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500-1000 के नोट बंद होने से नक्सलियों के डूबेंगे 500 करोड़ !
टीम डिजीटल/ अमर उजाला /दिल्ली
Updated Thu, 10 Nov 2016 07:37 PM IST
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- फोटो : social media
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1000 और 500 के नोट बंद होने से नक्सलियों की मुश्किलें बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि झारखंड में करीब 500 करोड़ रुपये नक्सलियों के डूब जाएंगे। खुफिया एजेंसियों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार के इस कदम से नक्सली-उग्रवादी संगठनों की आर्थिक स्थिति कमजोर होगी। लेवी के रूप में वसूले गये अधिकांश रुपये छिपा कर रखे गये हैं, जो अब बेकार हो जायेंगे। अनुमान है कि झारखंड में सक्रिय नक्सलियों और उग्रवादियों द्वारा 500 करोड़ से अधिक रुपये के नोट छिपा कर रखे गये हैं।
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सूत्रों के मुताबिक, राज्य में सक्रिय नक्सलियों और उग्रवादियों द्वारा विकास योजनाओं से हर साल करीब 90 करोड़ रुपये की वसूली की जाती है। करीब 20 करोड़ रुपये की लेवी की वसूली आयरन और कोयला क्षेत्र से की जाती है।
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पिछले तीन साल में पुलिस ने माओवादियों के ठिकानों से ढाई करोड़ रुपये से अधिक की बरामदगी की है। वर्ष 2014 में खुफिया एजेंसियों को पता चला था कि टीपीसी से कुछ उग्रवादी रायपुर में एक होटल खरीदने गये थे।
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नोट बदलने के लिए कारोबारियों से नक्सलियों ने साधा संपर्क
सूत्रों का कहना है कि झारखंड में सक्रिय नक्सली और उग्रवादी 500 और 1000 के नोट को बदलने के लिए ठेकेदार, ट्रांसपोर्टर और बड़े कारोबारियों से संपर्क साध रहे हैं। पुलिस तक सूचना पहुंची है कि वे एक-दो दिनों में लेवी के रूप में वसूली गयी राशि को अपने ठिकानों से निकाल कर व्यवसायियों तक पहुंचायेंगे, ताकि उन नोटों को बदला जा सके।
चतरा में सक्रिय उग्रवादियों ने कुछ ट्रांसपोर्टरों पर दबाव बनाया है कि पुराने नोट ले लें। एक-दो माह बाद 2000 के नये नोट पहुंचा दें।
चतरा में सक्रिय उग्रवादियों ने कुछ ट्रांसपोर्टरों पर दबाव बनाया है कि पुराने नोट ले लें। एक-दो माह बाद 2000 के नये नोट पहुंचा दें।