फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jobs ›   Government Jobs ›   Govt must regulate coaching institutes: Kanhaiya Kumar

Coaching: एक दिन में लगभग 28 छात्र कर रहे आत्महत्या, सरकार और बाजार के बीच पिस रहे हैं विधार्थी: कन्हैया कुमार

Sat, 15 Feb 2025 06:26 PM IST
शाहीन परवीन जॉब्स डेस्क, अमर उजाला
जॉब्स डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Sat, 15 Feb 2025 06:26 PM IST
सार

Kanhaiya Kumar: कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने शनिवार को छात्रों की आत्महत्या के मामलों और कोचिंग संस्थानों को बंद करने को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और देश में शिक्षा क्षेत्र में "व्यवस्थागत विफलता" का आरोप लगाया।

विज्ञापन
Govt must regulate coaching institutes: Kanhaiya Kumar
Kanhaiya Kumar - फोटो : ANI

विस्तार

Congress leader Kanhaiya Kumar: कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने शनिवार को सरकार से छात्रों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों के मद्देनजर देश में विभिन्न कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने की मांग की।

विज्ञापन


उन्होंने कहा कि देशभर में यूपीएससी, मेडिकल और इंजीनियरिंग परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षण देने वाले निजी कोचिंग संस्थानों की बाढ़ आ गई है, क्योंकि सरकारी संस्थानों की स्थिति अच्छी नहीं है।
विज्ञापन


कुमार ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "पिछले कई दिनों से कोचिंग संस्थानों द्वारा छात्रों से फीस वसूलने के बाद उन्हें डॉक्टर और इंजीनियर बनाकर गायब करने का दावा करने की खबरें आ रही हैं। जब भी देश में ऐसी व्यवस्थागत विफलता होती है, तो सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।"
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने दावा किया कि छात्र और आम लोग सरकार और बाजार के बीच पिस रहे हैं।

कुमार ने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों में कार्रवाई करनी चाहिए और झूठ-मूठ में नहीं पड़ना चाहिए।

उन्होंने सरकार से देश में सरकारी संस्थानों की स्थिति को मजबूत करने और सुधारने का भी आग्रह किया।

उन्होंने आरोप लगाया, "आज देश में सपने बेचे जा रहे हैं और कोचिंग संस्थानों की बाढ़ आ गई है, क्योंकि सरकारी व्यवस्था की हालत बहुत कमजोर है।"

एक दिन में लगभग 28 छात्र कर रहे आत्महत्या


कुमार ने यह भी दावा किया कि हर घंटे दो छात्र और हर 24 घंटे में लगभग 28 छात्र आत्महत्या कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "जिस तरह किसानों की आत्महत्या के लिए व्यवस्था जिम्मेदार है, उसी तरह छात्रों की आत्महत्या के लिए भी यही व्यवस्था जिम्मेदार है। यह व्यवस्था छात्रों को 'प्रेशर कुकर' बना रही है और उन्हें हर दिन सपने बेचे जा रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "कितनी सीटें हैं? परीक्षा पारदर्शी तरीके से कैसे आयोजित की जाएगी? कितने रोजगार के अवसर पैदा होंगे? ऐसे सवालों पर चर्चा नहीं होती है।"

कुमार के अनुसार, रोजगार उपलब्ध कराने के नाम पर देश में सिर्फ कोचिंग संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं, जो अभिभावकों से मोटी फीस वसूलते हैं।

उन्होंने कहा, "हमारी मांग है कि देश की सरकारी संस्थाओं में सुधार किया जाए और उन्हें मजबूत बनाया जाए, क्योंकि अगर वे कमजोर होंगी तो निजी क्षेत्र के लिए विकास करना मुश्किल हो जाएगा। देश में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी, इंजीनियर और डॉक्टर बनाने के कारोबार को विनियमित करना बहुत जरूरी है।"

रिक्त पदों को पारदर्शी तरीके से भरें 


उन्होंने यह भी मांग की कि देश में सभी रिक्त पदों को पारदर्शी तरीके से भरा जाना चाहिए।

कोचिंग सेंटरों पर युवाओं के शोषण के आरोपों पर एनएसयूआई प्रभारी कुमार ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी विशेष नौकरी के लिए केवल 100 पद रिक्त हैं, तो भी लाखों अभ्यर्थी कोचिंग सेंटरों की मदद लेने का प्रयास करते हैं।

उन्होंने बताया कि रिक्तियां तो वही रहेंगी, लेकिन निजी कोचिंग सेंटर उन अभ्यर्थियों की हताशा का फायदा उठाते हैं जो प्रतियोगिता में सफल होना चाहते हैं।

कुमार ने आरोप लगाया कि अनुचित प्रतिस्पर्धा की संस्कृति बनाने के लिए सरकार और बाजार की ताकतों के बीच सांठगांठ है।

उन्होंने एक और उदाहरण देते हुए कहा कि कभी-कभी कुछ युवाओं को एक करोड़ रुपये का पैकेज मिलने का दावा किया जाता है, ताकि अन्य असहाय छात्र इन कोचिंग सेंटरों की ओर आकर्षित हो सकें। उन्होंने पूछा कि कितने युवाओं को ऐसे पैकेज मिलते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

 रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed