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Hindi News ›   Jobs ›   New to an Organization? Turn Initial Hesitation into Confidence

New Organization: संगठन में नए हैं? झिझक से नहीं, समझदारी से करें आगे की शुरुआत

Thu, 29 Jan 2026 08:44 AM IST
शाहीन परवीन शैना हॉकिंग, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू
शैना हॉकिंग, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू Published by: शाहीन परवीन Updated Thu, 29 Jan 2026 08:44 AM IST
सार

Workplace Confidence: जब आप किसी संगठन में नए होते हैं, तो थोड़ी हिचक महसूस होना बिल्कुल स्वाभाविक है। नया माहौल, नए लोग और नई जिम्मेदारियां शुरुआत में असहज कर सकती हैं। लेकिन जरूरी यह है कि यह हिचक आपके आत्मविश्वास और सीखने की प्रक्रिया पर हावी न हो।

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New to an Organization? Turn Initial Hesitation into Confidence
(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Freepik

विस्तार

New Organization: जब आप किसी ऐसे संस्थान में जाते हैं, जो आपके लिए बिल्कुल नया है, तो आपके लिए वहां के इतिहास और अनकहे नियमों को जानना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। इस परिस्थिति में सफल होने के लिए पुराने तौर-तरीकों का सम्मान करना और अपनी नई सोच के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। इसके लिए सबसे पहले यह समझें कि वहां फैसले कैसे होते हैं और असली जिम्मेदारी किसके पास है। लोगों से जुड़ने के लिए साझा उद्देश्य पर ध्यान दें।
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अपनी नई दृष्टि का प्रयोग सोच-समझकर करें और सीधे समाधान थोपने के बजाय सवाल पूछकर रास्ता बनाएं। जब आप लोगों को सम्मान देतेे हैं, तो लोग आपको भी सम्मान देते हैं। यही भरोसा धीरे-धीरे सहयोग में बदल जाता है।
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माहौल को समझें

पुरानी कार्य संस्कृतियां अनुभव, रीति-रिवाज और अनौपचारिक नियमों से बनती हैं। ये स्थिरता और वफादारी देती हैं, लेकिन बदलाव लाने वालों के लिए बाधा भी बन सकती हैं। नए अधिकारी अक्सर इसे समझे बिना संघर्ष करते हैं। अगर आप संगठन में नए हो, तो सबसे पहले यह अवलोकन करें कि निर्णय कैसे होते हैं, किसका प्रभाव है, लोग कैसे बातचीत करते हैं, कौन नए विचार स्वीकार करता है, किन रीति-रिवाजों की अहमियत है। सामान्य बातचीत से समझें कि किसके पास अनौपचारिक शक्ति है और किसकी क्या स्थिति है।

 

 साझा उद्देश्य खोजें

पुरानी और स्थापित संस्थाओं में लोग अक्सर अपने साझा अनुभवों, परंपराओं और लंबे समय के साथ बने रिश्तों के कारण एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं। ऐसे माहौल में नए या बाहरी व्यक्ति के लिए शुरुआत में अपनापन महसूस करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि वह उस साझा इतिहास का हिस्सा नहीं रहा होता। लेकिन भरोसा बनाने का रास्ता सिर्फ अतीत से नहीं, बल्कि उद्देश्य से भी निकलता है। आप समझें कि संस्था का मकसद क्या है और वह किन मूल्यों पर चलती है। फिर अपने काम और व्यवहार के जरिये उस मिशन से खुद को जोड़ें। खुद से पूछें कि मेरे मूल्य संस्था के मूल्यों से कैसे मेल खाते हैं और मैं इसके बड़े उद्देश्य में क्या योगदान दे सकता हूं?
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अपनी बात रखना सीखें

संस्कृति को समझ लेने के बाद अगली चुनौती यह होती है कि अपनी बात कैसे रखें। याद रखें, आपको आपकी विशेषज्ञता के लिए चुना गया है, इसलिए आपकी राय अहम है। लेकिन शुरुआत में इतनी जल्दी बदलाव की बात न करें। बाहरी व्यक्ति होने का फायदा यह है कि आप उन समस्याओं या कमियों को देख पाते हैं, जो अंदर के लोगों को अब दिखाई नहीं देतीं। बेहतर होगा कि आप जो देख रहे हैं, उसे सवाल या विचार के रूप में साझा करें। बातचीत में समाधान बताने के बजाय पैटर्न की ओर इशारा करें, संगठन के इतिहास का सम्मान करें। दूसरी संस्थाओं से तुलना करने से बचें। अपनी बात को संस्था के लक्ष्य और रणनीति से जोड़कर रखें।

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