NDRF Survey: यात्री रोप-वे और केबल कार का सुरक्षा ऑडिट शुरू, एनडीआरएफ ने शुरू किया राष्ट्रव्यापी अभियान
यह कदम इस साल झारखंड, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश में हुई कम से कम तीन रोपवे दुर्घटनाओं को देखते हुए उठाया गया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण शुरू कर दिया है, जिसके जरिए यात्री केबल कार और रोप-वे प्रणालियों में संभावित सुरक्षा खामियों का पता लगाने के लिए एक ढांचागत खाका तैयार किया जाएगा। इससे दुर्घटना या आपात स्थिति में प्रभावी बचाव अभियान शुरू करने में मदद मिलेगी। केंद्रीय बल ने अपने दल को विशिष्ट रोपवे बचाव कौशल में प्रशिक्षित करने का भी निर्णय लिया है। इसके अलावा पुली और कारबिनर जैसे उपकरणों की खरीद का भी फैसला किया गया है। इसका इस्तेमाल बचावकर्ता हवा में लटकी कार में फंसे लोगों को निकालने में करेंगे।
यह कदम इस साल झारखंड, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश में हुई कम से कम तीन रोपवे दुर्घटनाओं को देखते हुए उठाया गया है। अप्रैल में झारखंड के देवघर जिले के त्रिकूट पहाड़ियों पर रोपवे की केबल कार के हवा में फंसने पर भारतीय वायु सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और स्थानीय प्रशासन द्वारा 40 घंटे का लंबा बचाव अभियान चलाया था। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी और 12 लोगों को बचाया गया था।
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के परवानू टिम्बर ट्रेल में गत जून में एक केबल कार में 11 लोग घंटों तक फंसे रहे और एनडीआरएफ तथा अन्य एजेंसियों ने छह घंटे के लंबे अभियान के बाद उन्हें बचाया। इसी तरह मई में मध्य प्रदेश में सतना जिले के मैहर में पहाड़ी की चोटी पर स्थित देवी 'शारदा' के दर्शन करने वाले तीर्थयात्रियों के केबल कार में फंसने के लगभग एक घंटे बाद बचाया गया।
एनडीआरएफ के महानिदेशक (डीजी) अतुल करवाल ने बताया कि हमने देश में सभी यात्री रोपवे और केबल कार प्रणालियों के संचालन को समझने और उपचारात्मक कार्रवाई का सुझाव देने के लिए एक सर्वेक्षण शुरू किया है। भारत में 50 से अधिक ऐसी प्रणालियां हैं, जो तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और यात्रियों के परिवहन के लिए उपयोग की जाती हैं।