑफिस ज्वाइन करेंगे तो आपके काम भी हो चुके होंगे और आप पर कोई दबाव भी नहीं होगा।
* नौकरी छोड़ना हर बात का समाधान नहीं होता। खासकर अगर आपके मंडे ब्लूज़ की वजह कुछ ऐसी है, जिसे सुलझाया जा सकता है। फिर अभी की स्थितियों में तो नौकरी छोड़ने का विकल्प भी नहीं है। इसलिए अपने परिवार या खास मित्रों के बीच अपनी समस्या रखें। कई समस्याओं का हल आपसी बातचीत में ही निकल आता है।
* मेडिटेशन, योग, अच्छा संगीत, भरपूर नींद और वर्चुअल दुनिया मे कम समय बिताना प्रभावी उपाय हो सकते हैं। इनके अलावा आप अपनी पसंद की किसी भी रचननात्मक गतिविधि को समय दे सकते हैं। इससे आपको पॉजिटिव एनर्जी मिलेगी। जो आपका काम के प्रति उत्साह बढ़ाएगी और आपको चिंताओं से दूर रखेगी।
* वीकेंड में अगर बाहर घूमने जा रहे हों तो हमेशा जल्दी घर से निकलें और जल्दी वापस लौटने की कोशिश करें। इससे आपको लेट नाइट आकर घर और दफ्तर के काम पूरे करने का टेंशन नहीं होगा और आपकी नींद भी पूरी हो पाएगी। यानी मंडे मॉर्निंग हैप्पी रहेगी।
* सबसे खास बात खुद को प्रेरित करते रहें। उन लोगों के बारे में सोचें जो आपसे भी कठिन परिस्थितियों में जीवनयापन कर रहे हैं और हफ्ते में सातों दिन, चौबीस घंटे काम करना जिनकी ड्यूटी है। अपने जीवन के अच्छे पक्षों से प्रेरणा लें और चुनौतियों के लिए खुद को तैयार रखें।