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Hindi News ›   Jobs ›   SC to hear plea on UPSC candidates seeking extra attempt

सिविल सेवा परीक्षा में दूसरा मौका देने के मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

Mon, 25 Jan 2021 01:27 AM IST
Kuldeep Singh पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 25 Jan 2021 01:27 AM IST
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SC to hear plea on UPSC candidates seeking extra attempt
Supreme Court on UPSC Civil Service Exam - फोटो : अमर उजाला

कोविड-19 के कारण यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में नहीं बैठ पाए उम्मीदवारों को दूसरा मौका देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। यह सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले शुक्रवार को केंद्र ने इस बात पर जोर था कि वह सिविल सेवा के उन अभ्यर्थियों को एक और मौका देने के पक्ष में नहीं है जो 2020 में अपने आखिरी प्रयास के तहत परीक्षा नहीं दे पाए थे।

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जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू की दलील सुनने के बाद केंद्र सरकार को इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। पीठ ने याचिकाकर्ता रचना के वकील को भी हलफनामे की प्रति देने को कहा था।
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विधि अधिकारी ने पीठ से कहा था, हम एक और मौका देने के लिए तैयार नहीं हैं। मुझे हलफनामा दाखिल करने का समय दें, मुझे निर्देश मिला है कि हम सहमत नहीं हैं। पीठ में न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुराई भी शामिल हैं। पीठ ने विधि अधिकारी से हलफनामे की प्रति सिविल सेवा अभ्यर्थी रचना के वकील को मुहैया कराने को कहा था, जिन्होंने परीक्षा में बैठने के लिए एक अतिरिक्त अवसर प्रदान करने की याचिका के साथ अदालत का रुख किया है।
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इससे पहले, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया था कि सरकार उन सिविल सेवा अभ्यर्थियों को एक और अवसर प्रदान करने के मुद्दे पर विचार कर रही है जो यूपीएससी परीक्षा के अपने अंतिम प्रयास में शामिल नहीं हो पाए थे।

शीर्ष अदालत ने पिछले साल 30 सितंबर को देश के कई हिस्सों में कोविड-19 महामारी और बाढ़ के कारण यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा स्थगित करने से इनकार कर दिया था, जो चार अक्तूबर को आयोजित की गई थी।


हालांकि, उसने केंद्र सरकार और संघ लोक सेवा आयोग को यह निर्देश दिया था कि वे उम्मीदवारों को एक अतिरिक्त मौका देने पर विचार करें, जिनका 2020 में आखिरी प्रयास है। पीठ को तब बताया गया था कि एक औपचारिक निर्णय केवल कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा लिया जा सकता है।

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