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झारखंड: रजरप्पा मंदिर के विकास पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार के फंड वाले रुख पर उठाए सवाल; मांगी स्टेटस रिपोर्ट
Thu, 10 Sep 2026 06:11 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला रांची
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Thu, 10 Sep 2026 06:11 PM IST
सार
झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ के प्रसिद्ध रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर के जीर्णोद्धार और बुनियादी सुविधाओं के विकास से जुड़े अवमानना मामले में राज्य सरकार से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने मंदिर विकास के लिए फंड को लेकर सरकार के बदलते रुख पर सवाल उठाए हैं। पढ़ें पूरी खबर
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झारखंड उच्च न्यायालय
- फोटो : ANI
विस्तार
झारखंड उच्च न्यायालय ने रामगढ़ जिला स्थित प्रसिद्ध रजरप्पा के मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार और बुनियादी सुविधाओं के विकास से जुड़े अवमानना मामले में राज्य सरकार से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने मंदिर परिसर के विकास के लिए फंड की व्यवस्था और राज्य सरकार के बदलते रुख पर कड़े सवाल उठाए हैं। उच्च न्यायालय ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई तक इस मामले में पूरी स्थिति स्पष्ट करते हुए प्रगति रिपोर्ट अदालत के समक्ष दाखिल करे।
मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के तर्कों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पूर्व में पर्यटन सचिव ने अदालत को यह जानकारी दी थी कि मंदिर परिसर के विकास कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं है। अब राज्य सरकार केंद्र सरकार की प्रसाद योजना के तहत राशि मांगने की बात कह रही है। अदालत ने इस बदलाव पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब फंड की कमी नहीं थी तो केंद्र सरकार की प्रसाद योजना से राशि क्यों मांगी जा रही है। सरकार को इस संबंध में अगली सुनवाई तक अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
अदालत के निर्देशों का अनुपालन अब तक नहीं
यह पूरा मामला प्रार्थी संजीव कुमार सिंह की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा हुआ है। प्रार्थी ने अपनी याचिका में जनहित याचिका में पूर्व में पारित अदालत के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार और वहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों का अपेक्षित अनुपालन अब तक नहीं हुआ है।
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मंदिर परिसर के विकास से जुड़े इस मामले की सुनवाई के दौरान रामगढ़ के उपायुक्त भी अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे।
ये भी पढ़ें- रांची में बड़ा हादसा: पानी टंकी का टावर गिरा, मलबे में दबकर दो मजदूरों की मौत; तीन को किया गया रेस्क्यू
17 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के पक्ष को सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 सितंबर की तारीख निर्धारित की है। तब तक राज्य सरकार को मंदिर परिसर के विकास कार्यों, फंड की व्यवस्था और पूर्व में पारित आदेशों के अनुपालन से संबंधित विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करनी होगी। अदालत की अगली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से की गई प्रगति और उसके दावों की विस्तार से समीक्षा की जाएगी।
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मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के तर्कों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पूर्व में पर्यटन सचिव ने अदालत को यह जानकारी दी थी कि मंदिर परिसर के विकास कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं है। अब राज्य सरकार केंद्र सरकार की प्रसाद योजना के तहत राशि मांगने की बात कह रही है। अदालत ने इस बदलाव पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब फंड की कमी नहीं थी तो केंद्र सरकार की प्रसाद योजना से राशि क्यों मांगी जा रही है। सरकार को इस संबंध में अगली सुनवाई तक अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
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अदालत के निर्देशों का अनुपालन अब तक नहीं
यह पूरा मामला प्रार्थी संजीव कुमार सिंह की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा हुआ है। प्रार्थी ने अपनी याचिका में जनहित याचिका में पूर्व में पारित अदालत के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार और वहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों का अपेक्षित अनुपालन अब तक नहीं हुआ है।
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मंदिर परिसर के विकास से जुड़े इस मामले की सुनवाई के दौरान रामगढ़ के उपायुक्त भी अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे।
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17 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के पक्ष को सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 सितंबर की तारीख निर्धारित की है। तब तक राज्य सरकार को मंदिर परिसर के विकास कार्यों, फंड की व्यवस्था और पूर्व में पारित आदेशों के अनुपालन से संबंधित विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करनी होगी। अदालत की अगली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से की गई प्रगति और उसके दावों की विस्तार से समीक्षा की जाएगी।