SSC: यूपी-बिहार में 40 फीसदी लोगों ने नहीं दी परीक्षा
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कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा 2015 में आयोग की ओर से की गई सख्ती का असर परीक्षा पर दिखाई पड़ा। एसएससी मध्य क्षेत्र की ओर से उत्तर प्रदेश एवं बिहार के नौ शहरों में हुई परीक्षा में कहीं से कोई गड़बड़ी नहीं पकड़ी गई। सीजीएल की पहले चरण की परीक्षा के लिए मध्य क्षेत्र की ओर से कुल 3.5 लाख परीक्षार्थियों के लिए 362 परीक्षा केन्द्र बनाए गए थे। इलाहाबाद में 77 केंद्रों पर 98500 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी।
एसएससी मध्य क्षेत्र की ओर से बाहरी परीक्षार्थियों पर कड़ी निगरानी और परीक्षा के दौरान यूनिक पेपर सेट तैयार किए जाने से मोबाइल और इलेक्ट्रानिक डिवाइस से नकल करने वाले अभ्यर्थी पहले चरण में ही बाहर हो गए। एसएससी मध्य क्षेत्र के निदेशक जेपी गर्ग ने बताया कि यूनिक पेपर सेट तैयार करके हर प्रश्न के क्रमांक बदलने और ओएमआर से सीधे प्रश्नपत्र को जोड़ देने से नकलचियों के मंसूबे सफल नहीं हो सके।
एसएससी की ओर से सीजीएल 2015 में परीक्षा कक्ष के अंदर परीक्षार्थियों के बैठने का क्रम कक्ष निरीक्षक एवं केन्द्र व्यवस्थापक को दे देने के बाद नकलची एक साथ नहीं बैठ पाए। इसके साथ ओएमआर पर बायें हाथ का अंगूठा लगाए जाने के नियम के बाद फर्जी परीक्षार्थियों को भी रोका जा सका है।
परीक्षार्थियों ने किया हंगामा
एसएससी की ओर से सीजीएल-2015 की परीक्षा से पहले परीक्षार्थियों को निर्देश दिया गया था कि उन्हें परीक्षा शुरू होने के आधा घंटा पहले परीक्षा केन्द्र के अंदर प्रवेश कर जाना है। इसके बाद भी शहर में कई परीक्षा केन्द्रों पर परीक्षार्थी परीक्षा केन्द्र का मुख्य द्वार बंद होने के बाद पहुंचे। ऐसे परीक्षार्थियों को केन्द्र व्यवस्थापकों ने अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। इन परीक्षार्थियों ने परीक्षा केन्द्र पर हंगामा करने के साथ आरोप लगाया कि वह समय से पहुंचे थे, इसके बाद भी उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। परीक्षा से वंचित छात्रों ने एसएससी मध्य क्षेत्र के लाउदर रोड स्थित कार्यालय पर प्रदर्शन भी किया।
शहर के पंचम लाल इंटर कॉलेज ट्रांसपोर्टनगर पर परीक्षा देने पहुंचे परीक्षार्थियों ने अमर उजाला को बताया कि 9.10 बजे केन्द्र पहुंचने के बाद भी उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। केन्द्र व्यवस्थापक ने दूसरी पाली में परीक्षा में शामिल कराने की बात कही, परंतु जब आयोग के लोगों से बात की गई तो उन्होंने दूसरी पाली में परीक्षा में शामिल करने से मना कर दिया। इसी प्रकार नैनी के ईश्वर प्रेम विद्याश्रम में परीक्षा के दौरान देरी से पहुंचे अभ्यर्थियों ने प्रवेश नहीं मिलने पर हंगामा किया। अरैल नैनी के एक विद्यालय में परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों ने मोबाइल गायब होने की शिकायत की है। एसएससी मध्य
क्षेत्र के निदेशक जेपी गर्ग ने बताया कि अभ्यर्थियों को पहले से निर्देश दिया गया था कि परीक्षा छूटने के लिए वह स्वयं दोषी हैं। आयोग इस बारे में कुछ नहीं कर सकता।
बिना मान्यता वाले स्कूलों को बनाया परीक्षा केन्द्र
एसएससी की ओर से परीक्षा केन्द्र बनाने में जिला विद्यालय निरीक्षकों से विद्यालयों की सूची नहीं मांगे जाने के कारण परीक्षा में बिना मान्यता वाले अथवा बदनाम स्कूलों को परीक्षा केन्द्र बनाए जाने की शिकायत मिली है। शहर के अंदर नामी और मान्यता प्राप्त विद्यालयों को परीक्षा केन्द्र नहीं बनाया गया। नैनी और ट्रांसपोर्टनगर के कुछ नकल के लिए बदनाम विद्यालयों को परीक्षा केन्द्र बना दिया गया।
लखनऊ में इसी प्रकार से कई ऐसे विद्यालयों को परीक्षा केन्द्र बना दिया जिनकी मान्यता ही नहीं है। जिला विद्यालय निरीक्षक कोमल यादव ने बताया कि एसएससी वाले केन्द्र के लिए उनके कार्यालय से जानकारी नहीं लेते हैं। जबकि सिविल सेवा परीक्षा में भी उनके कार्यालय से केन्द्रों की सूची मांगी जाती है।