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Jharkhand: 'माध्यमिक कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ाएगी', ICAR की एक कार्यक्रम में बोलीं राष्ट्रपति मुर्मू

Fri, 20 Sep 2024 02:21 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: श्वेता महतो Updated Fri, 20 Sep 2024 02:21 PM IST
सार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि झारखंड का लाख उत्पादन आदिवासी समुदाय के लिए आय को एक मुख्य स्रोत है। उन्होंने आदिवासियों के लिए गहरा सम्मान व्यक्त किया

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Secondary agriculture can boost rural economy says President Droupadi Murmu
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (फाइल) - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शुक्रवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उन्होंने बताया कि माध्यमिक कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) को कचरे को धन में बदलने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि आईसीएआर को किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य की दिशा में काम करना चाहिए। 
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, "माध्यमिक कृषि में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ाने की क्षमता है। आईसीएआर को किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य की दिशा में काम करना चाहिए।" भारतीय लाख की निर्यात क्षमता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया के देश के कुल लाख उत्पादन में झारखंड की हिस्सेदारी 55 फीसदी है। बता दें कि दवा उद्योग और कॉस्मेटिक्स में लाख की उच्च मांग है। 
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राष्ट्रपति ने कहा, "झारखंड का लाख उत्पादन आदिवासी समुदाय के लिए आय को एक मुख्य स्रोत है।" उन्होंने आदिवासियों के लिए गहरा सम्मान व्यक्त किया और कहा, "आदिवासी दिग्गज बिसरा मुंडा की भूमि पर आना मेरे लिए तीर्थयात्रा पर जाने जैसा है।" राष्ट्रपति मुर्मू ने आगे कहा, "झारखंड से मेरा विशेष लगाव है। मुझे यहां के लोगों से बहुत प्यार मिलता है। मैंने कई वर्षों तक यहां जनसेवा की है।ठ उन्होंने राज्यपाल के तौर पर अपने कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि किसानों द्वारा उत्पादित कच्ची लाख 100 से 200 रुपये प्रति किलोग्राम बेची जाती थी, जबकि इसकी कीमत तीन हजार प्रति किग्रां तक हो सकती थी। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्यपाल संतोष गंगवार और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और संजय सेठ भी शामिल थे। 
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