जानिए, क्या है UPSC टॉपर इरा सिंघल की सफलता का राज?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
‘क्या हार में क्या जीत में किंचित नहीं भयभीत मैं..’। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की यह पंक्तियां यूपीएससी की परीक्षा में ऑल इंडिया टॉपर इरा सिंघल पर सटीक बैठती हैं।
कभी हार नहीं मानने का जज्बा ही उनकी सफलता का राज है। माता-पिता अनीता सिंघल व राजेंद्र सिंघल की इकलौती संतान ने नि:शक्त होने के बावजूद चुनौतियों का सामना करते हुए यूपीएससी की परीक्षा एक बार नहीं बल्कि चार बार पास की है।
कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करने वाली इरा ने एफएमएस से एमबीए किया और भूगोल विषय का चयन कर सर्वोच्च शिखर को छुआ।
इस सफलता के आपके लिए क्या मायने हैं?
इरा कहती हैं, ‘अब दुनिया मेरे जैसों को अलग तरीके से देखने लगेगी।’ मेरी हमेशा से इच्छा कुछ अलग करने की ही रही है। 1995 में दिल्ली आने से पूर्व हमारा परिवार मेरठ में रहता था।
जहां मैंने सोफिला गर्ल्स स्कूल से पहली से छठी तक की पढ़ाई की। वहां से दिल्ली आने के बाद दिल्ली के लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल से 10वीं पास की फिर धौला कुआं स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल से अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की।
वर्ष 2006 में एनएसआईटी द्वारका से पढ़ाई की। वर्ष 2006 से वर्ष 2008 तक डीयू के एफएमएस से फाइनेंस और मार्केटिंग में एमबीए किया। फिर कैडबरी इंडिया में कस्टमर डेवलपमेंट मैनेजर की पोस्ट पर दो साल तक काम किया।
जो मंजिल आपने आज पाई है उसका सफर कब शुरू किया?
मेरे सफर की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई। जब मैंने पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी। इसमें मैंने 815वीं रैंक हासिल की और भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी बनीं।
लेकिन मुझे मेडिकल तौर पर इसके लिए अयोग्य बताया गया। मेरी लंबाई 4.5 फुट है। इसके बाद मैंने अपने हक की लड़ाई के लिए सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया।
जहां से राहत मिली जिसका नतीजा है कि मैं वर्तमान में हैदराबाद में आईआरएस की ट्रेनिंग ले रही हूं। मैंने अपनी लड़ाई वर्ष 2012 में शुरू की और इसका रिजल्ट मुझे 2014 में मिला।
इस बीच मैंने वर्ष 2012, 2013 में भी सफलता प्राप्त की लेकिन रैंक बहुत ज्यादा ही आते रहे। पर इस बार मैंने रैंक लाने की ठान ली थी।
अब आगे क्या करना चाहती हैं?
मैं देश के साथ-साथ नि:शक्तों के लिए भी काम करना चाहती हूं। नि:शक्तों को उनका हक दिलाने के किए काम करना चाहती हूं। शायद अब लोग लड़कियों को भी बेहतर नजरिए से देखने लगेंगे। मैं उम्मीद करती हूं कि मुझसे लोगों को प्रेरणा मिलेगी।
सर्वगुण संपन्न है हमारी बिटिया
इरा की मां अनीता ने बताया कि बेटी में इतनी खूबियां हैं कि उसे सर्वगुण संपन्न लड़की कहा जाए तो गलत नहीं होगा। सफदरजंग एन्क्लेव स्थित उनके घर से हुई बातचीत में अनीता ने बताया कि हम अपने कामों में व्यस्त रहे, जिसके कारण कई बार उसे समय नहीं दे पाए। लेकिन उसने कभी शिकायत नहीं की।
उसने अपने अकेलेपन का साथी उपन्यासों को बनाया। अब उपन्यास ही उसके दोस्त बन गए हैं। न केवल उसे ज्योतिष में रुचि है बल्कि वह एक अच्छी टैरो कार्ड रीडर भी है। साथ ही वह खाना बनाने, इवेंट आयोजित करने, नृत्य करने व अभिनय करने का शौक रखती है। इन सब में वह महारथी है।
वह अकेले विश्व भ्रमण पर निकल जाती है, जिसके कारण देश से लेकर दुनिया भर में उसके काफी दोस्त हैं। उसने हमसे कभी बोर होने की शिकायत नहीं की। अंग्रेजी के साथ-साथ वह स्पेनिश व फ्रेंच भी अच्छी बोलती है।