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अध्ययन में दावा: सुस्त जीवनशैली वालों को कोरोना संक्रमण से मौत का खतरा 32 फीसदी अधिक
Sun, 02 May 2021 10:53 AM IST
वर्तिका तोलानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: वर्तिका तोलानी
Updated Sun, 02 May 2021 10:53 AM IST
सार
आलसी लोग या किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि न करने वालों में कोरोना संक्रमण की वजह से अस्पताल में, आईसीयू में और कोरोना से मौत का खतरा क्रमश: 20, 10 और 32 प्रतिशत अधिक है।
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कोरोना संक्रमण की वजह से अस्पताल में, आईसीयू में और कोरोना से मौत का खतरा ज्यादा
- फोटो : PTI
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विस्तार
कोविड-19 संक्रमित होने से पहले जो व्यक्ति एक्सरसाइज नहीं करता है, उसके गंभीर रूप से बीमार होने की संभावनाएं ज्यादा हैं। आलसी लोग या किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि न करने वालों में कोरोना संक्रमण की वजह से अस्पताल में, आईसीयू में और कोरोना से मौत का खतरा क्रमश: 20, 10 और 32 प्रतिशत अधिक है। यह दावा ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में शनिवार को प्रकाशित स्टडी में किया गया है।
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48 हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमित व्यस्कों पर किया गया शोध
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स्टडी में यह भी दावा किया गया है कि धूम्रपान, मोटापा और हाइपरटेंशन के मुकाबले शारीरिक तौर पर निष्क्रिय होना अधिक खतरनाक है। अब तक किए गए शोध के अनुसार बढ़ती उम्र, डायबिटीज, मोटापा या कार्डिवैस्क्युलर बीमारी की वजह से कोरोना संक्रमण होने पर मरीज गंभीर रूप से बीमार पड़ रहा है। किंतु अमेरिका में 48,440 कोरोना संक्रमित व्यस्कों पर किए गए शोध में यह बात सामने आई है कि महामारी आने से पहले न्यूनतम दो वर्षों तक निष्क्रिय जीवनशैली बिताने वाले लोगों के लिए कोरोना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
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शोध में शामिल मरीजों की 47 वर्ष थी औसत उम्र
बता दें यह स्टडी जनवरी से अक्टूबर 2020 के बीच की गई थी। इसमें शामिल मरीजों की औसत उम्र 47 थी। शोध में प्रतिक्रियाएं देने वाले 5 में से 3 महिलाएं थी। वहीं तकरीबन आधे मरीजों को डायबिटीज, क्रोनिक लंग कंडीशन, दिल या किडनी की बीमारी नहीं थी। करीब 20 फीसदी मरीजों को एक बीमारी थी। वहीं, 30 फीसदी से अधिक मरीजों को दो या उससे अधिक बीमारियां थीं।