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झारखंड: 14 साल बाद घर लौटी लापता बेटी, परिजनों ने मान लिया था मृत; इलाज के बाद लौटी याददाश्त

Sat, 26 Sep 2026 07:06 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: प्रतीक पांडेय Updated Sat, 26 Sep 2026 07:06 PM IST
सार

गढ़वा की 15 वर्षीय किशोरी वर्ष 2011 में मानसिक अस्वस्थता के कारण घर से भटककर हावड़ा पहुंच गई थी। 14 साल तक बाल गृह और बालिका गृह में रहने, इलाज व काउंसलिंग के बाद उसकी याददाश्त लौटी और वह परिवार के बारे में जानकारी दे सकी। 25 सितंबर को उसका परिजनों से पुनर्मिलन हुआ।
 

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garhwa missing daughter returns home after 14 years family believed her dead deoghar child home ranchi rinpas
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चौदह वर्ष पहले लापता हुई और जिसे परिजन मृत मान चुके थे, वह बेटी आखिरकार अपने घर लौट आई है। मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण वर्ष 2011 में घर से भटकी युवती का लंबे समय तक इलाज कराया गया। चिकित्सा और परामर्श के बाद याददाश्त वापस आने पर उसे परिजनों से मिलाया गया। परिवार के अनुसार, उसकी आयु अब करीब 30 वर्ष हो चुकी है।
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हावड़ा से देवघर तक पहुंची थी किशोरी
वर्ष 2011 में गढ़वा जिले के रमना प्रखंड स्थित चटनिया गांव की रहने वाली करीब 15 वर्षीय किशोरी मानसिक अस्वस्थता के कारण भटकते हुए पश्चिम बंगाल के हावड़ा पहुंच गई थी। हावड़ा बाल कल्याण समिति ने उसे अपने संरक्षण में लेकर एक वर्ष तक बाल गृह में रखा। शुरुआती दिनों में वह ठीक से बोल नहीं पा रही थी। पूछताछ में वह केवल इतना बता पाती थी कि वह झारखंड की रहने वाली है।
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इसके बाद वर्ष 2012 में उसे देवघर स्थित बालिका गृह में स्थानांतरित कर दिया गया। यहां उसकी देखभाल जारी रही और परिवार से जुड़ी जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जाता रहा।
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रिनपास में इलाज और लगातार काउंसलिंग
देवघर बालिका गृह में रहने के दौरान युवती का रांची स्थित रिनपास में नियमित इलाज कराया गया। इसके साथ ही संस्था में उसकी लगातार काउंसलिंग भी की जाती रही। शुरुआती वर्षों में उसकी मानसिक स्थिति ऐसी थी कि वह अपने परिवार के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रही थी।

लगातार इलाज, परामर्श और देखभाल के बाद उसकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। समय बीतने के साथ उसने अपने पिता का नाम, जिला और भाई-बहनों के नाम बताने शुरू किए। इन जानकारियों के आधार पर उसके परिवार की तलाश शुरू की गई।


25 सितंबर को परिवार से हुआ पुनर्मिलन
बाल कल्याण समिति देवघर ने रमना थाना प्रभारी और क्षेत्र के मुखिया से संपर्क किया। स्थानीय स्तर पर छानबीन और सत्यापन के बाद युवती के परिवार का पता लगाया गया। लंबे समय से बेटी की कोई खबर नहीं मिलने के कारण परिजनों ने उसे मृत मान लिया था। आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद 25 सितंबर को देवघर बालिका गृह में युवती को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। 14 साल बाद बेटी को सामने देखकर परिवार में भावुक माहौल रहा।
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