झारखंड: शहीद की टूटी प्रतिमा महीनेभर जमीन पर पड़ी रही, मां ने तीन लाख खर्च कर बेटे को फिर दिलाया सम्मान
गुमला जिले में शहीद संतोष उरांव की टूटी प्रतिमा करीब एक महीने तक जमीन पर पड़ी रही। प्रतिमा दोबारा स्थापित कराने के लिए शहीद की मां गीता देवी ने स्थानीय विधायक सह मंत्री चमरा लिंडा से तीन बार मुलाकात की और अधिकारियों से भी गुहार लगाई, लेकिन पहल नहीं हुई।
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देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए संतोष उरांव की टूटी प्रतिमा करीब एक महीने तक जमीन पर पड़ी रही। गुमला जिले में हुई इस घटना के बाद प्रतिमा को दोबारा स्थापित कराने के लिए कई बार गुहार लगाने के बावजूद जब कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो शहीद की मां गीता देवी ने खुद आगे बढ़कर बेटे को सम्मान दिलाने का फैसला किया। उन्होंने अपनी निजी राशि से करीब तीन लाख रुपये खर्च कर शहीद संतोष उरांव की नई आदमकद प्रतिमा बनवाई और उसे दोबारा स्थापित कराया।
तीन बार मंत्री से मिलीं, फिर खुद उठाया जिम्मा
गीता देवी के अनुसार, बेटे की प्रतिमा दोबारा स्थापित कराने के लिए उन्होंने स्थानीय विधायक सह मंत्री चमरा लिंडा से तीन बार मुलाकात की थी। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों से भी प्रतिमा स्थापित कराने का आग्रह किया गया। इसके बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने अपने स्तर से ही नई प्रतिमा बनवाकर लगाने का निर्णय लिया। गीता देवी ने कहा कि शहीद का सम्मान करना हर किसी की जिम्मेदारी है। जब कोई आगे नहीं आया, तो एक मां होने के नाते उन्होंने अपने बेटे की प्रतिमा दोबारा स्थापित कराने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने अपनी निजी राशि खर्च की।
घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का आरोप
इधर, ग्रामीणों का आरोप है कि घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल के कारण पुरानी प्रतिमा टूटकर गिर गई थी। नई प्रतिमा स्थापित होने के बाद ग्रामीणों ने शहीद की मां के प्रति सम्मान जताया और उनके इस कदम की सराहना की। ग्रामीणों ने जिले में शहीदों की प्रतिमाओं और स्मारकों के नियमित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि शहीदों के सम्मान से जुड़े स्मारकों की देखरेख में लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने पूछा- प्रतिमाओं की देखरेख की जिम्मेदारी किसकी?
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि शहीदों की प्रतिमाओं और स्मारकों की देखरेख की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि एक शहीद की मां को अपने बेटे के सम्मान के लिए अपनी निजी राशि से करीब तीन लाख रुपये खर्च करने की नौबत क्यों आई। ग्रामीणों का कहना है कि शहीदों की प्रतिमाओं के नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी शहीद की प्रतिमा लंबे समय तक क्षतिग्रस्त हालत में न पड़ी रहे।