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कर्नाटक: विधानसभा में केपीएससी सुधार विधेयक पारित, विपक्ष ने की पारदर्शिता के लिए बड़े बदलावों मांग की

Tue, 18 Mar 2025 09:31 PM IST
आकाश कुमार जॉब्स डेस्क, अमर उजाला
जॉब्स डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Tue, 18 Mar 2025 09:31 PM IST
सार

Karnataka: कर्नाटक विधानसभा ने केपीएससी सुधार विधेयक 2025 पारित किया, जिससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के प्रावधान किए गए। विपक्ष ने इसे अपर्याप्त बताते हुए यूपीएससी जैसे व्यापक सुधारों की मांग की। पेशेवर कर भी बढ़ाकर 2,500 रुपये किया गया।
 

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Karnataka Assembly Passes KPSC Reform Bill, Opposition Demands Major Overhaul for Transparency in Recruitment
KPSC - फोटो : Official Website (kpsc.kar.nic.in.)

विस्तार

KPSC: कर्नाटक विधानसभा ने मंगलवार को कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में सुधार लाने के लिए एक विधेयक पारित किया। हालांकि, कई सदस्यों ने सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए व्यापक बदलाव लागू करने की मांग की कि भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो।

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विधेयक में क्या बदलाव किए गए हैं?

इस विधेयक का नाम कर्नाटक लोक सेवा आयोग (कार्य संचालन और अतिरिक्त कार्य) (संशोधन) विधेयक, 2025 है। यह 1959 के कानून में संशोधन करता है और निम्नलिखित बदलाव लाता है:

  • अब आयोग की बैठक के लिए 50% सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी, जिसमें अध्यक्ष भी शामिल होंगे।
  • उम्मीदवारों के साक्षात्कार के लिए किसी भी एक सदस्य को अधिकृत किया जा सकता है।
  • परीक्षा नियंत्रक और संयुक्त परीक्षा नियंत्रक जैसे शब्दों को विधायी रूप से परिभाषित किया गया है।

 

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सरकार ने क्या कहा?

विधानसभा में इस विधेयक को पेश करते हुए कानून और संसदीय कार्य मंत्री एच. के. पाटिल ने कहा कि यह एक छोटा संशोधन है और सरकार भविष्य में और सुधार लाने पर विचार कर रही है।

उन्होंने कहा, "हम केपीएससी को सुधारने के लिए तत्काल उपाय कर रहे हैं। यह कोई बड़ा ऑपरेशन नहीं है, लेकिन इसे ठीक करने के लिए कुछ कदम उठाए जा रहे हैं।"

विधेयक को जरूरी बताते हुए उन्होंने कहा, "अब तक सरकार को केपीएससी से परामर्श लेकर नियमों में बदलाव करना पड़ता था, जिससे सुधार लागू करने में देरी होती थी। अब यह बाध्यता हटा दी गई है, जिससे सरकार केपीएससी के लिए नियमों को स्वतंत्र रूप से तय कर सकेगी।"

इसके अलावा, परिपत्र (सर्कुलेशन) के माध्यम से फैसले लेने की प्रक्रिया भी हटाई गई है ताकि निर्णयों में देरी न हो।

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विपक्ष की क्या राय है?

चर्चा के दौरान, विपक्ष और सत्ता पक्ष के कई सदस्यों ने केपीएससी में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए बड़े सुधारों की मांग की।

  • बीजेपी विधायक सुरेश कुमार ने कहा कि केपीएससी में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है और चयन प्रक्रिया में खामियां हैं।
  • उन्होंने सुझाव दिया कि महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों के लोक सेवा आयोग का अध्ययन करने के लिए एक सदन समिति का गठन किया जाए ताकि सुधारों को बेहतर बनाया जा सके।
  • विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा, "केपीएससी अब ऐसे चरण में है, जहां इसे बड़े सुधारों की जरूरत है, लेकिन सरकार इसे सिर्फ छोटी-मोटी दवाइयां देकर सुधारने की कोशिश कर रही है।"
  • उन्होंने केपीएससी में यूपीएससी जैसी पारदर्शी प्रणाली लागू करने की मांग की।

 

अन्य विधेयक भी पारित

इसके अलावा, विधानसभा ने कर्नाटक कर (पेशे, व्यापार, सेवाएं और रोजगार) (संशोधन) विधेयक, 2025 को भी मंजूरी दी।

इस विधेयक में पेशेवर कर की दर को 2,400 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है। यह उन वेतनभोगी कर्मचारियों पर लागू होगा जिनकी मासिक आय 25,000 रुपये या उससे अधिक है।

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