बीपीएससी: एआई से चेक नहीं हुईं 70वीं परीक्षा की कॉपियां, आयोग ने दी सफाई, बताया कैसे हुआ मूल्यांकन
BPSC 70th CCE: बीपीएससी ने 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को खारिज किया है। साथ ही आयोग ने यह भी बताया है कि कॉपियों की जांच किस व्यवस्था से और किन विशेषज्ञों ने की।
विस्तार
BPSC 70th CCE: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर सफाई दी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अभ्यर्थियों की कॉपियों की जांच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए नहीं की गई है। सभी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन अनुभवी प्रोफेसरों और शिक्षाविदों ने किया है।
किस व्यवस्था से हुआ उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन?
- 70वीं एकीकृत संयुक्त लिखित प्रतियोगिता परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) व्यवस्था के तहत की गई।
- इस प्रक्रिया में देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से जुड़े अनुभवी प्रोफेसरों और शिक्षाविदों को मूल्यांकन की जिम्मेदारी दी गई थी।
क्या पहले भी ओएसएम व्यवस्था का इस्तेमाल हुआ है?
बीपीएससी ने बताया कि आयोग जनवरी 2023 से ओएसएम व्यवस्था का इस्तेमाल कर रहा है। इससे पहले 67वीं, 68वीं और 69वीं संयुक्त मुख्य प्रतियोगी परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन भी इसी व्यवस्था के तहत किया जा चुका है।
एआई से जांच और डाटा में छेड़छाड़ के दावों पर क्या कहा?
आयोग ने सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों को भ्रामक बताया है, जिनमें 70वीं परीक्षा की कॉपियों को एआई से जांचे जाने या डाटा में छेड़छाड़ किए जाने की बात कही जा रही थी। बीपीएससी ने ऐसे दावों को बिना आधार का बताया है।
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— Bihar Public Service Commission (@BPSCOffice) September 10, 2026
ओएसएम के डाटा की सुरक्षा कैसे होती है?
बीपीएससी के मुताबिक, OSM व्यवस्था से जुड़ा पूरा डाटा आयोग के सुरक्षित सर्वर पर रखा जाता है। इसके अलावा अलग स्थान पर डिजास्टर रिकवरी सर्वर भी मौजूद है। सिस्टम में कई स्तरों पर जांच और सुरक्षा की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके।
उत्तर पुस्तिकाओं में बदलाव के दावे पर आयोग का क्या कहना है?
आयोग ने कहा है कि ओएसएम प्रक्रिया से जुड़े डाटा का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है। बीपीएससी के अनुसार, उत्तर पुस्तिकाओं या डाटा में अनधिकृत बदलाव किए जाने से जुड़े दावे पूरी तरह निराधार हैं।