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झारखंड: पुरुलिया में बनेगा क्षेत्रीय हवाई अड्डा, 80 करोड़ खर्च के बाद भी बोकारो में उड़ान अटकी

Sat, 26 Sep 2026 08:25 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: प्रतीक पांडेय Updated Sat, 26 Sep 2026 08:25 PM IST
सार

पुरुलिया का छर्रा एयरफील्ड बोकारो से महज 26 किलोमीटर दूर क्षेत्रीय हवाई अड्डे के रूप में विकसित होने जा रहा है। वहीं 80 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद बोकारो हवाई अड्डे से यात्री उड़ानें शुरू होने का इंतजार जारी है।

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purulia chharra regional airport near bokaro 80 crore bokaro airport flight uncertainty air connectivity
बोकारो हवाई अड्डा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया स्थित छर्रा एयरफील्ड को क्षेत्रीय हवाई अड्डे के रूप में विकसित करने की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। यह स्थल बोकारो से केवल 26 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। केंद्र सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के बीच राज्य के चार क्षेत्रीय हवाई अड्डों के विकास के संबंध में 28 सितंबर को औपचारिक समझौता होने जा रहा है। छर्रा एयरफील्ड से नियमित विमान परिचालन आरंभ होने पर बोकारो तथा धनबाद जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों के हवाई संपर्क का समीकरण व्यापक रूप से प्रभावित हो सकता है।
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विरासत को विकसित करने की ऐतिहासिक पहल
द्वितीय विश्व युद्ध के समय वर्ष 1942 में ब्रिटिश शासन ने सैन्य गतिविधियों के संचालन के लिए छर्रा एयरफील्ड का निर्माण कराया था। लगभग आठ दशक तक निष्क्रिय रहने के पश्चात अब पश्चिम बंगाल सरकार इसे वाणिज्यिक विमान सेवा के लिए नए सिरे से विकसित कर रही है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने राज्यसभा में सूचित किया था कि वर्ष 2023 में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने राज्य सरकार के आग्रह पर इस एयरफील्ड का पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन कर रिपोर्ट सौंप दी थी। पूर्व विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अनुसार यहां 1700 मीटर लंबा रनवे बनना प्रस्तावित था, जिसे नए प्रस्ताव के तहत और बढ़ाने की संभावना है। छर्रा एयरफील्ड परिसर में भूमि की कोई कमी नहीं है।
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भारी बजट खर्च के बाद भी बोकारो में अनिश्चितता
दूसरी तरफ, बोकारो हवाई अड्डे से नागरिक उड़ानों की शुरुआत को लेकर गतिरोध बना हुआ है। हवाई अड्डे के सुदृढ़ीकरण पर 80 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा चुकी है। अप्रैल 2022 में रनवे, टर्मिनल भवन और अन्य बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का निर्माण पूर्ण होने के उपरांत भी उड़ानें शुरू नहीं हो पाई हैं। वर्ष 2018 में इस हवाई अड्डे के पुनर्विकास का शिलान्यास किया गया था और वर्ष 2020 तक विमान सेवा चालू होने की संभावना जताई गई थी। आरंभ में एलायंस एयर और स्पाइसजेट ने पटना व कोलकाता के लिए उड़ानों का प्रस्ताव दिया था, परंतु देश में 72 सीटों वाले छोटे विमानों की उपलब्धता न होने से मामला लंबित है। इसके अतिरिक्त, बोकारो में अब पर्यावरणीय मंजूरी से जुड़ी नई अड़चन भी उत्पन्न हो गई है।
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औद्योगिक पट्टी और क्षेत्रीय संपर्क पर असर
छर्रा हवाई अड्डा केवल यात्रियों की आवाजाही तक सीमित न रहकर क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी मुख्य भूमिका निभाएगा। पश्चिम बंगाल सरकार इस हवाई अड्डे को स्थानीय पर्यटन, व्यापार, रघुनाथपुर औद्योगिक क्षेत्र, अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे और नए इस्पात संयंत्रों की परियोजनाओं के साथ जोड़कर आगे बढ़ा रही है। दूसरी ओर, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने बोकारो हवाई अड्डे की चारदीवारी पर क्षतिग्रस्त कंसर्टिना कॉइल लगाने के लिए पुनः निविदा जारी की है। हालांकि बोकारो से यात्री उड़ानों के शुरू होने का समय अब भी स्पष्ट नहीं है।
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