संकट में 2831 लेखपालों की भर्ती, पढ़िए नया अड़ंगा
यूपी में 2831 चकबंदी लेखपालों की भर्ती का मामला विज्ञापन जारी होने के साथ ही विवादों में फंस गया है। भर्ती के लिए आठ अप्रैल 2015 को जारी विज्ञापन में अनुसूचित जाति वर्ग को 21 प्रतिशत से कम आरक्षण देने का आरोप है।
इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में गाजीपुर के अरविंद कुमार ने याचिका दाखिल की है। न्यायमूर्ति वीके बिरला ने याचिका पर पक्षकारों को सुनने के बाद सरकार को 27 मई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याची का कहना है कि विज्ञापन में 2831 पद घोषित किए गए हैं। इसमें अनुसूचित जाति वर्ग के लिए मात्र 50 सीटें आरक्षित की गई हैं। जबकि 21 फीसदी के हिसाब से 592 सीटें आरक्षित होनी चाहिए।
याचिका में राजस्व सचिव, सचिव अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और आयुक्त चकबंदी को पक्षकार बनाया गया है। विज्ञापन रद कर नए सिरे से आरक्षण का निर्धारण कर विज्ञापन जारी करने की मांग की है। कोर्ट ने स्थायी अधिवक्ता जगदीश सिंह बुंदेला को 27 मई तक जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। उल्लेखनीय है कि लेखपाल के पद आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 22 मई थी।
तकनीकी सहायक कृषि के रिजल्ट पर भी सवाल
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की तकनीकी सहायक कृषि भर्ती परीक्षा के परिणाम पर भी आपत्ति उठने लगी है। अभ्यर्थियों ने इसमें आरक्षण नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। अभ्यर्थियों ने इसके खिलाफ भी हाईकोर्ट में जाने की घोषणा की है।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की शुक्रवार को हुई बैठक में अयोध्या सिंह का कहना था कि इस भर्ती के कुल 6999 पदों में तीन हजार से आधिक ओबीसी के अभ्यर्थी चयनित हुए हैं। इनमें 1270 पदों को ओवरलेप द्वारा भरा गया है।
उनका कहना था कि आयोग ने यह रिजल्ट रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर घोषित किया है। सफल अभ्यर्थियों के नाम नहीं घोषित किए गए हैं। यह सब गड़बड़ी के लिए किया जा रहा है। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की घोषणा की। बैठक में अवनीश पांडेय, अमित सिंह राणा, संदीप यादव, रजनीश, बजरंगी तिवारी, रवि प्रताप सिंह आादि मौजूद रहे।